हिसार [वैभव शर्मा] इंसानों में बढ़ते कोरोना के मामलों के बाद अब भारत सरकार पशुओं में कोरोना वायरस पर शोध करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने एक परियोजना तैयार की है, जिसमें देश के ख्याति प्राप्त पशु शोध संस्थानों से जुड़े 18 विज्ञानियों का नेटवर्क बनाया गया है। यह विज्ञानी पशुओं में कोरोना वायरस को डाइग्नोज करेंगे, इसके बाद उसकी वैक्सीन बनाएंगे, फिर उसे पशुओं में देने की प्रक्रिया की जाएगी। इस शोध कार्य में हिसार, भोपाल, बेंगलुरु सहित अन्य स्थानों से विज्ञानी शामिल हो रहे हैं।

यह एक बड़ी परियोजना है, जिसे केंद्र सरकार पालतू पशुओं के लिए विशेष तौर पर तैयार कर रही है। इसमें गाय, भैंस, शूकर, मुर्गियों आदि पशुओं को मुख्य रूप से शामिल किया गया है। परियोजना की पहली स्टेज पार हो गई है, अब अंतिम स्वीकृति के लिए विचार विमर्श चल रहा है।  

कई प्रकार का होता है कोरोना वायरस

मौजूदा समय में कोरोना फैमिली का कोविड-19 वायरस हर दिन इंसानों की जान ले रहा है। कोरोना फैमिली के कई अन्य वायरस भी हैं, जो पशुओं को काफी प्रभावित करते हैं। पशुओं में होने वाले कोरोना वायरस को डाइग्नोज करने और वैक्सीन के स्तर तक ले जाने के लिए विज्ञानियों को काफी मेहनत करनी होगी।

अभी तक देश में पशुओं में नहीं मिला है कोरोना वायरस

सबसे पहले आइसीएआर ने हिसार के राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र सहित उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट््यूट, भोपाल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज को दी थी। मगर अब जांच के लिए और भी संस्थानों का चयन किया गया। जिन संस्थानों का चयन किया गया, वहां अलग-अलग पशुओं पर काम हो रहा है। अभी तक देश में पशुओं में कोरोना वायरस मिलने की किसी राज्य से भी पुष्टि नहीं हुई है।

इससे पहले हिसार के एनआरसीइ के विज्ञानी टाइगर, बिल्ली और भैंस के सैंपल की जांच कर चुके हैं, जो कि नेगेटिव पाए गए थे। जिस प्रकार से इंसानों में कोविड के मामले लाखों में पहुंच चुके हैं, ऐसे में यह संभावना है कि कोविड मरीजों के यहां रहने वाले पालतू पशुओं में भी कोरोना के मामले भी मिल सकते हैं।

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पशुओं में कोरोना वायरस को लेकर परियोजना बना ली है। इसके बनने के बाद भी कई प्रकार की स्वीकृतियां व स्टेज होती हैं। आगे चलकर परियोजना का विस्तृत रूप देखने को मिलेगा।

डा. बीएन त्रिपाठी, उप महानिदेशक, आइसीएआर (पशु विज्ञान), नई दिल्ली

Edited By: Manoj Kumar