जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़: तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा आंदोलन लंबा खींचता जा रहा है। ऐसे में हजारों लोग इस आंदोलन को कोस रहे हैं, क्याेंकि आंदोलन की वजह से जो उद्योग और व्यापार प्रभावित है उनमें काम करने वाले हजारों लोगों के रोजगार छूट चुके हैं। दिल्ली जाने-आने समेत और कई मामलों में बहुत से लोग इसी आंदोलन की वजह से नुकसान भी उठा रहे हैं, मगर अपने मसले तक सीमित आंदोलनकारियों को दूसरे वर्गों और लोगों की इस पीड़ा व परेशानी से कोई मतलब नहीं है। इसी वजह से टीकरी बार्डर पर एक तरफ का रास्ता नहीं खुल पा रहा है।

यहां से एक तरफ का रास्ता खुलवाने को लेकर काफी दिनों से मांग उठ रही है। इसके लिए उद्यमी राज्य और केंद्र सरकार से भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी मसला हल नहीं हो रहा है। माना जा रहा है कि बार्डर पर एक तरफ रास्ता सरकार या कोर्ट के आदेश पर ही खुल सकता है, लेकिन ऐसा भी तभी हो सकेगा जब आंदोलनकारी शांत रहेंगे। फिलहाल तो आंदोलनकारी यह तर्क दे रहे हैं कि यहां से रास्ता हमने नहीं बंद कर रखा, पुलिस ने बंद कर रखा है मगर लोगों का मानना है कि ऐसा कहकर आंदोलनकारी सियासत खेल रहे हैं। यह तो साफ है कि आंदोलनकारी यहां सड़क पर डेरा न डाले तो बार्डर को बंद करने की जरूरत क्या पड़ी।

वैसे भी जब आंदोलनकारियों के खुद के स्तर पर किसी तरह के सहयोग की जरूरत थी तो उससे भी उन्होंने मुंह मोड़ लिया था। जब उद्यमियों ने कुछ माह पहले टीकरी बार्डर के पास से आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र के एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए दिल्ली-रोहतक रोड पर बीच में डिवाइडर से रास्ता मांगा था तो वह भी आंदोलनकारियों ने नहीं दिया था। इस डिवाइडर पर आंदोलनकारियों ने अपने ट्रैक्टर ट्राली अड़ा रखे थे।

यह रास्ता तो आंदोलनकारियों ने ही बंद कर रखा था और उद्यमियों की सिर्फ इतनी सी मांग थी कि उन्हें कम से कम एक तरफ से दूसरी तरफ जाने का रास्ता मिल जाए तो कुछ काम चल जाए, लेकिन आंदोलनकारियों ने इस मांग को अनसुना कर दिया था। ऐसे में टीकरी बार्डर से एक तरफ रास्ता खोलने पर वे सहमत होंगे, इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है।

 

Edited By: Manoj Kumar