वैभव शर्मा, हिसार: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में हर हाथ को काम देने का दावा सरकारें करती हैं। मगर हर साल ऐसी पंचायतें छूट ही जाती हैं, जहां मनरेगा के तहत कार्य नहीं होता। इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा स्कीम में प्रदेश में 1549 पंचायतें ऐसी मिली हैं, जो मनरेगा की धनराशि अपने यहां खर्च नहीं कर सकीं। काम नहीं हुआ तो मजदूरों को रोजगार भी नहीं मिला। वार्षिक रिपोर्ट पर गौर करें तो प्रदेश के 22 जिलों में सबसे खराब स्थिति रेवाड़ी जिले की है, यहां 369 ग्राम पंचायतें मौजूद हैं, जिसमें से 304 पंचायतों में मनरेगा से कोई खर्चा हुआ ही नहीं।

मनरेगा अधिनियम में यह है नियम

मनरेगा स्कीम के तहत प्रत्येक पंचायत में स्कीम का प्रयोग करते हुए लोगों को रोजगार मुहैया कराना होता है। पंचायतें अपने यहां विकास कार्य कराने के लिए मनरेगा से वित्तीय सहायता भी लेती हैं। 

प्रदेश में मनरेगा स्कीम में खर्चा न करने वाली पंचायतों का आंकड़ा

जिला- कुल ग्राम पंचायत- खर्चा न करने वाली पंचायत- कम खर्च का फीसद

चरखी दादरी- 166- 57- 34.33

फरीदाबाद- 116- 51- 43.96

फतेहाबाद- 258- 2- 0.77

हिसार- 309- 18- 5.82

झज्जर- 248- 97- 39.11

जींद- 297- 40- 13.46

कैथल- 278- 25- 8.99

करनाल- 383- 59- 15.40

कुरुक्षेत्र- 393- 16- 4.07

मेवात- 324- 64- 19.75

पंचकूला- 129- 29- 22.48

पानीपत- 175- 0- 0

रोहतक- 138- 0- 0

सिरसा- 339- 27- 7.96

यमुनानगर- 473- 1- 0.2

आंकड़ा

सबसे अधिक - रेवाड़ी में 369 में से 304 पंचायतों में नहीं हुआ खर्च,  यानि 82.38 फीसद नहीं हुआ काम

सबसे बेहतर- रोहतक और पानीपत में सभी पंचायतों में मनरेगा से हुआ काम 

- रेवाड़ी के बाद गुरुग्राम 154 पंचायतों में नहीं हुआ काम

- गुरुग्राम में 75.86 फीसद नहीं हुआ काम

- फतेहाबाद में 0.77 फीसद ही पंचायतें बचीं

- प्रदेश के 22 जिलों में हैं 6,234 ग्राम पंचायतें

- प्रदेश की 1549 पंचायतों में मनरेगा से नहीं हुआ काम 

वह जिले जहां खर्चा न करने वाली सबसे अधिक पंचायतें

जिला- कुल ग्राम पंचायत- खर्चा न करने वाली पंचायत

सोनीपत- 301- 132

पलवल- 268- 107

महेंद्रगढ़- 346- 125

अंबाला- 417- 126

भिवानी- 304- 115

नए वित्तीय वर्ष में काम करने के लिए यह तैयार की रणनीति

हिसार में परियोजना निदेशक डा. राजकुमार नरवाल बताते हैं कि हिसार में 18 पंचायतों को काम नहीं मिला। हम अगले वित्तीय वर्ष में नई योजना पर काम कर रहे हैं। इसमें मनरेगा मेट की बैठक लेकर उन्हें प्रेरित किया जाएगा। फिर हर ब्लॉक की दो-दो पंचायतों में अधिकारी खुद जाएंगे। जिसमें बताया जाएगा कि मनरेगा के तहत पंचायत कितने भी विकास कार्य करा सकती है। बजट की कमी नहीं है। ऐसे में एक अप्रैल से हर पंचायत में काम अलॉट कर मजदूरों को लगा दिया जाएगा।

Posted By: Manoj Kumar

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस