जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ : दिल्ली-हरियाणा के बीच साढ़े चार करोड़ से होने वाले काम पर आंदोलन का ग्रहण लगा हुआ है। यह प्रोजेक्ट है नाला निर्माण का। आंदोलन की वजह से इसका काम शुरू नहीं हो पा रहा है। नेशनल हाइवे-नौ पर 500 मीटर तक गंदा पानी जमा होने की समस्या इस नाला निर्माण से खत्म होनी है। एक साल से ज्यादा समय से इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। टेंडर भी गए थे, लेकिन आंदोलन की वजह से यहां पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है। बहादुरगढ़ का सिंचाई विभाग इस पर काम कर रहा है। पैसा दिल्ली सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।

यह समस्या दिल्ली की सीमा में है, मगर इससे परेशान हरियाणा, पंजाब का हर वह बाशिंदा है जो वाहन लेकर बहादुरगढ़ के रास्ते दिल्ली आता है। फिलहाल तो करीब आठ माह से आंदोलन के कारण यह बार्डर बंद है। दिल्ली सीमा में प्रवेश करते ही मेट्रो स्टेशन से आगे नेशनल हाइवे-नौ पर गंदा पानी जमा रहता है। ऐसे में देश की राजधानी में हर आगंतुक का यह गंदगी ही स्वागत करती है। पिछले दिनाें यहां पर दिल्ली के पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से कंकरीट की सड़क तो बना दी गई, मगर गंदे पानी की निकासी का इंतजाम नहीं हो पाया।

यह है प्लानिंग :

दिल्ली की बार्डर पर बसी कालोनी और मार्केट से निकलने वाला यह गंदा पानी हाइवे पर जमा होता है। इसकी दिल्ली के अंदर ही निकासी के लिए कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में दिल्ली पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से बहादुरगढ़ के रास्ते इसका समाधान खोजा गया। दिल्ली के अंदर टीकरी बार्डर मेट्रो स्टेशन से लेकर बहादुरगढ़ में सेक्टर-नौ मोड़ तक हाइवे के साथ-साथ नाले की प्लानिंग की गई। इस नाले के जरिये गंदे पानी की निकासी मुंगेशपुर ड्रेन में होनी है। नाले का निर्माण डिपोजिट वर्क के आधार पर बहादुरगढ़ सिंचाई विभाग ही करेगा। इसके लिए करीब साढ़े चार करोड़ का टेंडर जारी हुआ है। इस नाले की लंबाई करीब छह हजार फीट होगी। यह नाला दिल्ली-रोहतक रोड के एक तरफ से बनेगा। इसकी गहराई तीन फीट से लेकर साढ़े छह फीट तक होगी। अब आंदोलन के कारण दिक्कत आ रही है।

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टेंडर प्रक्रिया तो हो गई थी, लेकिन अांदोलन के कारण जो बेरिकेडिंग है और आंदोलनकारियों के तंबू लगे हुए हैं, उसकी वजह से काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

--देवेंद्र सिंह एसडीओ, सिंचाई विभाग, बहादुरगढ़

Edited By: Manoj Kumar