विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

झज्जर हथियार लाइसेंस फर्जीवाड़ा: फर्जी होमगार्ड प्रमाण पत्र से बनाए जा रहे थे लाइसेंस, 2 ASI समेत 10 पर केस दर्ज

Published: Mon, 03 Aug 2026 10:45 PM (IST)

झज्जर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें 10 आवेदक और ...और पढ़ें

झज्जर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस घोटाला।

झज्जर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस घोटाला।

HighLights

  1. फर्जी दस्तावेजों से शस्त्र लाइसेंस बनवाने का बड़ा फर्जीवाड़ा

  2. 10 आवेदकों और 2 एएसआई के खिलाफ मुकदमा दर्ज

  3. नकली प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों का उपयोग, लाइसेंस रद होंगे

जागरण संवाददाता, झज्जर। जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) बहादुरगढ़ की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना शहर झज्जर में 10 लाइसेंस आवेदकों तथा शस्त्र लाइसेंस शाखा के तत्कालीन दो एएसआई के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इसके साथ ही फर्जी तरीके से जारी कराए गए इन सभी शस्त्र लाइसेंसों को नियमानुसार रद्द करने की सिफारिश की गई है। एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस व प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है तथा संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल शुरू कर दी गई है।

पीटीसी सुनारिया, हिसार और भौंडसी के फर्जी ट्रेनिंग प्रमाण पत्र

जानकारी के अनुसार, पुलिस आयुक्तालय झज्जर की शस्त्र लाइसेंस शाखा में दिए गए आवेदनों में कई लोगों ने स्वयं को पीटीसी सुनारिया, पुलिस लाइन हिसार तथा भौंडसी से शस्त्र प्रशिक्षण प्राप्त दर्शाते हुए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट संलग्न किए थे।

इस धांधली की शिकायत मिलने पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बहादुरगढ़ के एसीपी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान संबंधित ट्रेनिंग सेंटरों से रिकार्ड का भौतिक मिलान कराया गया, तो खुलासा हुआ कि इन आवेदकों को किसी भी सेंटर से कोई ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया गया था।

सभी प्रमाणपत्र पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित (फर्जी तरीके से तैयार) पाए गए। जिसके बाद एसीपी की सिफारिश पर शहर थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

सत्यापन और भूमिका की शुरू हुई गहन जांच

दर्ज एफआईआर में झज्जर शहर थाने में तैनात दो एएसआई और जिले के प्रतिष्ठित परिवारों से जुड़े 10 लोगों को नामजद किया गया है। जिनके नाम पर लाइसेंस बनाए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी प्रमाण पत्र किस स्तर पर और किसके माध्यम से तैयार कराए गए थे।

लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान सत्यापन (वेरिफिकेशन) में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका या लापरवाही रही। क्या पूर्व में जारी हुए अन्य हथियार लाइसेंसों में भी इसी प्रकार के जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है।

हालांकि, मामला दर्ज होने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। एसीपी बहादुरगढ़ की सिफारिश और पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) झज्जर के आदेशों के उपरांत थाना शहर झज्जर में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 337, 339 और 340 के तहत की गई है।

कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच का आश्वासन

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर संदिग्ध दस्तावेजों की विधि-विज्ञान (फारेंसिक) जांच भी कराई जाएगी और आरोपितों को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

पुलिस का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसे भी मामले में सह-आरोपित बनाया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे व किसी भी स्तर पर कोई भी हो।

अभी मामले में जांच चल रही है। जांच के बाद साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -सरिता, शहर थाना प्रभारी, झज्जर