रोहतक, जेएनएन। एक बार कोई नेता विधायक या सांसद का चुनाव जीत जाए तो सेवा के दौरान वेतन और बाद में पूरे जीवन पेंशन मिलती है। वहीं पद पर रहते हुए वेतन के अलावा कई तरह के भत्‍ते व मकान गाड़ी जैसी सुविधाएं मिलती है। विरले ही ऐसे नेता होते हैं तो जो वेतन ना लें, यहां तक की कुछ नेता तो अपने भत्‍ते तक नहीं छोड़ते। मगर हरियाणा के रोहतक जिले में मेयर इन सब बातों से इत्‍फाक नहीं रखते हैं। उन्‍होंने पद पर बने रहने तक वेतन तो छोड़ो किसी भी तरह की अन्‍य सुविधा को लेने से इन्‍कार किया है।

इतना ही नहीं उन्‍होंने उनके खाते में आया तीन माह का वेतन भी सरकार को लौटा दिया है। मेयर मनमोहन गोयल का कहना है कि जनता की सेवा के लिए वेतन की जरूरत नहीं है। दूसरा जब उनके पास पहले से गाड़ी है तो सरकार से गाड़ी लेकर पैसे का दुष्‍प्रयोग करना कहां तक सही है। ऐसे में उनका ये अनोखा फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।

बता दें कि पदस्‍थ होने पर नगर निगम मेयर मनमोहन गोयल ने मानदेय व दूसरी सरकारी सुविधाएं लेने से इन्कार कर दिया था। इसके बावजूद भी मेयर के खाते में मासिक मानदेय 20500 रुपये के हिसाब से अभी तक 61500 रुपये जमा कराए गए। सरकार ने यह रकम जमा कराई थी। संबंधित रकम को लेने से इन्कार करते हुए मेयर ने बैंक के माध्यम से रकम ही लौटा दी। नगर निगम के आयुक्त को भी चिट्ठी लिख दी है कि भविष्य में भी संबंधित रकम मेरे खाते में न डाली जाए।

नगर निगम के चुनाव बीते साल दिसंबर में हुए थे। इसी साल जनवरी में शपथ ग्रहण समारोह हुआ था। मेयर मनमोहन गोयल ने कहा मैंने पहले ही मासिक मानदेय, वाहन भत्ता आदि सरकारी सुविधाएं लेने से इन्कार कर दिया था। फिर भी मेरे खाते में मासिक मानदेय भेज दिया गया। मैंने भविष्य में यह न लेने का अनुरोध किया है।

 

Posted By: manoj kumar