हिसार, जेएनएन। मानसून के जिन दिनों में बूंदों की ठंडी फुहारें बरसती हैं, उन्‍हीं दिनों में धुल की चादर ने जमीन और आसमान को अपनी गिरफ्त में लिया हुआ है। मगर ये धूल आखिर आई कहां से है और कब तक रहेगी ये सवाल रह रहकर आपके जेहन में आता होगा। तो आपको बता दें कि यह धूल राजस्‍थान की ओर से आईं पश्चिमी हवाओं के कारण छाई हुई है।

बीते तीन दिनों से धूल के कारण जनजीवन अस्‍त व्‍यस्‍त हो चुका है तो वहीं हिसार, फतेहाबाद, सिरसा सहित हिसार जाेन में प्रदूषण का स्तर रेड अलर्ट पर पहुंच गया है। दिन में भी अंधेरे जैसी स्थित‍ि होती है तो वाहनों को लाइटें जलाकर चलना पड़ रहा है। धूल के कणाें के साथ हवा से शहराें के ऊपर गुबार सा छा गया है। इसकी वजह से पीएम 2.5 का स्तर 300 पार कर गया है। जो कि बेहद खतरनाक स्थित‍ि है।

पीएम 2.5 यानि वह प्रदूषण जिसमें धूल, गाद आदि के कण हाेते हैं। इस प्रदूषण में सबसे अधिक फतेहाबाद है जाेकि 370 तक पहुंच गया है ताे हिसार में 315 पर बना हुआ है। यह स्तर दिल्ली हाईकाेर्ट के पास इलाके में भी प्रदूषण अधिक दर्ज किया गया है।

पीएम 2.5 का स्तर लाल निशान पर पहुंचने का मतलब है कि प्रदूषण काे आप सीधे सांस के माध्‍यम से लेते हैं ताे आपके फेफड़े खराब हाे सकते हैं। दमा और टीबी के रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित हो सकती है। धूल के कारण श्‍वास रोगियों की संख्‍या में भी इजाफा हुआ है।

जानें किस शहर का कितना पीएम 2.5 का स्तर
फतेहाबाद 370
सिरसा     320
हिसार      321
भिवानी     286
नोट- प्रदेश के अन्‍य जिलों में स्थिति खराब बनी हुई है, जहां इन जिलों की तरह ही हालात बने हुए हैं। राजस्‍थान सीमा की ओर लगते जिलों में स्थिति ज्‍यादा खराब है।

जानें क्‍या होता है पीएम 2.5 और पीएम 10
विशेषज्ञों के अनुसार PM पर्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) या कण प्रदूषण (particle pollution) भी कहा जाता है, जो कि वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है। हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते हैं।

कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है। कण प्रदूषण में PM 2.5 और PM 10  शामिल हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं। PM 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3% है।

आम तौर पर PM2.5 के रूप में लिखा जाता है, इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही पता लगाया जा सकता है। ये PM10 के समकक्षों से भी छोटे होते हैं। PM10 वो कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमेटर होता है और इन्हें fine particles भी कहा जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर भी कहते हैं।

इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। PM10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रदक्शेन की जगह पर और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है। हम आपको बता दें कि हवा में PM2.5 की मात्रा 60 और PM10 की मात्रा 100 होने पर ही हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है।
 

जानें कैसे और क्‍यों बना इस तरह का प्रदूषित वातावरण
एचएयू के कृषि माैसम विज्ञान विभाग के अनुसार कुछ दिन पहले हुई बारिश के बाद पुरवाई हवाएं चलीं थी। जिसने वातावरण में नमी बना दी। इसके बाद दाे दिन पहले राजस्थान की तरफ से पश्चिमी हवाएं आईं जाे अपने साथ धूल के बारीक कण भी साथ लेकर आईं। वातावरण में नमी बने होने के कारण धूल के कण आसमान की ओर पूरी तरह से नहीं जा सके और हवा का दबाव बनने के कारण धूल के कण जमीन पर ही बने हुए हैं। इसके कारण हवा से एक धूल का गुबार बन गया। हिसार में 14 जुलाई के बाद बारिश हाेने की संभावना है, इसके बाद ही गुबार खत्म हाेगा। ऐसी ही दूसरे इलाकाें में भी बारिश के बाद धूल के कणाें का प्रभाव कम हाेगा।

धूल से ऐसे करें बचाव

  • धूल से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करना चाहिए। धूल उड़ते समय मुंह व नाक को कपड़े से ढक कर रखिए। - जरूरी काम होने पर ही घर से निकलें, सुबह के समय रेस न लगाएं या सैर करने न निकलें।
  • धूम्रपान न करें और न ही ऐसे लोगों के आसपास रहें, जो धूम्रपान कर रहे हों।
  • कार या गाड़ी में जहां तक संभव हो खिड़की के शीशे चढ़ाकर रखिए। ज़रूरत के अनुसार एसी का प्रयोग कर सकते हैं।
  • आंखों और चेहरे को धोते रहें और धूप के चश्‍मे का प्रयोग करें, वाहन चलाते समय हेलमेंट का शीशी जरूर मुंह के आगे रखें।
  • आंखों में ड्राईनेश दूर करने के लिए दवाई डालते रहें। गुड़ का सेवन करते रहें इससे सीने में जमा धूल के कण थूक के साथ बाहर आ जाते हैं।

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Posted By: manoj kumar