जेएनएन, हिसार। हिसार छावनी में सेना की जांच एजेंसियों ने तीन संदिग्ध लोगों को पकड़ा है। इनके मोबाइल फोन से छावनी के अंदर की वीडियो मिली है। तीनों से पूछताछ की जा रही है। आरोपितों की पहचान उत्तर प्रदेश के शामली के मसाबी निवासी 22 वर्षीय खालिद, मुजफ्फरनगर के शेरपुर गांव निवासी 28 वर्षीय महताब और 34 वर्षीय रागिब के रूप में हुई है।

छावनी में इन दिनों निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके लिए ठेकेदार की तरफ से बाहर से मजदूर भेजे जा रहे हैं। पकड़े गए तीनों संदिग्ध भी ठेकेदार के जरिए मजदूरी करने छावनी में घुसे थे। शक होने पर करीब एक सप्ताह से जांच एजेंसियां इन पर बारीकी से नजर रख रही थीं। शक के आधार पर 1 अगस्त को तीनों को पकड़ लिया। इनके मोबाइल फोन में कैंट की वीडियो क्लिप बनाई गई है। वाट्सएप से जुलाई के शुरुआत में पाकिस्तान भी फोन किया गया था।

उधर, मुजफ्फरनगर संवाददाता के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव शेरपुर निवासी रागिब व मेहताब कुछ दिन पूर्व हिसार में मिलिट्री इंजीनियर सर्विस द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य में ठेकेदारी के लिए रवाना हुए थे। परिजनों के मुताबिक मेहताब प्लांट का ठेकेदार है जबकि रागिब खैराद के काम में दक्ष है। गांव शेरपुर की प्रधान के पति हाशिम ने बताया कि गांव में दोनों युवकों का चाल-चलन बहुत अच्छा रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों के परिजनों ने अपने रिश्तेदारों में संपर्क कर दोनों को कानूनी सहायता दिलाने का निर्णय लिया है।

शामली संवाददाता के मुताबिक खालिद पुत्र निसार एक सप्ताह पहले घर से मजदूरी करने के लिए गया था। वह मुस्लिम राजपूत है और गरीब परिवार से है। ग्राम प्रधान रहीम ने बताया कि उसके पिता मोहम्मद निसार मजदूरी करते हैं। खालिद के पकड़े जाने से पूरा गांव सन्न है। प्रधान ने दावा किया कि अभी तक इस परिवार के खिलाफ यहां के थाने में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है।

हिसार में पहले भी पकड़े जा चुके हैं जासूस

हिसार राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से काफी संवेदनशील शहर है। यहां सेना की छावनी के अलावा बीएसएफ कैंप भी है। यहां से 100 किमी दूर स्थित सिरसा में एयरफोर्स का का एयरबेस स्टेशन बना है। पाकिस्तान की तरफ से यहां पहले भी जासूस भेजे जाते रहे हैं। इसके चलते यहां स्थानीय पुलिस के अलावा सीआइडी, आइबी और सेना की इंटेलिजेंस भी हमेशा सतर्क रहती है।

पाकिस्तानी सेना के शख्स से फोन पर संपर्क में था महताब

हिसार कैंट छावनी की इंटेलिजेंस टीम और सेना पुलिस ने मेहताब, खालिद और रागिब को जासूसी के शक में पकड़ा है। पकड़े गए तीनों आरोपितों में से महताब ज्यादा शक के दायरे में हैं। महताब ने एक भारतीय फोन नंबर पर कैंट क्षेत्र की वीडियो और फोटो बनाकर भेजी थी। वहीं पकड़ा गया खालिद जांच एजेंसियों को बरगलाने का प्रयास कर रहा है। उसकी तरफ से जुलाई के प्रथम सप्ताह में जिस नंबर पर वाट्सअप कॉल की गई वह पाकिस्तानी फोर्स से जुड़े किसी शख्स का है। साथ ही वह जांच एजेंसी को पाकिस्तान में रिश्तेदार होने की बात कहते हुए सही तरह से रिश्ता भी नहीं बता पा रहा। जांच एजेंसियों की तरफ से नंबर के अलावा उसकी तरफ से बताए जा रहे रिश्तेदारों की भी जांच शुरू कर दी है।

