जागरण संवाददाता, रोहतक : न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बिक्री के लिए फसल का पंजीकरण जरूरी है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से पंजीकरण के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य किया गया है। किसान अपनी फसलों का पंजीकरण 31 जनवरी तक करवाएं। इसके लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल बुधवार से फिर खुलेगा। जिसके बाद किसान अपनी फसलों का पंजीकरण करा सकते हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल बुधवार को दोबारा खुलेगा व किसान अपनी रबी फसलों का पंजीकरण 31 जनवरी तक करवा सकते है।

अपनी फसल की एमएसपी पर बिक्री के लिए व अन्य योजनाओं का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण करवाना जरूरी है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा का पोर्टल दो दिन तक बंद रहने के बाद यह फिर से खुलेगा। किसान पंजीकरण के अंतिम तिथि तक अपनी फसलों का पंजीकरण अवश्य करवाएं। फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसानों की ओर से फसल का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। अन्य योजनाओं को भी इस पोर्टल से जोड़ा गया है। दो दिन तकनीकी सुधार के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण रोक दिया गया था।

इस तरह करवाएं पंजीकरण :

पोर्टल दोबारा खुलने के बाद किसान फसल डाट हरियाणा डाट जीओवी डाट इन पोर्टल पर जाकर अपनी फसलों का पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके अलावा किसान आनलाइन या नजदीकी अटल सेवा केंद्र पर जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के टोल फ्री नंबर पर संपर्क भी किया जा सकता है। पंजीकृत करवाते समय किसान अपने पास मोबाइल फोन जरूर साथ रखें। विभिन्न कृषि यंत्रों, सूक्ष्म सिंचाई यंत्रों, फसल अवशेष प्रबंधन के तहत दी जाने वाली सब्सिडी के लिए भी मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर पंजीकरण जरूरी है।

37 प्रतिशत भूमि हुई है पंजीकृत :

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. वजीर सिंह ने किसानों से आहान किया है कि वे मेरी फसल-मेरा ब्योरा योजना के तहत संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण अवश्य करवाएं। पोर्टल पर रबी फसल 2022 का पंजीकरण का काम चल रहा है। किसान इसका पूरा लाभ उठाएं। कृषि संबंधित योजनाओं का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकृत किसानों को सरकार की कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ प्रमुखता से मिलेगा। वजीर सिंह ने कहा कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर जिला में लगभग एक लाख 19 हजार 856 एकड़ भूमि पंजीकृत हो चुकी है, जोकि केवल 37 प्रतिशत ही है।

Edited By: Manoj Kumar