हिसार, जेएनएन। कोरोना से लड़ाई में मुर्गियों का फार्म चलाने वाले संचालकों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि दुकानें खुल नहीं रही हैं और माल कोई ले नहीं रहा है। ऐसे में फार्मों में मुर्गियों को फास्टिंग या व्रत कराया जा रहा है। फार्म संचालक बताते हैं कि यह वो प्रक्रिया होती है जिसमें मुर्गियों को सिर्फ उतना ही दाना (दाने में मक्का, बाजरा, सोयाबीन, चावल की छिलके) दिया जाता है जितने पर वह जीवित रह सकें।

ऐसा करने के पीछे मुर्गियों को अंडा देने से रोकना है। जिससे नुकसान को कम किया जा सके। जिन संचालकों के पास दाने का प्रबंध है वह अपने यहां इसी प्रक्रिया को अपना रहे हैं। हिसार की पोल्ट्री फार्म एसोसिशन से लांबा हेचरी के संचालक अर्जुन लांबा बताते हैं कि हिसार, जींद, पानीपत, कुरुक्षेत्र व गुरुग्राम में ऐसे कई ब्रायलर फार्म हैं जो अपने यहां मुर्गियों व चूजों को व्रत की प्रक्रिया करा रहे हैं। सामान्य तौर पर मुर्गियों को 160 ग्राम फीड दिया जाता है मगर अब 100 ग्राम ही फीड दे रहे हैं।

कम फीड देने से क्या पड़ेगा मुर्गियों पर असर

पोल्ट्री संचालकों की मानें तो कम फीड देने से मुर्गियों का वजन भी नहीं बढ़ेगा और उनका प्रोडक्शन भी धीमा होगा। एक मुर्गी 27 घंटे की साइकिल में अंडा देती है मगर फास्टिंग प्रक्रिया के माध्यम से मुर्गी का अंडा बनता ही नहीं है। ऐसे में अंडा बनेगा नहीं तो बिकेगा भी नहीं और फार्म संचालकों को मुर्गियां और अपना व्यापार बचाने में मदद मिलेगी।

----फार्म संचालक बताते हैं कि अगर लॉकडाउन अवधि आगे बढ़ाई गई तो मुर्गियों को फीड खिलाना मुश्किल होगा और न चाहते हुए भी मुर्गियों को मारना होगा। पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन की मानें तो प्रदेश में हजारों टन मुर्गियों को फार्म मालिक मार कर जमीन में जेसीबी की मदद के साथ दफना भी चुके हैं।

लॉकडाउन के 12 दिनों में मार्केट की स्थिति

लॉकडाउन के 12 दिन बीत गए हैं, ऐसे में प्रदेश में अलग-अलग जिले में करीब 120 हेचरी फार्म ऐसे हैं जिनका माल तैयार है मगर बाजार में दुकानें बंद होने के कारण और खपत न होने के बाद आगे जा नहीं पा रहा है। पिछले दिनों हरियाणा के विभिन्न फार्मों से माल 10 रुपये कीमत में दिल्ली की मंडी में बेचने को मजबूर होना पड़ा। जिसके बाद जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुचारू की गई तो अब रेट में उछाल आया, मगर अब फिर गिरावट दर्ज की जा रही है। अभी मुर्गे 30 से 40 रुपये किलोग्राम तो अंडे एक रुपये से डेढ़ रुपये तक के रेट में मौजूद हैं।

----हम लगातार पोल्ट्री फार्म के संगठनों से संपर्क में हैं। हमने उन्हें कहा है कि अगर फीड लाने ले जाने में दिक्कत आए तो बताएं। लॉकडाउन में मार्केटिंग न होने की वजह से इस उद्योग ठप पड़ गया है।

- डा. सुरेंद्र गहलावत, प्रभारी उप निदेशक, पशुपालन विभाग

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Posted By: Manoj Kumar

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