जागरण संवाददाता, हिसार। 25 करोड़ रुपये की लागत से बने हिसार-सादलपुर रेलवे लाइन पर सेक्टर 16-17 के समीप बनाया गया डबल लेन आरओबी की सीढ़ियों पर निर्माण के दौरान वीरवार को बड़ा हादसा हो गया जिसमें कर्मचारियों की जान जाते जाते बची। दरअसल देर सायं आठ बजे आरओबी के पास निर्माणाधीन सीढ़ियों का कंकरीट से बना हिस्सा (स्टेयर पार्ट) हटाने का कार्य किया जा रहा था। इस कार्य को एक हाइड्रा क्रेन की मदद से किया जा रहा था और सीढ़ियों का कंकरीट से बना हिस्से के पास तीन श्रमिक ऊपर इस कार्य को संभाल रहे थे। तभी क्रेन की बेल्ट (हुपर वायर) टूट गई और पांच टन का इस लैंटर का वजन क्रेन पर आ गया, जिससे निर्माणाधीन स्टेयर पार्ट आदि सामग्री सभी दूसरी सीढ़ियों को तोड़ती हुई क्रेन के ऊपर आ गिरी और वजन से क्रेन भी पलट गई। जिस समय यह हादसा हुआ ठीक उसी समय तीन श्रमिक ऊपर थे उन्होंने कूदकर अपनी जान बचाई। हादसा इतना भयंकर था कि आसपास देखने वाले लोग बताते हैं कि तोप के गोले की तरह यह सिस्टम कोलेप्स हुआ। सीढ़ियों का कंकरीट से बना हिस्सा के पास खड़े श्रमिक कूदने के बाद अपने उपचार के लिए चले गए। मगर इस हादसे ने सनसनी फैला दी।
क्रेन से मुश्किल से निकाला गया ड्राइवर
जैसे ही सीढियों की निर्माण सामग्री क्रेन के ऊपर गिरी तो वजन से क्रेन पलट गई और निमार्ण सामग्री क्रेन के ऊपर ही रह गई। इस हादसे में क्रेन से चालक वीरभान बाहर जा गिरा और उसकी जान बच गई। लिहाजा आसपास खड़े लोगों ने ड्राइवर वीरभान को उठाया और चोटों की जानकारी ली। वीरभान के कुछ चोटें आईं हैं मगर सभी इस हादसे में सुरक्षित हैं।
अभी कुछ दिन पहले ही शुरू हुआ था पुल
25 करोड़ रुपये की लागत से बने आरओबी को अभी कुछ समय पहले ही शुरु किया गया था। पुल को शुरू करने के बाद लोगों को एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए सीढ़ियां बनाई जा रही थीं। हालांकि इन सीढ़ियाें को अभी तक पुल से जोड़ा नहीं गया था। गिरने वाला निर्माणाधीन हिस्सा अलग से बनाया जा रहा था। जो हिस्सा गिरा है उसमें लगभग 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
तोप के गोले जितना लगा फोर्स, चारों खंबों को भी भारी नुकसान : एक्सपर्ट
इस लैंटर को सहारा देने के लिए चार कंकरीट के खंबे लगे हुए थे, जैसे ही सीढ़ियों का हिस्सा (स्टेयर पार्ट) गिरा खंबे भी गिरने लगे। हालांकि खंबे पूरी तरफ से नहीं गिर पाए मगर इसमें भी काफी नुकसान हुआ है। पीडब्ल्यूडी से एक इंजीनियर बताते हैं कि यह एक प्रकार से मशीनरी फेलियर है। सीढ़ियों का हिस्सा (स्टेयर पार्ट) का भार लगभग पांच टन होगा, वह जैसे ही गिरा तो उसका वहन क्रेन भी नहीं संभाल सकती थी क्योंकि क्रेन का आगे का हिस्सा भी लगभग इतने ही भार का होता है। ऐसे में दोगुना भार होने की वजह से इन पर एक तोप के गोले जितना फोर्स यानि बल लगा होगा। यही कारण है कि क्रेन भी पलट गई।
सेक्टर 16-17 आरयूबी से जुड़ी कुछ जानकारियां
निर्माण लागत- 25 करोड़ रुपये
निर्माण समय- लगभग तीन वर्ष
निर्माता विभाग- पीडब्ल्यूडी प्रोमिशनल डिविजन - 1
विभागीय अधिकारी- एक्सईएन विशाल
निर्माण एजेंसी- महता कंस्ट्रक्शन, करनाल
शैटरिंग हटाते समय हुआ हादसा
क्रेन के चालक वीरभान ने बताया कि मैं शैटरिंग हटा रहा था इसी दौरान हाइड्रा क्रेन में कुछ तकनीकि खराबी आई या अन्य कोई कारण रहा । जब तक मैं यह समझ पाता तब तक कंकरीट की सीढ़ियां ढह गई। जिससे मेरी क्रेन का आगे का हिस्सा तेजी से नीचे गया और पिछला हिस्सा पलट गया। इस दौरान पूरा मलवा मेरी क्रेन के ऊपर आ गिरा। हादसा इतना बड़ा था कि मैं क्रेन पलटने के कारण बाहर जा कर गिरा। मुझे चोटें भी आईं हैं।
हाइड्रा वायर टूटी
मेहता कंस्ट्रक्शन के संचालक आरओबी के पास सीढ़ियों को बनाने का काम चल रहा था। तभी हाइड्रा की वायर टूटने से सीढ़ियों तोड़ते ही नीचे क्रेन पर आ गिरी। जानमान का नुकसान होने से बच गया। इसमें हमें 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है हम इस पार्ट को दोबारा बनाएंगे। वहीं एक्सईएन विशाल कुमार ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के नजरिए में इसे मेकेनिकल फेलियर कहा जाता है। हाइड्रा की बेल्ट टूटने से यह हादसा हुआ। एजेंसी को दोबारा निर्माण के निर्देश दिए हैं।

Edited By: Rajesh Kumar