हिसार, जेएनएन। इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी असितत्व में आई थी। दो साल तक चौधरी देवीलाल सीएम रहे उसके बाद भजनलाल ने कमान संभाली। 1980 में राजनीति में उल्टफेर करते हुए भजनलाल ने सभी विधायक व मंत्रियों को अपनी तरफ मिला लिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। मगर उस समय पिता बलदेव तायल मंत्री थी। उनके अलावा विधायक सुषमा स्वराज, कामरेड शंकर लाल और स्वामी अग्निवेश कांग्रेस में शामिल नहीं हुए। भजनलाल ने उनको बुलाया मगर वह नहीं गए। उसका कारण था देवीलाल और तायल परिवार से उनकी घनिष्ठता। कांग्रेस नेता राहुल तायल ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत करते हुए बताया कि

विधायक रहते हुए सुषमा जब भी चंडीगढ़ से बस में हिसार आती तो उनके घर ही फोन करती थी। वह या उनके बड़े भाई अभीराम तायल ही उनको लेने बस अड्डे जाते थे। 1977 में जब बड़ी बहन की शादी हुई तो सुषमा तीन दिन पहले ही घर पहुंच गई थीं। उनके साथ भैरव सिंह शेखावत भी पहुंचे थे। पिता स्व. बलदेव तायल को भाई कहकर बुलाती थी। घर आने के बाद स्व. बलदेव तायल से वह राजनीति पर चर्चा करती थी। मां शांति तायल से पारिवारिक बातचीत करती।

राजनीति में सुषमा अलग ही नेचर की थी। वह देवीलाल को काफी मानती थी। वह कहती थी कि उनको राजनीति में ऊपर पहुंचने और राज्यसभा में भेजने वाले देवीलाल हैं। सभी उनसे प्रभावित रहते थे। सुषमा ने कम उम्र में ही हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी और कानून की जानकारी हासिल कर ली थी। वह जिस राज्य में जाती उसकी भाषा सीखती और उनसे बात करती। सुषमा स्‍वराज जब सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लडीं तो उन्‍होंने एक महीने में तेलगू भाषा सीख ली, वो वहां के लोगों के जेहन में बस गईं थी, वाे जीत नहीं पाई मगर लोगों का भरपूर प्‍यार मिला था।

मुंबई से लौटने के बाद जब मैंने राजनीति में प्रवेश करने के बारे में पिता स्व. बलदेव तायल को बताया तो उन्होंने टोका। वह बोले राजनीति का मकसद होना चाहिए। तो मैंने उनसे पूछा तो वह बोले जाकर सुषमा स्वराज से पूछो। वह बेहतर तरीके से इस बारे में बता सकती हैं। उसके बाद वह सुषमा स्वराज से मिले और घंटों उनके साथ बैठकर बातचीत करते। समझते। आज वह हमें छोड़ कर चली गई तो एक बड़ी क्षति है।

 

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Posted By: manoj kumar

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