जागरण संवाददाता, झज्जर : अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रही आंगनवाड़ी वर्करों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। सैंकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी वर्करों ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतले की शव यात्रा निकाली। लघु सचिवालय में पुलिस के कर्मचारियों ने काफी प्रयास किए कि वे यहां पर पुतला न जलाएं। लेकिन उनकी हर बात का अनसुना कर दिया गया। प्रदर्शन से पूर्व उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांगें पूरी नहीं तक हड़ताल पर रहने का भी आह्वान किया है।

हड़ताल पर बैठी वर्करों को अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी समर्थन किया हुआ है। प्रदर्शन से पूर्व विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

इन वर्करों का कहना था कि नाममात्र का वेतन देते हुए उनसे पूरा दिन कार्य करवाया जा रहा है। सरकार एवं प्रशासन की अह्म कड़ी के रूप में कार्य करने के बावजूद इतना वेतन भी नहीं मिल पा रहा कि बच्चों का गुजारा भी ठीक ढंग से हो सके। इसी के चलते ही उन्हें मजबूरन ऐसा कदम उठाना पड़ा। काफी संख्या में मौजूद रही आंगनवाड़ी वर्करों की नाराजगी को मद्देनजर रखते हुए यहां पर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम देखने को मिले। पुलिस प्रशासन की तरफ से प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इन वर्करों ने कई बार बैरिकेड्स को धकेल कर आगे बढ़ने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।

उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक निर्धारित न्यूनतम वेतन श्रमिक 18 हजार रुपये और 15 हजार रुपये हेल्पर को दिए जाने, भारत सरकार के कर्मचारियों के बराबर सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य सुविधाएं आंगनवाडी वर्करों और हेल्परों को दिए जाने, अतिरिक्त आंगनवाड़ी केन्द्र का चार्ज संभालने वाली वर्कर को पचास फीसद अतिरिक्त कार्य के लिए देने, हेल्पर के छुट्टी पर जाने या रिक्त स्थान होने पर अतिरिक्त हेल्पर का प्रावधान करने, आंगनवाड़ी लाभार्थी को दिए जाने वाले आहार पोषाहार की मात्रा तथा गुणवत्ता बढ़ाने, खाना बनाने के लिए सरकार द्वारा ही गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने, सरकारी स्कूलों की तरह गर्मी एवं सर्दी की छुट्टियां घोषित करने सहित अन्य मांगों को पूरा किए जाने की बात दोहराई है।

By Jagran