किसी ने दौड़कर पकड़ी चलती बस, तो कोई दरवाजे पर लटका... हरियाणा में परिवहन व्यवस्था पर उठे सवाल
हांसी में स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं बसों में भीड़ और अपर्याप्त परिवहन सुविधा के कारण जान जोखिम में डालकर यात्रा ...और पढ़ें
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बस के दरवाजे पर लटककर तय हो रहा भविष्य का सफर।
HighLights
हांसी में छात्र जान जोखिम में डालकर बसों में सफर कर रहे
भीड़ और अपर्याप्त बसों के कारण दरवाजों पर लटकना मजबूरी
सुरक्षित परिवहन सुविधा न मिलने से अभिभावक भी चिंतित हैं
जागरण संवाददाता, हांसी। कंधे पर किताबों से भरा बैग और मन में बेहतर भविष्य बनाने का सपना, लेकिन स्कूल-कॉलेज तक पहुंचने का सफर ही जान जोखिम में डालकर पूरा करना पड़े तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। हांसी में ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन पढ़ने आने वाले कई विद्यार्थियों के लिए बस का सफर कुछ ऐसा ही बन गया है।
बसों में भीड़ और पर्याप्त परिवहन सुविधा नहीं मिलने के कारण विद्यार्थी दरवाजों व पीछे लटककर सफर करते दिखाई देते हैं। कई बार तो चलती बस को दौड़कर पकड़ने की कोशिश भी की जाती है। जरा सा संतुलन बिगड़ा तो गंभीर हादसा हो सकता है।
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल-कॉलेज के समय यात्रियों का दबाव अधिक रहता है। बस में जगह नहीं मिलने पर मजबूरी में दरवाजे के पास खड़े होकर या बाहर लटककर सफर करना पड़ता है। जहां विद्यार्थी लटकते हैं, वहां न ठीक से पैर टिकाने की जगह होती है और न सुरक्षित तरीके से पकड़ने का साधन।
इसके बावजूद यह खतरनाक सफर रोजमर्रा की तस्वीर बनता जा रहा है। कुछ विद्यार्थियों का आरोप है कि कई बार चालक उन्हें देखकर भी निर्धारित स्थान पर बस ठीक ढंग से नहीं रोकते। ऐसे में बस छूटने और कॉलेज पहुंचने में देरी के डर से विद्यार्थी दौड़कर बस पकड़ने का प्रयास करते हैं।
उनका कहना है कि यदि विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए व्यस्त समय में पर्याप्त बसें उपलब्ध हों और निर्धारित स्टॉप पर बसें ठीक से रुकें तो ऐसी स्थिति काफी हद तक टाली जा सकती है। इस जोखिम भरे सफर में पहले भी विद्यार्थियों को चोट लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इसके बावजूद न विद्यार्थियों की जल्दबाजी कम हो रही है और न ही परिवहन व्यवस्था में ऐसा बदलाव दिखाई दे रहा है, जिससे उन्हें सुरक्षित सफर मिल सके। अभिभावकों के लिए भी बच्चों का रोज इस तरह बसों में सफर करना चिंता का कारण बना हुआ है।
पढ़ाई की जल्दी ऐसी कि चलती बस के पीछे लगा देते हैं दौड़
सुबह स्कूल-कॉलेज पहुंचने की जल्दी में विद्यार्थी कई बार अपनी सुरक्षा तक भूल जाते हैं। बस आगे बढ़ने लगे तो पीछे दौड़कर उसे पकड़ने और दरवाजे पर लटकने का प्रयास किया जाता है। विद्यार्थियों का कहना है कि अगली बस के इंतजार में कक्षा छूटने का डर रहता है। यही जल्दबाजी कभी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में अतिरिक्त बसों के साथ विद्यार्थियों को भी चलती बस में चढ़ने से रोकने के लिए जागरूक करने की जरूरत है।
छात्राओं का आरोप-निश्शुल्क यात्रा का लाभ लेने में भी परेशानी
छात्राओं का कहना है कि निश्शुल्क यात्रा की सुविधा होने के बावजूद कुछ निजी बसों में उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रियंका और सोनिया सहित विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कई बार बस में बैठाने से मना कर दिया जाता है और सवारियों के सामने उतरने तक को कहा जाता है। उनका कहना है कि सुविधा का लाभ धरातल पर सुनिश्चित हो तो ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए स्कूल-कॉलेज आना आसान हो सकता है।
बस पास जेब में, फिर भी सफर की चिंता
ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतिदिन हांसी में पढ़ने आते हैं। इनमें अनेक विद्यार्थियों के बस पास बने हुए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पास होने के बाद भी कई बार निजी बसों में सफर को लेकर परेशानी आती है। उनका सवाल है कि जब पढ़ाई के लिए परिवहन सुविधा और पास उपलब्ध हैं तो उन्हें सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचने की व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
बुजुर्गों को भी किराये को लेकर होती है बहस
विद्यार्थियों के साथ कुछ बुजुर्ग यात्रियों ने भी निजी बसों में रियायती किराये को लेकर परेशानी की बात कही। उनका आरोप है कि पात्र होने के बावजूद कई बार आधे किराये की सुविधा को लेकर परिचालकों से बहस की स्थिति बन जाती है। यात्रियों की मांग है कि सरकार की ओर से निर्धारित सुविधाओं का पालन सभी बसों में स्पष्ट रूप से सुनिश्चित कराया जाए।
