विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अब नहीं जलानी पड़ेगी पराली, HAU का बायो डी-कंपोजर खेत में ही गलाएगा पराली; कृषि मेले में किसानों ने जमकर की खरीदारी

Published: Thu, 01 Oct 2026 11:54 PM (IST)

पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने एचएयू बायो डी-कंपोजर पेश किया है।

पराली को जमीन में मिलाएगा एचएयू का बायो डी-कंपोजर।

पराली को जमीन में मिलाएगा एचएयू का बायो डी-कंपोजर।

HighLights

  1. हकृवि ने पराली प्रबंधन के लिए एचएयू बायो डी-कंपोजर पेश किया

  2. यह जैविक घोल पराली को खेत में ही विघटित करने में सहायक है

  3. मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता, प्रदूषण घटाता और पोषक तत्व लौटाता है

जागरण संवाददाता, हिसार। धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली किसानों के लिए हर साल बड़ी चुनौती बनती है। प्राकृतिक रूप से पराली के अपघटन में समय लगने के कारण अगली फसल की तैयारी प्रभावित होती है और कई किसान जल्दबाजी में पराली जला देते हैं।

इससे वायु प्रदूषण के साथ मिट्टी के जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने पराली प्रबंधन का जैविक विकल्प सुझाया है।

विश्वविद्यालय के अनुसार एचएयू बायो डी-कंपोजर के प्रयोग से पराली को खेत में ही जैविक रूप से विघटित करने में मदद मिल सकती है। इसे कृषि मेले में पहली बार रखा गया। किसानों ने इसकी जमकर खरीदारी की है। बायो डी-कंपोजर के मिट्टी में मिलने के बाद वह मिट्टी को बचाने के साथ उसकी उर्वरता को भी बढ़ाएगा।

विश्वविद्यालय ने कृषि मेले में किसानों को बताया कि बायो-डी-कंपोजर में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव फसल अवशेषों के जैविक अपघटन में सहायता करते हैं। इससे पराली को जलाने के बजाय खेत में ही मिट्टी में मिलाकर उसका उपयोग किया जा सकता है। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद मिलती है तथा मिट्टी की जैविक गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

ऐसे तैयार करें पराली के लिए घोल

हकृवि के अनुसार एक एकड़ पराली के लिए एक लीटर एचएयू बायो-डी-कंपोजर को पांच लीटर पानी में मिलाएं। इसमें 100 ग्राम यूरिया, 100 ग्राम चूना, 250 ग्राम गुड़ और 100 ग्राम बेसन मिलाया जाता है।

मिश्रण को अच्छी तरह मिलाने के बाद ढ़ककर सामान्य तापमान पर 48 से 72 घंटे के लिए रखा जाता है। तैयार घोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर पराली पर समान रूप से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। छिड़काव के बाद कृषि यंत्रों की मदद से पराली को खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।

हकृवि के अनुसार अपघटन के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना लाभकारी है। आगामी फसल में नाइट्रोजन की मात्रा विश्वविद्यालय की सिफारिश के अनुसार देने की सलाह दी गई है।

यह सावधानियां भी रखें किसान

  • छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करें। घोल तैयार करते समय दस्ताने एवं मास्क का प्रयोग करें।
  • छिड़काव के दौरान आंखों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा चश्मे का उपयोग करें।
  • बायो डी-कंपोजर को सीधी धूप एवं अत्यधिक गर्मी से दूर, ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।