जेएनएन, हिसार। जिले के बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल पर चार साल बाद हत्या के केस में हिसार की विशेष अदालत में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने हत्‍या के दो मामले में रामपाल को दोषी क़रार दिया। उसके बेटे बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र व भानजे जोगेंद्र उर्फ बिल्लू समेत कोर कमेटी के 22 सदस्यों को भी दोषी करार दिया गया है। इनमें महिला विंग की प्रमुख रही बबीता, उसकी बहन पूनम, मौसी सावित्री भी शामिल है। अदालत ने एक मामले में 15 आराेपितों और दूसरे मामले में 14 लाेगों को दोषी करार दिया। छह आरोपित ऐेसे हैं जिनको दोनों मामलों में दोषी ठहराया गया है। अदालत सजा का एेलान 16 या 17 अक्‍टूबर को करेगी।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया की अदालत एफआइआर नंबर 429 में 16 अक्‍टऔर एफआइआर नंबर 430 में 17 अक्टूबर को सजा सुनाएगी। एफआइआर नंबर 429 और 430 में तीन आरोपितों को अभी पकड़ा नहीं जा सका है। इनमें रामपाल की बेटी नीलम, रिश्तेदार राजबाला और संजय फौजी शामिल हैं। सेंट्रल जेल एक में बनाई गई विशेष अदालत में जज डीआर चालिया ने मामले पर फैसला सुनाया। इससे पहले रामपाल को छोड़कर बाकी सभी आरोपित कोर्ट पेश किया गया। इसके बाद रामपाल को अदालत में पेश किया गया। जेल परिसर के बाहर नाका लगाकर भारी पुलिस बल और आरएएफ के जवानों को तैनात किया है।

अदालत ने रामपाल सहित 29 आरोपितों को दोषी करार दिया, दोषी करार लोगों में तीन महिलाएं

अदालत ने रामपाल व अन्‍य आरोपिताें को भादसं की धाराओं 302, 343 अौर 120बी के तहत दोषी ठहराया। अदालत में एफआइआर नंबर 429 के मामले में रामपाल सहित 15 आरोपितों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने एफआइआर नंबर 430 में 14 आरोपितों को दोषी करार दिया। सात लाेगों को दोनों मामलों में दोषी करार दिया  गया है। इसके साथ ही अदालत एफआरआइ 429 के मामले में सजा का ऐलान 16 अक्‍टूबर को किया जाएगा। एफअाइअार 430 मामले में 17 अक्‍टूबर को सजा सुनाई जाएगी।

हिसार की विशेष अदालत सजा का ऐलान 16 या 17 अक्‍टूबर को करेगी

ज्ञात रहे कि 18 नवंबर 2014 को बरवाला के सतलोक आश्रम के आगे रामपाल समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो गया था। रामपाल ने महिला अनुयायियों और बच्चों को ढाल बनाकर गेट के आगे बैठा दिया था, ताकि पुलिस कार्रवाई न कर सके। आश्रम खाली कराने के दौरान पुलिस को पांच महिलाओं और एक बच्चे का शव मिला था। इस पर बरवाला थाना पुलिस ने 19 नवंबर 2014 को हत्या के दो मुकदमे दर्ज किए थे। अदालत में शिकायतकर्ता गाजियाबाद निवासी सुरेश और दिल्ली के बदरपुर निवासी शिवपाल अपने बयान से मुकर गए थे। उनका कहना था कि छह मौत रामपाल की वजह से नहीं, बल्कि पुलिस के बल प्रयोग के कारण हुई हैं।

हिसार शहर में तैनात अर्द्ध सैनिक बलों के जवान।


किस मुकदमे में कौन दोषी

एफआइआर नंबर 429

सोनीपत के धनाना निवासी रामपाल, रोहतक के शास्त्री नगर निवासी बेटा बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र, हिसार के उगालन निवासी भानजा जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, हिसार की लक्ष्मी विहार कालोनी निवासी बबीता, भिवानी के नाथूवास निवासी बहन पूनम, जींद की इंपलाय कालोनी निवासी मौसी सावित्री, गुरुग्राम के सिकंदरपुर निवासी देवेंद्र, सूरत नगर निवासी अनिल,सिरसा के धिगतानिया निवासी जगदीश, पानीपत के मच्छरौली निवासी कुशल सिंह, भिवानी के इमलौटा निवासी प्रीतम उर्फ राज कपूर, सोनीपत के भड़गांव निवासी राजेंद्र, जींद के कंडेला निवासी सतबीर, अमरहेड़ी निवासी सोनू दास और सिरसा के भेरवाल निवासी सुखबीर।

