हिसार, जेएनएन। मुख्यमंत्री के हिसार आगमन के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस तमाशबीन बनकर आंदोलनकारियों को देखते रही। आंदोलनकारी एक के बाद एक बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ते रहे और कोविड केयर अस्पताल तक पहुंच गए। इस पूरे घटनाक्रम में किसानों को रोकने के लिए पुलिस की एकजुटता में कई बड़ी कमियां दिखाई दीं।

पुलिस खुद ही एकजुट नहीं थी, किसानों से संघर्ष कर रहे साथी पुलिस वालों को मदद के लिए बुलाते तो वह दो कदम बढ़ते और चार कदम पीछे हट जाते। ऐसे में कई पुलिसकर्मी मदद के लिए आगे ही नहीं आए। यही हाल डीएसपी अभिमन्यु के साथ भी दिखाई दिया। जब वह जिंदल पुल के पास किसानों के एक-एक वाहन को रोकने के लिए उसके आगे आ रहे थे तो वह अकेले संघर्ष करते दिख रहे थे। जबकि उनसे कुछ दूरी पर दर्जनों पुलिस बल फुटपाथ पर यह नजारा देख रहे थे।

हर ट्रैक्टर इतनी तेजी से आता कि लगता कि डीएसपी के पैर पर चढ़ ही जाएगा मगर वह समय रहते खुद को बचा लेते। इसके बावजूद भी डीएसपी अभिमन्यु ने हार नहीं मानी। किसानों के पूरे काफिले में शायद ही ऐसी कोई गाड़ी होगी, जिसे उन्होंने रोकने का प्रयास न किया हो। अगर यह काम मिलकर सभी पुलिस कर्मी करते तो किसानों को रोक सकते थे। डीएसपी की मदद केवल दो या तीन पुलिस कर्मी कर रहे थे जबकि किसान दर्जनों उन्हें घेरे हुए थे।

डीआइजी ने बताया था कि सीएम चले गए, फिर भी किसान नहीं माने

सातरोड नहर पर जब भारी संख्या में किसान पहुंच गए तो डीआइजी पहुंचे तो डीआइजी बलवान ¨सह राणा ने किसानों को बताया था कि अब शहर मे जाने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि सीएम जा चुके हैं। फिर भी किसानों ने पुलिस का विश्वास न करते हुए पहले वहां ट्रकों को ट्रैक्टर से हटाया। फिर बैरिकेड्स को नहर में फेंक दिया। किसान इस दौरान हाथों में लाठी डंडे लिए आक्रोशित दिखाई दे रहे थे।

पुलिस वालों पर ही चढ़ा दिया ट्रैक्टर

जिंदल मॉडर्न स्कूल में बने अस्पताल के पास जैसे ही किसान पहुंचे तो उनके साथ आए कुछ किसानों ने ट्रैक्टर वालों को आगे आने के लिए कहा। ट्रैक्टर वाले इशारा मिलते ही आगे आए और अस्पताल के सामने रास्ता रोककर खड़े पुलिस कर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। इसमें कुछ पुलिस कर्मी गिर भी गए। ऐसे में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हल्का बल प्रयोग किया।तो किसानों ने पथराव शुरू कर दिया। यहीं से विवाद बढ़ता गया और पुलिस को लाठी चार्ज तक करना पड़ा। इधर, किसान जहां जगह मिली वहीं से पथराव करने लगे।

योजनाबद्ध तरीके से पूरे प्रदर्शन को किया गया लीड

इस पूरी विरोध प्रदर्शन में एक बार साफ दिखी कि किसान या उनके साथ आए असमाजिक तत्व पहले से ही प्ला¨नग कर आए थे कि किस प्रकार से पुलिस के मोर्चे को कमजोर करना है। बेरिके¨डग तोड़नी है और पुलिस को खदेड़ना है। जब भी कुछ तोड़ना होता तो ट्रैक्टर आगे कर दिया जाता। पुलिस अधिकारी से लड़ना होता तो महिलाएं आगे कर दी जातीं। इस दौरान पुलिस ने कई महिला आंदोलनकारियों को भी पकड़ा है।

टिकैत और चढ़ूनी के कहने पर लगाया जाम

वहीं, जैसे ही किसान नेताओं को जानकारी मिली कि स्थानीय किसान नेताओं सहित कई किसानों पर लाठी चार्ज के बाद हिरासत में लिया गया है तो किसान संयुक्त मोर्चा के द्वारा फैसला लिया गया कि इसके विरोध में जाम लगा दिया जाए। खुद राकेश टिकैत रामायण टोल प्लाजा, नारनौंद के माजरा प्याऊ और इसके बाद आइजी ऑफिस के बाहर धरने के बाहर पहुंचे। गुरनाम चढ़ूनी भी यहां उपस्थित थे। यहां टिकैत ने भाषण दिया। इसके बाद आइजी राकेश आर्य ने बातचीत के लिए किसानों को निमंत्रण भेजा। 11 सदस्यीय टीम जिसमें गुरनाम ¨सह चढ़ूनी भी थे बातचीत के लिए गई और आइजी के सामने अपना पक्ष रखा। करीब पौने घंटे चली मी¨टग के बाद किसान नेता बाहर आए और बताया कि उनका पुलिस के साथ समझौता हो गया है। पुलिस ना तो किसी को गिरफ्तार करेगी ना केस दर्ज करेगी। पुलिस ने भी किसानों के साथ सुलह के संकेत दिए।