पेरिस में कांस्य के 26 महीने बाद नागोया में गूंजा झज्जर के अमन का डंका, एशियाई खेल 2026 में जीता गोल्ड मेडल
झज्जर के पहलवान अमन सहरावत ने जापान में आयोजित 2026 एशियाई खेलों में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक जीता।

झज्जर के अमन का डंका (फाइल फोटो)
HighLights
अमन सहरावत ने 2026 एशियाई खेलों में कुश्ती का स्वर्ण पदक जीता।
फाइनल में विश्व चैंपियन हान चोंग सांग को एकतरफा अंदाज में मात दी।
पेरिस ओलंपिक कांस्य के बाद यह उनकी एक और बड़ी उपलब्धि है।
जागरण संवाददाता, झज्जर। पेरिस ओलिंपिक 2024 में देश के सबसे युवा पदक विजेता बनकर इतिहास रचने के ठीक 26 महीने बाद, झज्जर जिले के गांव बिरोहड़ के लाडले पहलवान अमन सहरावत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मंच पर भारत का तिरंगा सबसे ऊपर फहराया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई खेलों की पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा में अमन ने अपनी अद्भुत फुर्ती और दांव-पेच के दम पर देश के लिए स्वर्णिम पदक जीत लिया है।
माटी से जुड़े इस पहलवान ने खिताबी मुकाबले में उत्तर कोरिया के मौजूदा विश्व चैंपियन हान चोंग सांग को एकतरफा अंदाज में शिकस्त देकर साबित कर दिया कि उनका मुकाबला पूरी दुनिया में किसी से नहीं है।
फाइनल में विश्व चैंपियन को चटाई धूल, सेमीफाइनल में किया था करिश्माई कमबैक
नागोया के मैट पर हुए इस खिताबी मुकाबले में अमन सहरावत ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन पहलवान हान चोंग सांग के हर हमले को नाकाम करते हुए अमन ने शानदार लेग-अटैक (टांग पकड़कर पटकने का दांव) का प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इससे पूर्व, सेमीफाइनल मुकाबले में अमन ने अपनी अदम्य जिजीविषा का परिचय दिया था। ताजिकिस्तान के ऐयाल बेलोल्यूब्स्की के खिलाफ एक समय अमन अंक तालिका में पिछड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने जबरदस्त वापसी करते हुए मुकाबले को 14-8 से अपने पक्ष में मोड़ लिया और फाइनल का टिकट पक्का किया।
गम को बनाया अपनी ढाल: 11 वर्ष की उम्र में सिर से उठा था मां-बाप का साया
16 जुलाई 2003 को झज्जर के बिरोहड़ गांव में जन्मे अमन सहरावत का बचपन अभावों और दुखों के भारी बोझ तले बीता। जब वे महज 10-11 साल के थे, तभी उनकी माता और पिता का साया उनके सिर से उठ गया। अनाथ होने के इस गहरे सदमे से उबारने के लिए उनके चाचा सुधीर और परिवार ने उन्हें कुश्ती की राह दिखाई।
उन्हें दिल्ली के प्रसिद्ध छत्रसाल अखाड़े में दाखिल कराया गया। छत्रसाल अखाड़े को ही अपना घर और पहलवानों को अपना परिवार मानने वाले अमन ने कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में दिन-रात एक कर दिया। जब बाकी बच्चे त्यौहारों पर घर जाते थे, तब अमन अखाड़े की मिट्टी पर पसीना बहाकर अपने माता-पिता के सपनों को साकार करने में जुटे रहते थे।
ओलंपिक कांस्य से एशियाई स्वर्ण तक: अमन की प्रमुख उपलब्धियों की सूची
- एशियाई खेल 2026 (नागोया): पुरुषों के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
- पेरिस ओलिंपिक 2024: अगस्त 2024 में महज 21 वर्ष की आयु में पुरुषों की 57 किग्रा स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के सबसे युवा व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता बने।
- अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2022: इस वैश्विक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले देश के पहले भारतीय पहलवान बने।
- एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2023: 57 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
- ज़ाग्रेब ओपन 2024: क्रोएशिया में आयोजित रैंकिंग सीरीज में स्वर्ण पदक जीता।
बिरोहड़ गांव में जश्न का माहौल
जापान में जैसे ही अमन सहरावत के स्वर्ण पदक जीतने की सूचना मिली, उनके पैतृक गांव बिरोहड़ सहित पूरे झज्जर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचकर खुशी मनाई।
ग्रामीणों और उनके परिजनों का कहना है कि अमन की यह सफलता केवल बिरोहड़ या झज्जर की नहीं, बल्कि पूरे देश की जीत है। जिस तरह से अमन ने दुखों के बादलों को चीरकर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है, वह देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