हिसार छावनी में मिल्ट्री इंजीनियर सर्विस की बिल्डिंग का निर्माण चल रहा है। उसके लिए मजदूरों को भेजा गया था। तीनों आरोपितों के वहां तक पहुंचने के बाद जांच एजेंसियों ने जासूसी के शक में उनको पकड़ा था। पकड़े गए खालिद के फोन नंबर की जांच हुई तो उसने पाकिस्तान के नंबर पर बातचीत सामने आई। खालिद ने बताया कि पाकिस्तान में उसका रिश्तेदार रहता है।

एजेंसियों ने रिश्ता पूछा तो वह कभी बुआ तो कभी मामा का रिश्ता बताने लगा। जिससे उस पर शक बढ़ गया। नंबर की जांच की गई तो पता चला कि वह पाकिस्तान में किसी शख्स का नंबर है। मिल्ट्री इंटेलिजेंस की तरफ से जांच करने के साथ अब उस नंबर की जांच शुरू की गई जिस पर छावनी की वीडियो और फोटो भेजी गई है। भारतीय नंबर होने के कारण डाटा निकालने के साथ उस व्यक्ति से भी पूछताछ हो सकती है। सेना की तरफ से अब सभी को पुलिस को सौंपा जा रहा है। उनकी तरफ से अब आगे की जांच शुरू होगी।

18 साल पहले पकड़ा गया था हिसार से जुड़ा पहला पाक जासूस असगर

पाकिस्तान के जासूस का हिसार की धरती से पुराना नाता है। 18 साल पहले हिसार से छावनी की सूचनाओं का लीक करते हुए पाकिस्तान का पहला जासूस असगर अली पकड़ा गया था। उसके बाद लगातार कई जासूस पकड़े गए जिनके पास से हिसार के दस्तावेज मिले। वह लगातार हिसार में रहे और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए पाकिस्तान सूचनाएं भेजते थे।

हिसार शहर में सेना की छावनी के अलावा सिरसा रोड पर बीएसएफ कैंप मौजूद है। यहां से सिरसा के नजदीक होने पर एयरबेस और दिल्ली भी 170 किलोमीटर दूर है। संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण यहां पर जांच एजेंसियां काफी सतर्क रहती है। इसी के चलते एजेंसियों की तरफ से काफी जासूस पकड़े गए जिनके संबंध सीधे हिसार से थे। जासूस यहां पर किराये पर रहे और कागजात तक बनवाए। पाक जासूस को देखे तो 2001 में जासूस असगर अली को पकड़ा जा चुका है। पकड़े जाने से पहले वह शक होने पर पाकिस्तान भागने की कोशिश कर रहा था। राजस्थान के बीकानेर में उसे सेना ने पकड़ लिया था।

बस स्टैंड के नजदीक ऋषि नगर में रह कर उसने अपना नेटवर्क खड़ा किया था। असगर ने अपना इतना नेटवर्क फैलाया था उसकी हिसार छावनी के अंदर तक घुसपैठ की थी। असगर ने हिसार से राशन कार्ड बनाने के साथ ड्राइ¨वग लाइसेंस भी बनवाया था। जांच एजेंसियों ने जब उसे पकड़ा तो उसके पास छावनी का नक्शे, अंदर के जरूरी दस्तावेज सहित अनेक संदिग्ध कागजात मिले थे। उस पर सिटी थाना पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया था।

इसी प्रकार साल 2003 में पाक जासूस मोहम्मद हैदर को जांच एजेंसियों ने अंबाला से पकड़ा था। हिसार के महावीर कालोनी के समीप वाल्मीकि बस्ती में उसने ठिकाना बनाया था। छावनी से संबंधित सूचनाएं वह पाकिस्तान को भेजता था। पुलिस ने उसके पास से भी छावनी का नक्शा बरामद किया था।

वर्ष 2005-06 में अख्तर उल्लाह मुनीर उर्फ समीर ने कृष्णा नगर में करीब 13 माह रहा और पंजाब और हरियाणा की सैनिक छावनियों की रिपोर्ट पाक को भेजी थी। वहीं 7 अप्रैल 2006 को जालंधर में दो अन्य जासूसों ज्योतिप्रसाद और बाबूलाल पकड़ा गया था। जिनके हिसार से तार जुड़े होने के पुख्ता सुबूत मिले थे। पुलिस ने अप्रैल 2006 में ही लुधियाना पुलिस ने जासूस विजय को एक थाने में पुताई करते हुए पकड़ा था। वह करीब एक माह हिसार की सब्जी मंडी के इलाके में रहा था। पुलिस से बचने के लिए वह यहां भी पुताई का कार्य करता था। पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया था।

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