जागरण संवाददाता, हिसार : प्रॉपर्टी टैक्स की पांच हजार बैलेंस सीट शून्य करने वाली कंपनी को फिर से निगम नोटिस बांटने का कार्य सौंपने जा रहा है। शहर के एक लाख 36 हजार प्रॉपर्टी मालिकों को नगर निगम प्रशासन प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस थमाएगा। यह फैसला बुधवार को मेयर गौतम सरदाना की अध्यक्षता में करीब दो घंटे चली फाइनेंस कंट्रेक्ट एंड परचेज एडोक सब कमेटी की बैठक में लिया गया। बैठक में मेयर गौतम सरदाना ने अफसरों को निर्देश दिए कि साल 2018-19 के बड़े बकायदारों से लेकर टैक्स न भरने वाले सरकारी विभागों की सूची तैयार कर उनसे प्राथमिकता के साथ 31 मार्च तक टैक्स वसूली करवाई जाए। मगर सवाल यह उठता है कि उस कंपनी से नगर निगम नोटिस क्यों बंटवारा रहा है जिस पर निगम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। पांच हजार बैलेंस शीट को शून्य करने का मामला निगम में भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में से एक है। बैलेंस सीट शून्य करने वाली जिस कंपनी को डिमांड व कलेक्शन रजिस्टर दुरुस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह आज तक 100 फीसद दुरुस्त नहीं हो पाया है। उस कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और उसकी हाउस ने पेमेंट तक रोक दी थी। बावजूद इसके अब उसी कंपनी के माध्यम से शहर में नोटिस बटेंगे।

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समझें, नोटिस के बहाने 30 से 40 लाख रुपये खर्चने का खेल

प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 31 जनवरी तक साल 2010 से लेकर साल 2018-19 तक के गृहकर के एकमुश्त टैक्स भुगतान पर 100 फीसद ब्याज माफी दी है। उस समय निगम ने नोटिस नहीं बांटे। अब छूट खत्म हो चुकी है। एक अप्रैल से नए वित्तवर्ष के तहत साल 2020-21 का टैक्स भुगतान होना है। नया वित्तवर्ष शुरू होने में मात्र 42 दिन शेष हैं, जिसमें नोटिस बांटने से लेकर भुगतान तक प्लानिग तो हुई लेकिन भुगतान संभव नजर नहीं आ रहा है। बावजूद इसके निगम जनता के 30 से 40 लाख रुपये खर्चने की तैयारी में है।

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एक्सपर्ट व्यू :

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के रिटायर्ड अकाउंट ऑफिसर सुभाष ने बताया कि अफसर पॉवर यूज कर नियमानुसार नोटिस बांटने का फैसला ले सकता है। रिकार्ड दुरुस्त करना। नोटिस तैयार कर उसे बांटने में समय लगता है। ऐसे में इतने कम समय में यह कार्य संभव नजर नहीं आ रहा है। जबकि नया वित्तवर्ष एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। ऐसे में यदि देखा जाए तो यह पैसे का सीधा दुरुपयोग ही है।

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रिकार्ड दुरुस्त नहीं, नोटिस बांटने की तैयारी हैरान करने का फैसला

18 फरवरी 2020 तक गृहकर शाखा में 4144 फाइलें जमा हो चुकी हैं। जिसमें टैक्स रिकार्ड दुरुस्त करने, नाम परिवर्तन व नाम दर्ज करने से लेकर विभिन्न प्रकार की गृहकर ब्रांच की फाइलें जमा हो चुकी हैं। पार्षद कविता केडिया ने कहा कि आज तक जानकारी नहीं है कि इनमें से कितनी फाइलें दुरुस्त हुईं। कितना टैक्स भुगतान हुआ। कोई रिकार्ड दुरुस्त नहीं है। ऐसे में अचानक टैक्स नोटिस बांटना कहां तक उचित है, यह विचारनीय मुद्दा है। नाम न छापने की शर्त पर एक पार्षद ने कहा कि निगम के कंप्यूटराइज डाटा दुरुस्त करने का काम हमारी समझ में तो आज तक नहीं आया। वहीं पार्षद जयवीर गुज्जर ने कहा कि आय-व्यय के ब्योरे पर ही काफी देर विचार विमर्श हुआ है।

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बैठक में ये लिए गए अहम फैसले

-टैक्स के बकायदार सरकारी महकमों की विशेष लिस्ट तैयार कर उनसे टैक्स वसूली के आदेश दिए हैं।

-20 साल से अधिक समय तक निगम की दुकानों के किरायेदारों को सरकार के फैसले के अनुसार सेलकेस की अनुमति के राहत देने के लिए कार्य करने के आदेश दिए हैं।

-निगम दरोगाओं की मदद से निगम टीम शहर के हर घर से वसूलेगी यूजर चर्जेज।

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बैठक में ये रहे मौजूद

चैयरमैन गौतम सरदाना सहित पार्षद जयवीर गुज्जर, अनिल जैन, मनोहर लाल, कविता केडिया मौजूद रहे। वहीं अधिकारी वर्ग में संयुक्त आयुक्त शालिनी चेतल, उप निगम आयुक्त डा. प्रदीप हुड्डा, एसई रामजीलाल, सीनियर अकाउंट आफिसर यज्ञदत शर्मा सहित निगम स्टाफ मौजूद रहा।

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निगम की आय बढ़ सके, इस बात का हवाला देते हुए अफसरों ने टैक्स के बिल बांटने की बात कही। निगम की आय हो, इसके लिए यह एक प्रयास है।

- गौतम सरदाना, मेयर व चैयरमैन सब कमेटी।

Posted By: Jagran

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