एफआइआर नंबर 430

इस मामले में रामपाल, उसके बेटे व भानजे के अलावा हिसार की लक्ष्मी विहार कालोनी निवासी बबीता, भिवानी के इमलौटा निवासी प्रीतम उर्फ राज कपूर, सोनीपत के भड़गांव निवासी राजेंद्र, झज्जर के बिरहाना निवासी कृष्ण कुमार, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के रिब्बा निवासी बलवान, तकसाल निवासी पवन, सोलन के डिरग गांव निवासी राजीव शर्मा, राजस्थान के सुमेरपुर उपमंडल के गांव पूमावास निवासी राजेश उर्फ रमेश, ओगना के नरसिंहपुरा निवासी नटवरलाल उर्फ लक्ष्मण, सवाई माधोपुर के सूर्य नगर कालोनी निवासी राजेश और कुरुक्षेत्र के बोराना निवासी रामचंद्र को दोषी करार दिया गया है।

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देशद्रोह का मुकदमा बाकी

सतलोक आश्रम संचालक रामपाल पर सबसे बड़ा मुकदमा एफआइआर नंबर 428 में देशद्रोह का है। इसमें रामपाल सहित 930 से ज्यादा आरोपित हैं। इसकी सुनवाई भी सेंट्रल जेल एक में चल रही है। एफआइआर नंबर 443 में भी अभी सुनवाई चल रही है।

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अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने से पहले रामपाल के वकील एडवोकेट एपी सिंह ने पुलिस पर खुद को सेंट्रल जेल के अंदर बने विशेष अदालत में जाने से राेकने का आराेप लगाया। एडवोकेट एपी सिंह ने कहा कि उन्‍हे पुलिस ने जानबूझ कर धरना दिया। इस दौरान उन्‍होंने जेल अधिकारियों को बुलाने की मांग की। उन्‍होंने धमकी दी कि यदि जेल के अंदर नहीं जाने दिया गया तो धरना देंगे।

सेंट्रल जेल-1 में बनी विशेष अदालत में एडीजे डीआर चालिया इस मामले में सुनवाई की। कोर्ट के फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर हिसार और आसपास के क्षेत्र हाई अलर्ट रही और सुरक्षा के बेहद कड़े प्रबंध किए गए। पूरा हिसार शहर पुलिस छावनी में तब्‍दील हो गया। यह सुरक्षा व्‍यवस्‍था 17 अक्‍टूबर तक जारी रहेगी। अशांति की आशंका में हिसार में रेल सेवा बंद करने की सिफारिश की गई। बताया जाता है कि हरियाणा पुलिस ने रेल अधिकारियों को इस बारे में लिखा था।

कोर्ट, सेंट्रल जेल, लघु सचिवालय सहित शहर में अब भी भारी पुलिस बल तैनात है। सुरक्षा व्‍यवस्‍था में  डीआइजी सहित कई जिलों के एसपी, डीएसपी भी लगाए गए। शहर में संवेदनशील जगहों पर अर्द्ध सैनिक बलों के जवान भी तैनात हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस से पूरी जानकारी ली। शहर में पुलिस ने फ्लैग मार्च भी निकाला। पंचकूला मेें डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फैसला सुनाए जाने के समय हुई चूक से सबक लेकर सरकार और पुलिस सुरक्षा में आगे भी कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है।

सेंट्रल जेल के बाहर तैनात अर्द्ध सैनिक बलों के जवान।

रामपाल पर हुए सात केस दर्ज

रामपाल पर पुलिस ने नवंबर 2014 में सात केस दर्ज किए थे। इसमें देशद्रोह, हत्या, अवैध रूप से सिलेंडर रखने आदि काफी मामले हैं। रामपाल इनमें से दो केसों में बरी हो चुका है। इन दोनों केसों में पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी थी, जिस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी। एक मुकदमे से अदालत ने रामपाल का नाम हटा दिया था।

