PM मोदी ने पत्र जारी कर पूछा- 100 साल पुरानी बिल्डिंग का हाल, हरियाणा सरकार से जर्जर स्कूलों पर भी मांगी रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों का संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से 100 साल पुरानी बिल्डिंगों की रिपोर्ट मांगी है।
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PM मोदी ने हरियाणा सरकार से जर्जर स्कूलों पर मांगी रिपोर्ट। फाइल फोटो
HighLights
पीएम मोदी ने जर्जर सरकारी स्कूलों का संज्ञान लिया।
हरियाणा सरकार से 100 साल पुरानी बिल्डिंगों की रिपोर्ट मांगी।
हिसार के 215 स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव।
चेतन वर्मा, हिसार। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कंडम बिल्डिंग वाले सरकारी स्कूलों की सुध ली है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले जो बच्चे असुरक्षित कमरों में पढ़ रहे हैं अब उन्हें सुरक्षित कक्ष मिलने की उम्मीद जगी है। हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, शिक्षा निदेशालय में प्रधान सचिव विजय दहिया व सीनियर सेकेंडरी निदेशक जितेंद्र दहिया ने जहां इन स्कूलों की सुध नहीं ली थी अब उनकी सुध देश के प्रधानमंत्री ने ली है।
बता दें कि जिम्मेदार केवल कागजी कार्रवाई पूरी कर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं। इन्हें न बच्चों की जान की परवाह है और न ही आने वाले खतरे की चिंता है। जबकि कंडम कमरे मामले में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा सरकार को पत्र जारी कर सरकारी स्कूलों के हालात पर रिपोर्ट मांगी है।
साथ ही स्पष्ट किया है जिन सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग को बने 100 साल या इससे अधिक हो चुके हैं उनकी रिपोर्ट पीएम आफिस को भेजें। रिपोर्ट के आधार पर सख्त कदम उठाएं जाएंगे।
अंडर सेक्रेटरी टू गर्वनमेंट आफ इंडिया गौरव बड़ौला ने ली थी मीटिंग
प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश पर अंडर सेक्रेटरी टू गर्वनमेंट आफ इंडिया गौरव बड़ौला ने देशभर के अधिकारियों की मीटिंग ली थी। इस मीटिंग में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए हर राज्य के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव और निदेशक सहित कई उच्च अधिकारी जुड़े थे। जिसमें देश के उच्च अधिकारी ने समस्त अधिकारियों से उनके राज्यों में सरकारी स्कूलों के हालात पर रिपोर्ट मांगी है।

स्कूल में शौचालय की स्थिति
हिसार जिले के सरकारी स्कूलों के हालात सबसे खराब
जिले में पहली से 12वीं कक्षा तक कुल 847 सरकारी स्कूलों में से 215 में न पानी की टंकी, न शौचालय, न चहारदीवारी और न ही बिजली व्यवस्था है। यहां तक की 12 सरकारी स्कूलों में 22 से अधिक कमरों का टोटा है। जबकि 12 सरकारी स्कूलों में कुल 52 कमरों में से 30 ही बैठने लायक हैं।
55 सरकारी स्कूलों में न चहारदीवारी, 73 स्कूलों में न पीने का पानी की टंकी और न बिजली की व्यवस्था दुरुस्त है। 22 सरकारी स्कूलों में 100 से अधिक लड़के-लड़कियां व दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शौचालय तक नहीं है। जिस कारण बच्चों को खुले में शौच जाने पर शर्मसार होना पड़ रहा है।
यह रिपोर्ट हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा की टेबल पर पहुंच चुकी है लेकिन इन पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
पहली से आठवीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों के हालात बदतर
जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक कुल 606 सरकारी स्कूल हैं। 97 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक नहीं है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में स्वच्छता के हालात कितने बदतर हो सकते हैं। मूलभूत सुविधाएं जिनमें बिजली, पानी, शौचालय व रैंप तक का टोटा ये स्कूल झेल रहे हैं। लेकिन इस मामले में उच्च अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं।

पुरानी इमारत का हाल
खामियों के कारण
- - केवल कागजी कार्रवाई पर जोर देना।
- - कलस्टर हेड व बीईओ की तरफ से समय-समय पर मानिटरिंग न करना।
- - मुख्यालय व जिले के अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी।
- - शिक्षा निदेशालय के प्रधान सचिव व निदेशक में इच्छाशक्ति की कमी।
- - शिक्षा निदेशालय में राज्य परियोजना निदेशक का सरकारी स्कूलों में निरीक्षण न करना।
- - जमीनी स्तर पर बजट न प्राप्त होना व देरी होना।
हमें मुख्यालय से पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय ने हमसे उन सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट मांगी है जिनकी बिल्डिंग को बने 100 व इससे अधिक साल बीत चुके हैं। साथ ही इनकी वर्तमान स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है। हमने समस्त डीईओ को पत्र जारी कर जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।
- जितेंद्र दहिया, सीनियर सेकेंडरी निदेशक, शिक्षा निदेशालय, पंचकूला
