हरियाणा के किसानों को बड़ी राहत, अक्टूबर में मिलेगी 7.50 लाख एमटी खाद; सरसों-गेहूं की बिजाई में नहीं होगी किल्लत
हरियाणा को अक्टूबर में 7.50 लाख मीट्रिक टन खाद मिलेगी, जिससे रबी सीजन में सरसों और गेहूं की बुवाई के ...और पढ़ें

HighLights
हरियाणा को अक्टूबर में 7.50 लाख मीट्रिक टन खाद मिलेगी
सरसों और गेहूं की बुवाई के लिए खाद की कमी नहीं होगी
झज्जर में 2600 एमटी डीएपी का रैक पहुंचने की उम्मीद
मुकेश शर्मा, झज्जर। हरियाणा में रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों के लिए राहत की खबर है। अक्टूबर माह में प्रदेश को करीब 7.50 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
डिपार्टमेंट आफ फर्टिलाइजर्स, दिल्ली ने हरियाणा की जरूरत को देखते हुए विभिन्न खाद कंपनियों को डिमांड भेज दी है। इससे सरसों की बिजाई और आगामी गेहूं सीजन में किसानों को खाद के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
केंद्र की ओर से तय आपूर्ति के अनुसार आइपीएल की ओर से हरियाणा में 1.50 लाख एमटी डीएपी, 3.50 लाख एमटी यूरिया, 40 हजार एमटी एनपीके व एसएसपी तथा 10,650 एमटी एमओपी उपलब्ध कराया जाएगा।
इनमें बड़ी हिस्सेदारी इंडियन पोटाश लिमिटेड की रहेगी, जबकि शेष खाद इफको, चंबल सहित अन्य कंपनियों के माध्यम से प्रदेश में पहुंचाई जाएगी।
झज्जर में पहुंचा 2600 एमटी डीएपी
खाद आपूर्ति की कड़ी में झज्जर के किसानों के लिए भी बड़ी राहत है। आज झज्जर में आइपीएल का 2600 एमटी डीएपी का रैक पहुंचने की उम्मीद है। रैक पहुंचने के बाद निर्धारित मात्रा के अनुसार आसपास के जिलों में खाद भेजी जाएगी। इससे सरसों की बिजाई के समय डीएपी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।
प्राप्त आवंटन के अनुसार झज्जर को 600 एमटी, रोहतक को 450 एमटी, रेवाड़ी को 400 एमटी, महेंद्रगढ़ को 400 एमटी, गुरुग्राम को 350 एमटी, दिल्ली को 300 एमटी और चरखी दादरी को 200 एमटी डीएपी उपलब्ध कराया जाएगा।
समय पर आपूर्ति पर जोर
दीपक शर्मा, सहायक प्रबंधक, आइपीएल ने बताया कि रबी सीजन में खाद की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र और प्रदेश स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। खासकर सरसों की बिजाई के साथ गेहूं की बुवाई शुरू होने पर डीएपी और यूरिया की मांग तेजी से बढ़ती है।
ऐसे में अक्टूबर की प्रस्तावित बड़ी खेप से किसानों को समय पर खाद मिलने की उम्मीद है। खाद की आपूर्ति मांग के अनुरूप जिलों तक पहुंचाई जाए, ताकि किसानों को बाजार में भटकना न पड़े और रबी फसलों की बिजाई प्रभावित न हो।
