जेएनएन, हिसार। रामपाल को दोषी करार दिए जाने के बाद भी प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढील नहीं देगा। जिले में लगे सभी 48 नाके बृहस्पतिवार की तरह आगे एक सप्ताह तक एक्टिव रहेंगे। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जाएगी। वहीं प्रशासन ने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर धारा 144 को 17 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया है। प्रशासन को अंदेशा है कि समर्थक अगली सुनवाई तक रोजाना शहर में आने का प्रयास करेंगे इसके लिए बॉर्डर एरिया की पुलिस को खासतौर पर अलर्ट रहने को कहा गया है।

बृहस्पतिवार को प्रशासन ने सुनवाई से पहले सेंट्रल जेल वन की तीन किलोमीटर की परिधि में सभी स्कूल व कालेज बंद करा दिए गए।

सुबह-सुबह स्कूल प्रबंधकों को बच्चों की छुट्टी करने के आदेश दिए गए। स्कूल संचालकों की ओर से मैसेज कर अभिभावकों को बच्चों को स्कूल न भेजने के लिए कहा गया। प्रशासन की ओर से लगाए हर नाकों पर वाहनों की बारिकी से जांच की गई। यहां तक की कुल्फी बेचने वालों और उनकी रेहडिय़ों की नाकों पर तलाशी ली गई। बाहर के नंबर की कोई गाड़ी भी गाड़ी पुलिस को दिखी तो उसे तुरंत रोककर चेङ्क्षकग की गई। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर रोजाना से कम चहल-पहल देखने को मिली। यही हाल सरकारी कार्यालयों का रहा। यहां रोजाना की तुलना में कामकाज ना के बराबर हुआ।

16 और 17 दो दिन सबसे ज्यादा कड़ी होगी सुरक्षा

प्रशासन के लिए 16 और 17 अक्टूबर का दिन 11 अक्टूबर के दिन से भी बड़े दिन रहेंगे। इस दिन रामपाल की सजा का एलान किया जाएगा। प्रशासन को अंदेशा है कि रामपाल को दोषी करार दिए जाने से भावानात्मक संदेश समर्थकों में फैलाया जाएगा, जिसके बाद और भी अधिक संख्या में समर्थक यहां पहुंच सकते हैं। इन दोनों ही दिन सुरक्षा व्यवस्था दुरस्त रहेगी और किसी भी अनुयायी को शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इस दौरान कानून व्यवस्था की वर्तमान प्रक्रिया दोहराई जाएगी और जरूरत पडऩे पर पुलिस बल संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।

कामयाब रही प्रशासन की रणनीति

  रामपाल अनुयायियों की भीड़ को रोकने के लिए प्रशासन ने न केवल जिला बल्कि जिला से बाहर भी प्रबंध किए गए। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व बाहर के आने वाले निजी वाहनों की विशेष चेकिंग की गई। चेकिंग के दौरान यदि कहीं रामपाल अनुयायी पाए गए तो उन्हें वापस भेज दिया गया। ऐसा ही कार्य जिला से बाहर व जिला की सीमाओं पर किया गया। नतीजन जिला हिसार में बहुत कम समर्थक पहुंच पाए।

रेलवे स्टेशन पर सामान्य दिनों से भी कम रही भीड़

बरवाला के सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल पर हत्या के मामले में आए फैसले को लेकर रेलवे स्टेशन पर हाई अलर्ट रहा। स्टेशन पर जीआरपी, आरपीएफ के अलावा आरएएफ के जवान तैनात रहे। स्टेशन पर सुरक्षा के मद्देनजर रखते हुए ट्रेनों में चेकिंग की गई, वहीं यात्रियों की आइडी भी जांच की गई। यात्रियों से उनके नाम, कहां से आए और कहां जाना के बारे में पूछा गया। रेलवे स्टेशन पर चारों ओर पुलिस तैनात रही। सामान्य दिनों की तुलना में बृहस्पतिवार को यात्रियों की भीड़ भी कम दिखी। ट्रेनों की आवाजगाही को लेकर भी कोई परेशानी नहीं हुई। स्टेशन अधीक्षक महेंद्रपाल चुघ का कहना है कि बृहस्पतिवार को ट्रेनों के आवागमन में कोई दिक्कत नहीं आई। सभी ट्रेनें सुचारू रूप से चली। स्टेशन पर सुरक्षा को देखते हुए जवान तैनात थे, ताकि किसी प्रकार की कोई अव्यवस्था न फैले। वहीं जब तक सजा को लेकर फैसला नहीं आता है, तब तक रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा को देखते हुए फोर्स तैनात रहेगी।

बस स्टैंड पर पुलिस की दो रिजर्व कंपनी रहीं तैनात

फैसले को देखते हुए बस स्टैंड पर पुलिस की दो रिजर्व कंपनियां तैनात रहीं। पुलिस ने आने-जाने वाले राहगीरों से पूछताछ की और सामानों की चेकिंग भी की। बस स्टैंड के लोकल और मेन गेट पर पुलिस बल तैनात रहा। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से बस स्टैंड में ज्वलनशील पदार्थों पर पूर्णत बैन रखा गया। सुबह से लेकर दोपहर तक कुछ चुनिंदा रामपाल समर्थकों ने बस स्टैंड में एंट्री करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उनकी एक न चली। पुलिस ने समर्थकों से पूछताछ कर वहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिस कारण परिणामस्वरूप रोडवेज व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही, लेकिन बसों की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लंबे रूट जैसे दिल्ली, चंडीगढ़, यमुनानगर, राजगढ़, पानीपत, गुरुग्राम व यमुनानगर व लोकल रूट में आदमपुर, हांसी, उकलाना, बरवाला, घिराय सहित अन्य लोकल रूट पर भी बसों की कमी खली। जिस कारण प्राइवेट बसों में बैठकर यात्रियों ने सफर किया, जिस कारण वे निश्चित घंटे से दो से तीन घंटे की देरी से पहुंचे।

18 बसें वर्कशॉप में पहुंचीं, दो प्रशासन के पास

यातायात प्रबंधक जितेंद्र यादव ने बताया कि शाम सात बजे प्रशासन की ओर से 18 बसें वापस कर दी गईं, जबकि दो बसें अभी तक जिला प्रशासन के पास हैं। शाम सात बजे के बाद वापस लौटी बसों को लंबे व लोकल रूटों पर भेज दिया गया। ताकि दिल्ली, चंडीगढ़, पानीपत सहित अन्य लंबे रूटों पर नाइट सेवा को सुचारू रूप से चलाया जा सकें।

13 हजार रुपये के हिसाब से जिला प्रशासन करेगा भुगतान

रामपाल के फैसले को लेकर जिला प्रशासन ने कुल 20 बसें रोडवेज से मांगी थी। जिस कारण सीधे तौर पर 20 रूट बाधित होने से रोडवेज के राजकोष पर बुरा प्रभाव पड़ा। हालांकि रोडवेज की ओर से एक दिन के प्रत्येक बस के हिसाब से 13 हजार रुपये वसूले जाएंगे।

Posted By: manoj kumar