हिसार, जागरण संवाददाता। हिसार की उपायुक्त डा. प्रियंका सोनी ने अपनी ज्वाइनिंग के पहले दिन ही कहा था कि हर आईएएस अधिकारी एक विजन को लेकर नई नियुक्ति पर जाता है। हिसार में उनकी नियुक्ति पर वह महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष रुप से काम करेंगी। हुआ भी ऐसा ही, डीसी ने दो अभियान चलाए। जिसमें एक अभियान में हिसार में ऐसे बुजुर्गों का सर्वे कराया जिनके पास किसी का सहारा नहीं है, कोई उन्हें दवा देने वाला नहीं है और उन्हें उनके घर वालों से ही डर है। ऐसे बुजुर्गों को अब वह सरकारी विभागों से सहायता दिला रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने बेटियों के लिए नो योर हीमोग्लोबिन नाम से अभियान चलाया। जिसमें महिलाओं ने जगह-जगह अपने रक्त की जांच करा के हीमोग्लोबिन की जानकारी ली। फिर उन्हें अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए मेडिकल उपचार भी निशुल्क दिलाया। इन दोनों कार्यों के लिए उन्होंने राज्य सरकार ने पुरस्कृत भी किया है।

दोनों अभियानों को शुरु करने का क्या था उद्देश्य, केयरवैल प्रोजेक्ट से वरिष्ठजनों को पहुंची सहायता 

केयरवेल प्रोजेक्ट में वरिष्ठजनों की मदद के लिए पहले सर्वे किया गया ताकि जरूरतमंद बुजुर्गों को खोजा जाए। यह सर्वे जिले के 1 लाख 27 हजार 576 वरिष्ठ नागरिकों का होना है। जिसमें सक्षम युवाओं द्वारा अब तक किए सर्वे में जिले के करीब 15000 वरिष्ठजन ऐसे मिले हैं जिन्हें मदद की दरकार है। इन्हें पुलिस सहायता, पेंशन, दवा आदि सुविधाएं देने के लिए सरकारी विभागों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। केयरवेल प्रोजेक्ट में जिले के वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवानी हैं।

वरिष्ठ जनों की पेंशन संबंधी कार्य पूरे किए जाएंगे

डीसी डा प्रियंका सोनी खुद द्वारा संबंधित विभागाध्यक्षों के साथ प्रत्येक साप्ताहिक बैठक लेती हैं। इस प्रोजेक्ट में जिला रेडक्रास सोसायटी प्रोजेक्ट के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। जिसमें छड़ी-लाठी, चश्मा, कान की मशीन, व्हील चेयर, ट्राईसाइकिल आदि शामिल है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा संबंधी कार्य तथा सामाजिकता न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा वरिष्ठ जनों की पेंशन संबंधी कार्य पूरे किए जाएंगे। पुलिस विभाग द्वारा पारिवारिक समस्याओं का निदान किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों को राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ सक्षम युवाओं के माध्यम से उनके घर द्वार पर ही दिया जाएगा।

शहर में 89 फीसद महिलाओं और बच्चों में एनीमिया के लक्षण

प्रदेश में पहली बार हिसार में पायलट के रूप से नो योर हीमोग्लोबिन अभियान उपायुक्त डा. प्रियंका सोनी ने शुरू कराया। जिससे कि पता चले कि महिलाओं का स्वास्थ्य कैसा है। हीमोग्लाबिन की कमी एनीमिया जैसी समस्या को उत्पन्न करती है। एनीमिया के कारण कई दूसरी बीमारियां भी चपेट में ले सकती हैं। इस अभियान में चिकित्सकीय सलाह व दवाएं भी दी जा रही है। अभियान के तहत शहर के विभिन्न स्थानों पर महिलाओं व बच्चियों के लिए शिविर लगाकर उनके रक्त की जांच की गई।

एनीमिया के लक्षण पाए गए

इस सर्वे में सामने आया कि जांच किए मामलों में से करीब 74 फीसद महिलाओं व बच्चों में एनीमिया के लक्षण पाए गए। इसके साथ ही कुछ महिलाओं में तो एनीमिया के गंभीर लक्षण थे। ऐसे में इन महिलाओं व बच्चियों का उपचार किया गया। उन्हें डाइट चार्ट व दवा की निशुल्क सुविधा मुहैया कराई गई। इसको लेकर उपायुक्त डा. सोनी बताती हैं कि पहली बार यह अभियान चलाया गया, क्योंकि महिलाएं अक्सर घर पर सभी की देखभाल करते हुए खुद के स्वास्थ्य को भूल जाती हैं। इसी साेच के साथ हमें एक आंकड़ा मिला है जिसमें बड़ी मात्रा में एनीमिया केस मिले हैं। इन महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए हम कार्य कर रहे हैं।

Edited By: Naveen Dalal