जागरण संवाददाता, हिसार: प्रदेश में एक करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की स्टेट विजिलेंस ब्यूरो जांच करेगी। मुख्य सचिव हरियाणा सरकार के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा (यूएलबी) की ओर से प्रदेश के सभी उपायुक्त, निगम कमिश्नर और ईओ को आदेश दिए गए हैं, जिसमें यूएलबी की ओर से अफसरों को आदेश दिए हैं कि एक करोड़ से अधिक विकास कार्यों की लिस्ट उन्हें निर्धारित प्रफोर्मों के अनुसार भेजी जाए, ताकि उन कार्यों की विजिलेंस जांच की जा सके। एक करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की यह लिस्ट 7 दिन में यानि 14 नवंबर तक मांगी गई है, जिसको लेकर निगम इंजीनियरों ने फाइलें खंगालना शुरू कर दिया है।

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सेक्टरों से लेकर अन्य विभागों के कई एक-एक करोड़ से अधिक के चल रहे विकास कार्य

नगर निगम ने शहर के सेक्टरों में एक करोड़ से अधिक के विकास कार्यों को हरी झंडी दी हुई है। इसके अलावा पुल निर्माण से लेकर अन्य विकास कार्य भी प्रोग्रेस में है। जो एक करोड़ से अधिक है। ऐसे में सभी इंजीनियरिग विभागों को एक करोड़ से अधिक की लागत के विकास कार्यों की लिस्ट भेजनी है। इसमें कई विकास कार्य तो ऐसे हैं जो सवालों के घेरे में हैं। ऐसे में विजिलेंस जांच में कई विकास कार्यों का सच जनता के सामने आने की उम्मीद जग उठी है।

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मेयर को विकास कार्यों की जांच में कई मिल चुकी हैं खामियां

ताजा मामला नवंबर 2019 में ही वार्ड- 5, 6 और वार्ड 7 के बीच नाले वाली सड़क का है, जहां मेयर ने जनता की शिकायत पर जाकर स्वयं सड़क खोदकर जांच की तो निर्माण में खामियां मिली। सड़क निर्माण में तय मानकों से कम रोड़ा डाला हुआ था, जिसके बाद मेयर ने एक्सइएन को सड़क उखड़वाकर तय मानकों पर रोड़ा डलवाने और रोलिग के आदेश दिए। साथ ही कार्य सही से न होने तक ठेकेदार की पेमेंट रुकवा दी। उधर दूसरी तरफ वार्ड-9 में आने वाले मेलाग्राउंड के पार्कों के सुंदरीकरण में कामों की घटिया क्वालिटी मिलने पर उस पर भी एक्शन लिया।

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पूर्व से ही विजिलेंस जांच में हिसार सुर्खियों में रहा

नगर निगम बनने से पहले नगर परिषद के समय में हिसार में विकास कार्यों को अपने चहेतों को बांटने का मामला सामने आया था। सूत्रों के अनुसार करीब वर्ष 2009 में एसपी विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि नगर परिषद में तत्कालीन प्रधान एवं अधिकारियों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए विकास कार्यों में घपला किया गया है। इसकी जांच करते हुए विजिलेंस द्वारा शहरी स्थानीय निकाय विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी और आरोपितों के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी मांगी थी। इसके बाद मई 2017 में नगर निगम हिसार में विजिलेंस टीम ने जांच की और मामले में चार्जशीट पेश हुई। यह मामला शहर में लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। जिसमें निगम अफसर से लेकर ठेकेदार तक फंसे थे।

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दो भागों में जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर तक की मांगी है रिपोर्ट

- प्रफोर्मा में कार्य का नाम

- डिविजन का नाम

- काम करने वाले एजेंसी या फर्म का नाम

- काम अलॉट करने की तिथि

- काम के शुरु होने की तिथि

- काम पूरा होने की तिथि

- यदि कोई इन्हांसमेंट राशि है तो उसकी डिटेल

- काम का मौजूदा स्टेट्स

- काम से संबंधित अन्य कोई जानकारी

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यूएलबी ने एक करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की लिस्ट मांगी है, जिसको स्टेट विजिलेंस ब्यूरो देखेगी। निदेशालय के आदेशानुसार रिपोर्ट भेजी जाएगी।

- एचके शर्मा, एक्सईएन, नगर निगम हिसार।

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यूएलबी ने विजिलेंस जांच का फैसला लिया है तो सही है। समय-समय पर ऐसी जांच होती रहनी चाहिए। जांच में वही डरता है जो गलत होता है। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई भी होनी चाहिए।

- गौतम सरदाना, मेयर, नगर निगम हिसार।

Posted By: Jagran

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