हिसार [वैभव शर्मा]। इंसानों के मनोविज्ञान के बारे में तो आपने सुना होगा, मगर पौधों का भी मनोविज्ञान होता है इस बारे में कम ही जानकारी मिलती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि खेतों में अगर गेहूं के पौधे के पास घास उगती है तो वह पौधा उसे देखकर डर जाता है। उस पौधे के अंदर वह तत्व एक्टिव हो जाते हैं जो एक दुश्मन से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। कनाडा के ग्वेल्फ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कलेरेनस जे सवेंटन ने अपनी रिसर्च फसलों में डर के मनोविज्ञान पर की है। उनकी रिसर्च में ऐसी कई जानकारी सामने आई हैं, जो बताती हैं कि पौधे भी इंसानों की तरह प्रतिक्रिया देते हैं। वह अपने दोस्त और दुश्मन से कैसा व्यवहार करना है इस बात को बखूबी जानते हैं।

पौधों के मनोविज्ञान पर ऐसे शुरू हुई रिसर्च

प्रो. सवेंटन ने देखा कि घर में गेट पर पौधे रखने से अलग ग्रोथ होती है तो अंदर रखने से अलग, इस बात से उनके मन में आया कि पौधों का भी एक मनोविज्ञान होता होगा। उन्होंने अपने फार्म में एक गेहूं का पौधा लगाया और उसके आसपास घास लगाई वहीं दूसरी तरफ गमले में सिर्फ गेहूं लगाया। दोनों मामलों में पौधों को पानी, न्यूट्रिएंट, खाद, बीज दिए गए। इसमें उन्होंने जाना कि जिस गमले में गेहूं के साथ घास उग आई थी वह अधिक समय तक नहीं चला, वहीं दूसरी तरफ बिना घास वाला पौधा बढ़ता गया। इसके बाद उन्होंने गेहूं के अलावा मक्का पर भी यह प्रयोग किया। पहली बार इस प्रकार की थ्योरी पर काम किया गया है, इसलिए इस पर आगे अभी कई रिसर्च होंगी और परिणाम चौकाने वाले सामने आएंगे।

किसानों को कैसे होगा फायदा

विश्व के अधिकांश देशों में किसानों को गेहूं के साथ घास की समस्या से दो चार होना पड़ता है। पिछले चार पांच वर्षों से घास के कारण किसानों को लगातार नुकसान हो रहा है। प्रो. सवेंटन बताते हैं कि किसान घास उगते समय ही उसे खेतों से हटा देंगे तो उनकी फसल को डर नहीं होगा और अच्छी पैदावार होगी।

बिजली के झटके से किया जा सकता है घास का सफाया

इसी सम्मेलन में इजरायल की द हेब्रयू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के वैज्ञानिक डॉ. बरुच रुबिन ने अपनी रिसर्च में घास की समस्या से निजात के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि घास को बिजली के झटके से भी मारा जा सकता है। इससे घास में आग लग जाती है। इसके साथ ही क्रिस्पर जीन की एडिटिंग कर, ट्रैक्टर के पीछे एक मशीन में आग लगाकर भी घास की समस्या को समाप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम 2050 तक पर्याप्त खाद्यान्न उत्पन्न तो कर लेंगे मगर समस्याओं से जूझने का प्लान तैयार किया जाना चाहिए।

वैज्ञानिकों ने मनोविज्ञान पर नहीं पढ़ी कभी ऐसी रिसर्च

हरियाणा के कृषि विश्वविद्यालय में 20 देशों के 100 से अधिक वैज्ञानिक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिभाग करने पहुंचे हैं। इस सम्मेलन में ही प्रो कलेरेनस ने अपनी रिसर्च प्रस्तुत की। एचएयू में कई वर्षों से गेहूं की घास पर काम कर रहे वैज्ञानिक डॉ. समंदर सिंह बताते हैं कि इस प्रकार की रिसर्च आज तक उन्होंने कभी नहीं सुनी।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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