हरियाणा के गांवों की पगडंडियों से निकलकर जापान के मैदानों तक पहुंचे 14 खिलाड़ी, भारत के लिए बने पदक के दावेदार
झज्जर जिले के 14 खिलाड़ी जापान में आयोजित एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो विभिन्न खेलों में पदक के प्रबल दावेदार हैं।

सुमित नागल, मनु भाकर, अमन सहरावत (फाइस फोटो)
HighLights
झज्जर से 14 खिलाड़ी एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं
सुमित नागल, अमन सहरावत, मनु भाकर जैसे प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं
यह जिला कुश्ती, कबड्डी सहित कई खेलों की नर्सरी बन गया है
जागरण संवाददाता, झज्जर। जिला झज्जर आज देश की ऐसी खेल नर्सरी बनकर उभरा है, जहां की माटी से निकले खिलाड़ियों ने अपनी लगन, अनुशासन और अदम्य खेल भावना के बल पर विश्व पटल पर भारत का परचम लहराया है। गांव के मिट्टी के अखाड़ों और तंग मैदानों से शुरू हुआ यह सफर आज ओलिंपिक और एशियाई खेलों के स्वर्णिम मंच तक पहुंच चुका है।
कुश्ती और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों में अपना दबदबा साबित करने के बाद, झज्जर की प्रतिभाएं अब निशानेबाजी, टेनिस, गोल्फ, कुराश, साइक्लिंग, नौकायन और वॉलीबाल जैसे आधुनिक खेलों में भी देश का मान बढ़ा रही हैं। जापान के नागोया में शनिवार से प्रारंभ हुए एशियाई खेलों में जिले के 14 खिलाड़ियों का भारतीय दल में चयन होना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यहां का हर युवा विपरीत परिस्थितियों को पछाड़कर स्वर्णिम इतिहास रचने का जज्बा रखता है।
1. सुमित नागल (टेनिस - गांव जैतपुर)
झज्जर के गांव जैतपुर निवासी सुमित नागल अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत का प्रमुख चेहरा हैं। अपनी आक्रामक फोरहैंड और बेसलाइन गेम के लिए प्रसिद्ध सुमित सिंगल्स स्पर्धा में देश के मजबूत पदक दावेदार हैं।
उपलब्धियां: 2015 विंबलडन जूनियर ब्वायज डबल्स विजेता। बेंगलुरु, ब्यूनस आयर्स और चेन्नै एटीपी चैलेंजर खिताब। टोक्यो 2020 व पेरिस 2024 ओलिंपियन तथा विश्व रैंकिंग में शीर्ष-100 में शामिल।
2. अमन सहरावत (कुश्ती - गांव बिरोहड़)
पेरिस ओलिंपिक के कांस्य पदक विजेता पहलवान अमन सहरावत 3 अक्टूबर को जापान में 57 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक के लिए दांव लगाएंगे। दिल्ली रेलवे में सेवारत अमन इन दिनों लखनऊ में कड़े अभ्यास में जुटे हैं।
उपलब्धियां: पेरिस ओलिंपिक में कांस्य पदक और हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक। अपनी फिटनेस, गति और सटीक मैच रणनीति के लिए जाने जाते हैं।
3. अयान लोहचब (कबड्डी - गांव बुपनिया)
बादली क्षेत्र के गांव बुपनिया निवासी 20 वर्षीय अयान लोहचब भारतीय कबड्डी टीम में ''लेफ्ट रेडर'' की भूमिका निभाएंगे। वे पवन सहरावत जैसे दिग्गजों के साथ 21 से 26 सितंबर तक मैदान संभालेंगे।
उपलब्धियां: प्रो कबड्डी लीग (सीजन 11) में पटना पाइरेट्स से खेलते हुए 184 अंक जुटाकर ''बेस्ट न्यू यंग प्लेयर'' बने। जूनियर नेशनल में स्वर्ण और खेलो इंडिया में 2 स्वर्ण पदक जीते।
4. दीक्षा डागर (गोल्फ - गांव छप्पार)
गांव छप्पार की स्टार गोल्फर दीक्षा डागर सुनने की चुनौती को दरकिनार कर लेडीज यूरोपीय टूर में इतिहास रच चुकी हैं। बाएं हाथ से खेलने वाली दीक्षा की स्विंग और लंबी दूरी के सटीक शाट उनकी ताकत हैं।
उपलब्धियां: अर्जुन पुरस्कार विजेता। डेफलिंपिक्स में स्वर्ण व रजत पदक। ओलिंपिक और डेफलिंपिक्स दोनों में भाग लेने वाली दुनिया की एकमात्र गोल्फर।
5. मनु भाकर (निशानेबाजी - गांव गोरिया)
गांव गोरिया की विश्व स्तरीय पिस्तौल निशानेबाज मनु भाकर एशियन गेम्स में भारतीय दल की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक हैं। 10 मीटर और 25 मीटर पिस्तौल दोनों में उन्हें महारत हासिल है।
उपलब्धियां: पेरिस 2024 ओलिंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। आईएसएसएफ विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियन गेम्स (टीम) में कई स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
6. सुरुचि (निशानेबाजी - गांव सासरौली)
गांव सासरौली की होनहार निशानेबाज सुरुचि अपनी निरंतरता और सटीक निशानेबाजी के लिए जानी जाती हैं। पूर्व सैनिक पिता के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह बनाई है।
