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- समिति ने पांच लंबित मांगों को विस में उठाने की रखी मांग

- समाज की अनदेखी करने वालों को दिखाया सत्ता से बाहर का रास्ता जागरण संवाददाता, झज्जर : अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर रविवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने जिले के चारों कांग्रेस विधायकों को समिति की तरफ से एक ज्ञापन सौंपा। समिति के सदस्यों ने सभी प्रमुख लंबित पांच मांगों को विस सत्र में जोरशोर से उठाने की मांग उठाई है। समिति की तरफ से पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, पूर्व विस अध्यक्ष डा.रघुबीर सिंह कादयान, बादली विधायक डा.कुलदीप वत्स व बहादुरगढ़ विधायक राजेन्द्र जून को उनके निवास स्थान पर जाकर अलग-अलग समय में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व जिलाध्यक्ष जितेन्द्र धनखड़ द्वारा किया गया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति की तरफ से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि हरियाणा में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही भाईचारा बिगाड़ने का काम किया है। समिति 36 बिरादरी को साथ लेकर चलती रही है और प्रयास भी यहीं है कि आपस में भाईचारा खराब न हो। लेकिन, पिछले शासनकाल में सत्ता में बैठे जिन लोगों ने भाईचारे को बिगाड़ने का काम किया व समिति की मांगों की अनदेखी की उन्हें विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कांग्रेस के सभी विधायकों ने समिति को आश्वास्त किया कि उनकी जो भी मांगें है उन्हें कांग्रेस विस सत्र में जोरशोर से उठाने काम करेगी। ज्ञापन में समिति ने जो मांगें विस सत्र में प्रमुखता से उठाने की मांग रखी है उनमें

- आंदोलन के दौरान दर्ज हुए सभी मुकद्दमों को वापस लेने,

- जाट समाज को बीसी (सी) में दिए गए आरक्षण बिल को जोकि सरकार ने वापस ले लिया था और जिसमें जाट समाज के अलावा अन्य पांच जातियां भी शामिल थी, को हरियाणा के बीसी (बी) में शामिल करने का बिल लाने

- आंदोलन से जुड़े मृतकों के आश्रितों को भी सरकार द्वारा दिए गए नौकरी के आश्वासन को जल्द पूरा करने

- हरियाणा में एसबीसी आरक्षण के रहते हुए सभी 6 जातियों के जिन अभ्यार्थियों का सलेक्शन हुआ था, उन्हें तत्काल नौकरी पर ईबीपीजी के तहत लाभ प्रदान करने आदि को प्रमुखता से उठाया गया है।

Posted By: Jagran

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