जागरण संवाददाता, सिरसा। पिछले कई दिनों से कड़ाके की सर्दी पड़ने लगी है। इस मौसम में पशुओं को सामान्य दिनों से अधिक देखभाल की जरूरत है। इन दिनों पशुओं की सेहत बरकरार रखने के लिए खल व बिनौला की खुराक में वृद्धि करनी जरूरी है। इसी के साथ ठंड से सुरक्षा के लिए पशुओं को सप्ताह में कम से कम दो बार गुड़ की खुराक भी देना जरूरी है। इससे पशु का हाजमा ठीक रहने के साथ ही सर्दी से भी बचाव रहेगा।

पशुओं को सर्दी लगने के लक्षण

इस ठंड के मौसम में गलघोंटू जैसी घातक बीमारी भी फैलने का डर रहता है। इसी के साथ इस मौसम में पशुओं की बीमारियों के समय उनकी आंखों में डीड आना, चारा खाना कम देना, शरीरिक रूप से कमजोर हो जाना, सर्दी में टांगों में कंपन महसूस होना, अधिक सुस्त होना, कम दूध देना सहित कई अन्य लक्षण दिखाई देते है।

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. वीएस बांसल ने बताया कि पशुओं को ठंडा पानी न पिलाएं। इससे पशु बीमार होने की आशंका अधिक रहती है। वहीं पशुओं को कमरे से एकदम बाहर न निकालें। पहले दरवाजा 10-15 मिनट तक खुला छोडें। पशुओं के नीचे का स्थान हमेशा सूखा रखें। गीले में बैठने से भी पशुओं को ठंड लग जाती है। इस मौसम में पशुओं को नहलाने से परहेज करें। सूखे घास या कपड़े से उनके शरीर को साफ करें। हमेशा ताजा पानी पिलाएं।

पक्के फर्श पर है तो मैट डालें

उन्होंने पशुपालकों से कहा कि यदि पशु पक्के फर्श पर हैं तो उसके नीचे मैट डालें। मौसम में पशुओं के छोटे काफ को सामान्य से ज्यादा दूध पिलाएं। सर्दी से बचाव को लेकर पुख्ता इंतजाम करें। दुधारू पशुओं को मिनरल मिक्चर सहित अन्य खुराकों में वृद्धि करना अनिवार्य है ताकि पशु स्वस्थ रहने के साथ ही दुग्ध उत्पादन भी बरकरार रहेगा। सर्दी में जहां तक संभव हो सके मवेशियों को चारे में तूड़ी खिलाएं।

Edited By: Rajesh Kumar