हिसार में चेकिंग अभियान में जुटी पुलिस।

रामपाल प्रकरण में न्यायिक फैसले के मद्देनजर किसी को भी कानून व्यवस्था भंग करने की इजाजत नहीं होगी। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कारर्वाई की जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करने के साथ-साथ डयूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं जो पूरे जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ हर प्रकार की स्थिति से निपटने को तैयार रहेंगे।

                                                                                              - अशोक कुमार मीणा, उपायुक्त, हिसार।

चार साल पहले रामपाल समर्थकों व पुलिस में हुआ था टकराव 

मुकदमा नंबर 429

बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण को लेकर 18 नवंबर 2014 को आश्रम संचालक रामपाल के समर्थकों और पुलिस के बीच टकराव हो गया था। पुलिस और आश्रम के लोगों के बीच चार दिन से गतिरोध बना हुआ था। उस दौरान दिल्ली के बदरपुर की सरिता और पंजाब के संगरूर की मलकीत कौर, राजबाला, संतोष और डेढ साल के आदर्श की मौत हो गई थी। बरवाला थाना पुलिस ने इस संबंध में हत्या का केस दर्ज कर आश्रम प्रमुख रामपाल समेत 15 लोगों को गिरफ्तार किया था।

हिसार रेलवे स्‍टेशन पर तैनात पुलिसकर्मी।

पुलिस ने रामपाल के अलावा उसके बेटे बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र तथा उगालन के जोगेंद्र, सोनीपत के भटगांव के राजेंद्र, दादरी के गांव इमलोटा के राजकपूर उर्फ प्रीतम, बरवाला की बबीता व पूनम, हिमाचल के सोलन के पवन व राजीव शर्मा, राजस्थान के पाली के राजेश उर्फ रमेश व नटवर उर्फ लक्ष्मण, किन्नौर के बलवान, राजस्थान के सवाई माधोपुर के राजेश, कुरुक्षेत्र के रामचंद्र और जींद की सावित्री को गिरफ्तार किया था। इस केस का ट्रायल 18 मई 2015 को शुरू हुआ था। यह केस धारा 302, 343 व 120 बी के तहत चला।


मुकदमा नंबर 430

सतलोक आश्रम विवाद में यूपी के ललितपुर की रजनी नामक महिला की भी मौत हुई। बरवाला थाना पुलिस ने आश्रम प्रमुख रामपाल समेत 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनमें रामपाल के अलावा सोनीपत के गांव धनाना के बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र, उगालन के जोगेंद्र, भटगांव के राजेंद्र, इमलोटा के राजकपूर उर्फ प्रीतम, बरवाला की बबीता, हिमाचल के बलवान, पवन व राजीव शर्मा, राजस्थान के पाली के नटवर व रमेश, राजस्थान के सवाई माधोपुर के राजेश, कुरुक्षेत्र के रामचंद्र और झज्जर के कृष्ण को गिरफ्तार किया था। इस केस का ट्रायल 4 जून 2015 को शुरू हुआ था। यह केस धारा 302, 343 व 120 बी के तहत चला।

एक मुकदमे में एक और दूसरे मुकदमे में दो दिन चली बहस

जानकारी के अनुसार अदालत में मुकदमा नंबर 429 में 5 और 6 अक्टूबर को बहस हुई थी। इसके अलावा मुकदमा नंबर 430 में 6 अक्टूबर को बहस हुई थी। इन मुकदमों का ट्रायल सेंट्रल जेल वन में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पराशर की अदालत में हुआ, लेकिन मुकदमों का फैसला सुनाने से पहले उनका ट्रांसफर हो गया।

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मुकदमा नंबर 429 में हुई 43 की गवाही

एडीजे अजय पराशर के ट्रांसफर के बाद एडीजे डीआर चालिया मुकदमे की सुनवाई कर रहे हैं। अदालत में मुकदमा नंबर 429 में 43 गवाहों ने गवाही दी। इसके अलावा सफाई के 13 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई। इसके अलावा मुकदमा नंबर 430 में 23 गवाहों की गवाही दर्ज हुई। सफाई के 19 गवाहों ने भी अपनी गवाही दर्ज कराई। दोनों मुकदमों का फैसला 11 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha