एशियाई खेलों में सोना जीतकर झज्जर लौटे अयान लोहचब, मां की आंखें भीगीं तो दादी हुईं भावुक; ट्रैक्टर पर निकला काफिला
एशियाई खेलों में कबड्डी का स्वर्ण पदक जीतकर गांव बुपनियां लौटे अयान लोहचब का झज्जर में भव्य और भावुक स्वागत हुआ। मां ने चूरमा खिलाया।

अयान लोहचब का स्वागत करते ग्रामीण। फोटो जागरण
HighLights
एशियाई खेलों में अयान लोहचब ने कबड्डी में स्वर्ण पदक जीता।
गांव बुपनियां में अयान का भव्य और भावुक स्वागत हुआ।
मां, बहन और दादी ने भावुक होकर अयान का स्वागत किया।
जागरण संवाददाता, झज्जर। वर्षों की अटूट तपस्या, पसीने की हर एक बूंद और आंखों में पले तिरंगे की शान के सपने जब सीने पर स्वर्ण पदक बनकर चमकते हैं, तो पूरा गांव उत्सव के रंगों में सराबोर हो उठता है।
एशियाई खेल 2026 में भारतीय कबड्डी टीम को अपनी बदौलत स्वर्ण पदक दिलाकर गांव बुपनियां लौटे लाडले अयान लोहचब का जब गृह क्षेत्र में आगमन हुआ, तो हर आंख गर्व के आंसुओं से नम हो गई और हर दिल खुशी से झूम उठा।
डाबोदा से लेकर बुपनियां तक आसमान में उड़ते गुलाल, गूंजते ढोल-नगाड़ों और बरसती फूलों की पंखुड़ियों ने यह अहसास करा दिया कि देश का मान बढ़ाने वाले बेटों का स्वागत कैसे किया जाता है।
मां का ममता भरा आंचल और दादी के आंखों से छलका प्यार
जैसे ही एशियन गेम्स का यह स्वर्णिम नायक अपने घर की चौखट पर पहुंचा, तो माहौल पूरी तरह से भावुक हो उठा। वर्षों के कड़े अभ्यास के बाद लौटे बेटे को देखकर मां सोनिया की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। उन्होंने अपने हाथों से बनाए देशी चूरमे का पहला कोर बेटे के मुंह में डाला, तो मानों अयान की सारी थकान एक पल में मिट गई।

बहन ने दीये की लौ से भाई की आरती उतारकर माथे पर विजय तिलक लगाया और लंबी उम्र की दुआ मांगी। पोते को गले से लगाते ही दादी खजानी की आंखें भी भीग गईं। उन्होंने भावुक होकर कहा, मेरे पोते ने न केवल हमारे परिवार और गांव का, बल्कि पूरी दुनिया में भारत देश का सिर ऊंचा कर दिया है।
सजाए गए ट्रैक्टर पर निकला काफिला
गांव में अयान के स्वागत के लिए अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुलिया खाप के प्रधान सुनील गुलिया के ट्रैक्टर को फूलों से विशेष रूप से सजाया गया था। इसी ट्रैक्टर पर अयान को बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गांव के मुख्य रास्तों से होते हुए समारोह स्थल तक लाया गया।
रास्ते भर ग्रामीणों ने अपने चहेते खिलाड़ी पर नोटों की मालाएं पहनाईं, फूलों की बौछार की और स्मृति स्वरूप गदा भेंट कर सम्मानित किया। अयान के साथ-साथ उनके मार्गदर्शक गुरुओं (कोचों) का भी ढोल की थाप पर भव्य अभिनंदन किया गया।

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए विधायक कुलदीप वत्स, आदित्य धनखड़, सरपंच प्रतिनिधि अनिल, आजाद, कोच नरेंद्र रेढू, रणदीप सिंह, प्रदीप खत्री, पटना के कोच जसवीर सिंह, अर्जुन अवार्डी राकेश उर्फ मुन्ना और राजीव लोहचब सहित खेल जगत से जुड़ी तमाम हस्तियां और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि अयान की यह स्वर्णिम चमक गांव के हजारों युवाओं को खेलों के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देती रहेगी।
खुशी में बंटा भंडारा, मंदिरों में टेकेंगे माथा
बेटे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से प्रसन्न माता सोनिया और पिता संदीप ने पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया, जिसमें हजारों ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण कर अयान को अपना आशीर्वाद दिया। स्वागत समारोह के उपरांत अयान परिजनों के साथ गांव के विभिन्न मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करेंगे और देश की सुख-समृद्धि तथा अपनी आगे की खेल यात्रा के लिए ईश्वर का धन्यवाद करेंगे।

माता-पिता का संबल और गुरुओं का आशीर्वाद ही मेरी असली ताकत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए राष्ट्रगान की धुन पर तिरंगा लहराते देखना एक ऐसा अहसास है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मेरी इस सफलता के पीछे भारतीय टीम के कोच बलवान सिंह और साई के कोच नवीन कुमार का कड़ा मार्गदर्शन है।
साथ ही मेरी मां सोनिया और पिता संदीप के विश्वास ने मुझे हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का हौसला दिया। यह पदक देशवासियों के प्यार का नतीजा है और मेरा लक्ष्य आने वाली हर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत की झोली में सोना डालना है।
- अयान लोहचब, एशियाई खेल स्वर्ण पदक विजेता (कबड्डी)
