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5000 साल पुराने बर्तनों में चखें 'देसी स्वाद', राखीगढ़ी महोत्सव में बाजरे की रोटी और खट्टी दाल से सजेगी हरियाणवी थाली

By Sunil MannEdited By: Prince Sharma
Published: Tue, 13 Oct 2026 08:53 AM (IST)

राखीगढ़ी महोत्सव (19-25 अक्टूबर) में मेहमान हड़प्पाकालीन बर्तनों में हरियाणा का देसी और हड़प्पन खाना चखेंगे, जिसमें बाजरे की रोटी, खट्टी दाल जैसे व्यंजन शामिल होंगे।

राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की दिश ऑन स्टैंड को देखते हुए उपनिदेशक नरेंद्र परमार व दिनेश श्योरान।

राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की दिश ऑन स्टैंड को देखते हुए उपनिदेशक नरेंद्र परमार व दिनेश श्योरान।


HighLights

  1. राखीगढ़ी महोत्सव में हड़प्पाकालीन बर्तनों में मिलेगा देसी खाना

  2. बाजरे की रोटी, खट्टी दाल जैसे पारंपरिक व्यंजन होंगे खास

  3. महोत्सव का लक्ष्य राखीगढ़ी को पर्यटन केंद्र बनाना

सुनील मान, नारनौंद। 19 से 25 अक्टूबर तक होने वाले राखीगढ़ी महोत्सव में देश और विदेश से आने वाले मेहमान हड़प्पाकालीन सभ्यता के बर्तनों में हरियाणा का देसी खाना और हड़प्पन खाने का स्वाद चख सकेंगे।

उस समय के जो भी विख्यात व्यंजन थे, उनको यहां के ग्रामीण चूल्हे और हारे में बनाने का काम करेंगे ताकि पूरी तरह से माहौल को देसी बनाया जा सके। इसके लिए पुरातत्व विभाग की तरफ से खाने को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

हड़प्पाकालीन सभ्यता के लोग खाना रखने के लिए डिस आन स्टैंड का प्रयोग करते थे, वैसे ही स्टैंड तैयार किए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों को ऐसा प्रतीत हो कि वह एक बार फिर पुरानी संस्कृति में लौट आए हैं।

सभी आधुनिक चकाचौंध को छोड़कर पांच हजार वर्ष पहले जो खाना खाया जाता था और जिन बर्तनों में परोसकर खाते थे, वैसा ही खाना तैयार करके मेहमानों को खिलाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

ये व्यंजन करेंगे आकर्षित

मेहमानों के लिए खट्टी दाल, मीठे चावल, रोटी, चटनी, बाजरे की रोटी, दाल, चूरमा, गुड़ के व्यंजन, कचरी की चटनी, बाजरे के लड्डू और खिचड़ी, लस्सी, रायता आदि व्यंजन बनाए जाएंगे।

हरियाणवी संस्कृति और ग्रामीण खेल होंगे प्रमुख आकर्षण दंगल, पारंपरिक ग्रामीण खेल, हरियाणवी लोक संस्कृति और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी महोत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे।

खास बात यह है कि इस बार महोत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पुरातात्विक शोध और पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ना है।

खाने में पूरा देसी टच रहेगा

परमार पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा के उपनिदेशक नरेंद्र परमार ने बताया कि राखीगढ़ी महोत्सव को यादगार बनाने के लिए देसी और हड़प्पन खाने के लिए लिस्ट तैयार की जा रही है वहीं खाना डाइनिंग टेबल पर नहीं हड़प्पन समय की डिस आन स्टैंड पर रखकर खिलाने की तैयारी की जा रही है। खाने में पूरी तरह से देसी टच और देसी स्वाद रहेगा।

महिलाओं को दिया खाना बनाने का दिया प्रशिक्षण जिला पार्षद दिनेश श्योरान बताया कि गांव की काफी ऐसी महिलाएं खाना बनाने में निपुण है जो की हड़प्पन खाना बनाने के लिए तैयार हैं।

उनको इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई है। वहीं बर्तनों को भी हड़प्पन कालीन सभ्यता की सील तैयार करने वाले स्पेशलिस्ट राहुल से तैयार करवाया जा रहा है। इन्हीं बर्तनों में मेहमानों को खाना परोसा जाएगा। इस संस्कृति के खाने की महक देश ही नहीं विदेशों तक भी जाएगी।

इसलिए खास है राखीगढ़ी

राखीगढ़ी इसलिए खास है क्योंकि यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे बड़े ज्ञात हड़प्पाकालीन स्थलों में से एक है। यहां से हमें काफी उन चीजों की सीख मिलेगी जैसे कि वह लोग उसे समय रहते थे। 

नगर सभ्यता: हजारों वर्ष पहले भी लोग योजनाबद्ध बस्तियों में रहते थे। उस समय भी गलियां इस तरीके से बनाई जाती थी जैसा कि हम आज बनाते हैं। गलियों के बराबर में पानी की निकासी के लिए नाली भी बनाते थे जैसा कि आज भी आप राखीगढ़ी में देख सकते हैं।

आर्थिक जीवन: आभूषण निर्माण, शिल्प और व्यापारिक संपर्कों के प्रमाण मिलते हैं। दिल्ली नंबर एक पर काफी ऐसी भट्ठियां मिली हैं, जहां पर लोग व्यापार के लिए सामान तैयार करते थे और फिर उनका उनका देश-विदेश में व्यापार होता था।