उपलब्धियां: आईएसएसएफ विश्व कप में 5 पदक और नेशनल गेम्स में 7 पदक जीते। दबाव के क्षणों में भी शांत रहकर सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं।
7. विशाल (कुराश- गांव डीघल)
गांव डीघल के खिलाड़ी विशाल अंतरराष्ट्रीय कुराश स्पर्धा में भारत की चुनौती पेश करेंगे। पिछले एक दशक से कुराश मैट पर पसीना बहा रहे विशाल अपने आक्रामक दांव-पेच के लिए पहचाने जाते हैं।
उपलब्धियां: सीनियर एशियन चैंपियनशिप 2022 में कांस्य पदक विजेता। गजब का शारीरिक संतुलन और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता उनकी खासियत है।
8. विपिन अहलावत (कुराश- गांव डीघल)
गांव डीघल निवासी विपिन अहलावत भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट में हवलदार हैं। सेना के कड़े अनुशासन और बेहतरीन शारीरिक फिटनेस के दम पर वे एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक के मजबूत दावेदार हैं।
उपलब्धियां: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न कुराश प्रतियोगिताओं में अनेक स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।
9. मीनाक्षी (साइक्लिंग - गांव दुबलधन माजरा) गांव दुबलधन माजरा की मीनाक्षी साइक्लिंग स्पर्धा में 29 सितंबर को ट्रैक पर उतरेंगी। एथलेटिक्स में कमर की चोट के बाद डाक्टर की सलाह पर साइक्लिंग शुरू करने वाली मीनाक्षी ने कच्ची-पक्की सड़कों से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया।
उपलब्धियां: सीमित संसाधनों और चोट से उबरकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते।
10. पूजा जाखड़ (नौकायन/रोइंग - गांव साल्हावास)
गांव साल्हावास की रहने वाली पूजा जाखड़ एशियाई खेलों की नौकायन (रोइंग) स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूजा ने साल्हावास नौकायन अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उपलब्धियां: जल में बेहतरीन शारीरिक संतुलन और स्टेमिना के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और भारतीय दल में स्थान सुरक्षित किया।
11. अमित गुलिया (वालीबाल- गांव दरियापुर)
गांव दरियापुर के अमित गुलिया (अमित बलवान सिंह) भारतीय पुरुष वालीबाल टीम के मुख्य अटैकर्स में से एक हैं। वे 27 सितंबर को वियतनाम के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेंगे।
उपलब्धियां: कोच अदान सिंह के मार्गदर्शन में सीखे गए कौशल के दम पर राष्ट्रीय व पेशेवर वॉलीबॉल लीग में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय टीम में जगह बनाई।
12. रजत रुहल (कुश्ती- गांव रोहद)
एशियन गेम्स की फ्री स्टाइल कुश्ती के 125 किग्रा भार वर्ग में बहादुरगढ़ के गांव रोहद निवासी पहलवान रजत रुहल भारत की चुनौती पेश करेंगे। मांडौठी स्थित हिंद केसरी सोनू अखाड़े से जुड़े रजत पहली बार एशियाई खेलों में उतरकर मैदान संभालेंगे।
उपलब्धियां: अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप में दो बार पदक और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता। प्रतिद्वंद्वी पर मजबूत अटैक करने और शुरुआत में ही बढ़त बनाने की आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं।
13. सुमित दलाल (कुश्ती - बहादुरगढ़)
बहादुरगढ़ के हिंद केसरी सोनू अखाड़े से निकले पहलवान सुमित दलाल पहली बार एशियाई खेलों में ग्रीको रोमन शैली के 60 किग्रा भार वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। सुमित से इस प्रतियोगिता में भी पोडियम फिनिश की पूरी उम्मीद है।
उपलब्धियां: अंडर-23 चैंपियनशिप और वर्ल्ड मिलिट्री चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता। मैट पर गजब की तकनीकी पकड़, दांव-पेच और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं।
14. दीपक पूनिया (कुश्ती - गांव छारा)
बहादुरगढ़ के गांव छारा निवासी अंतरराष्ट्रीय पहलवान दीपक पूनिया इस बार एशियन गेम्स में फ्री स्टाइल कुश्ती के 97 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक के लिए दांव लगाएंगे। पिछली बार 86 किग्रा में रजत जीतने वाले दीपक इस बार नए वजन वर्ग में देश का मान बढ़ाएंगे।
उपलब्धियां: पिछले एशियन गेम्स में रजत पदक विजेता। असाधारण फुर्ती, कुश्ती की गहरी समझ और विपरीत परिस्थितियों में सटीक रणनीति से मुकाबला पलटने के लिए जाने जाते हैं।
