हिसार [मनोज कौशिक]। दिन पांच दिसबंर 2017, वक्‍त रात करीब आठ बजे। वो अकेली थी और घर जाने के लिए हिसार बस स्‍टैंड पर वाहन का इंतजार कर रही थी। एक ऑटोरिक्‍शा चालक आकर रुका। एक बार तो उसने कदम पीछे खींचे मगर देर होती देख वह ऑटोरिक्‍शा में सवार हो गई। ऑटोरिक्‍शा में सात से आठ सवांरिया थी। दिल्‍ली रोड स्थित एक कॉलोनी में जाने के लिए ऑटोरिक्‍शा में बैठी वह युवती उस वक्‍त अंदर ही अंदर घबरा गई जब एक-एक करके महिला सवारी विद्युत नगर तक उतर गईं।

ऑटोरिक्‍शा चल रहा था और उसमें चालक समेत तीन युवक सवार थे। शुरुआत में कुछ अटपटा नहीं लगा मगर फिर युवती ने हालात भांपते हुए ऑटोरिक्‍शा रोकने को कहा। मगर तब तक देर हो चुकी थी। इंसान के रूप में हैवान बने युवकों ने युवती को चलते ऑटो में ही एक-एक कर हवस का शिकार बनाया और आखिर में कैंट एरिया के पास फेंक वहां से भाग निकले। ये कहानी है हिसार की निर्भया की जिसे न्‍याय तो मिला, मगर आज भी वो घटना उसकी आंखों के सामने घूमती रहती है।

मगर ये लड़ाई इतनी आसान नहीं थी। 27 वर्षीय युवती विवाहित थी और भाग्‍यवंश वह जिंदा भी रही। सवाल था जब पति को इस अनहोनी का पता लगेता तो क्‍या होगा। तीन बच्‍चों का भी रह रहकर ख्‍याल आ रहा था। मगर जब पति को महिला ने आपबीती सुनाई तो पति ने हाथ पीछे खींचने की बजाय पत्‍नी संग रह दोषियों को सजा दिलाने के लिए लड़ाई लड़ने की ठानी। तीनों दुष्‍कर्मी पकड़े गए और आखिरकार 6 अगस्‍त 2018 को न्‍याय का दिन आया और 12 क्‍वार्टर निवासी ऋषि, सैनियान मोहाल्‍ला निवासी सचिन व झीडी निवासी निखिल तीन दरिंदों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

निर्भया से दरिंदगी करने वालों को भी आखिरकार सात साल तीन महीने बाद फांसी पर लटका दिया गया। मगर हिसार की निर्भया की तरह ही दिल्‍ली की निर्भया को भी न्‍याय यूं ही नहीं मिला, उनकी मां ने जिस तरह से समाज के सामने आ इस लड़ाई को लड़ा वो काबीले तारीफ था।

निर्भया की मां ने दोषियों को फांसी होने के बाद कहा कि जब वह सुबह घर आई तो निर्भया की फोटो को चूमा और कहा कि आज तुझे इंसाफ मिल गया है। निर्भया की मां ने कहा कि लोग दुष्‍कर्म पीडि़ताओं का साथ नहीं देते हैं, अपनी पहचान छुपाते हैं। मगर मैनें ऐसा नहीं किया, मैं दुनिया के सामने आई और निर्भया के लिए न्‍याय की लड़ाई लड़ी। आज निर्भया दुनिया में नहीं है मगर मुझे गर्व है कि वो मेरी बेटी थी। ठीक ऐसा ही उदाहरण हिसार में पीडि़ता के पति ने भी पेश किया था। वे पूरी तरह से दुनिया के सामने तो नहीं आए मगर उन्‍होंने अपनी पत्‍नी का साथ देने की ठानी थी।

हिसार में भी एक ऐसा ही निर्भया कांड पांच दिसंबर 2017 को हुआ। चलते ऑटो में तीन दरिंदे विवाहिता की आबरू को कचोटते रहे और आखिर में सुनसान जगह पर फेंक कर चले गए। घर पहुंच जब पीडि़ता ने अपने पति को जब आपबीती बताई तो उन्‍होंने समाज में बेइज्‍जती के डर से खुद को पर्दे के पीछे न छुपाकर लड़ाई लड़ने का मन बनाया।

पत्‍नी को दोषी न मानकर उसके साथ चल दोषियों को कानून के फंदे तक पहुंचाने की ठानी, आखिरकार 6 अगस्‍त 2018 को निर्भया को न्‍याय मिला और दोषियों को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा मिली। अगर पीडि़ता के पति साथ खड़े न होते तो शायद ही ऐसा हो पाता। मगर राहगीर समझ ऑटोरिक्‍शा में बैठने वाली विवाहिता को जरा सा भी अंदाज नहीं था कि उसके साथ निर्भया की तरह ही वारदात की जाएगी। ठीक उसी तरह जैसे निर्भया मदद समझ बस में बैठ गई थी और दरिंदों के गलत इरादों को नहीं समझा।

बता दें कि दिल्ली रोड स्थित कॉलोनी में रहने वाली 27 वर्षीय पीडि़त महिला बरवाला स्थित एक दुकान में काम करती थी। रोजाना घर से दुकान पर आती-जाती थी पांच दिसंबर को रात करीब साढ़े सात बजे वह बस में सवार होकर बरवाला से हिसार बस स्टैंड पहुंची थी। यहां से रात आठ बजे अपने घर जाने के लिए ऑटो में सवार हुई थी, जिसमें उसके अलावा सात-आठ और सवारियां भी बैठी थीं।

एक-एक करके अधिकांश सवारी विद्युत नगर के पास उतर गईं। तब सवारी के तौर पर महिला अकेली ही रह गई, जबकि चालक के अलावा उसके दो साथी भी ऑटो में बैठे रहे। इसी बीच चालक ने तुरंत दूसरे साथी को हैंडल थमा दिया और खुद पीछे आकर बैठ गया। वहां से कैंट की तरफ चल दिए।

तभी एक ने महिला का मुंह दबा लिया और उसका मोबाइल फोन छीन लिया। फिर पैर पकड़ लिए और चालक ने उसके साथ चलते ऑटो में दुष्कर्म किया। जब टोल के पास पहुंच गए तो वहां से ऑटो वापस घुमाकर उसे जान से मारने की धमकी देकर कैंट पुल के पास छोड़ गए। जाते वक्त उसका मोबाइल, पर्स आदि सामान दे गए।

पति कर रहा था इंतजार

पीडि़त के अनुसार उसका पति रोजाना कैंट पुल के पास उसके आने का इंतजार करता था। वारदात की रात वह उसके आने का इंतजार कर रहा था। वह अपने पति के पास पहुंची और बिलख पड़ी। उसने अपने साथ ऑटो में हुए घिनौने कांड से अवगत करवाया।

 

Posted By: Manoj Kumar

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