जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़: एक साल पहले संसद में लागू किए गए तीन कृषि कानूनों काे वापस लेने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही कर दी हो लेकिन आंदोलनकारी अब अपनी सभी मांगों को पूरा कराने पर अड़ गए हैं। शनिवार को सिंघु बार्डर पर बैठक करके लिए गए फैसले के बाद 26 जनवरी के बाद फिर से ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। 29 नवंबर को दिल्ली में संसद भवन तक ट्रैक्टर मार्च की तैयारी शुरू की गई हैं। टीकरी बार्डर पर भी संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय के बाद ट्रैक्टर मार्च की तैयारियां की जा रही हैं।

इस मार्च को सफल बनाने के लिए किसान नेता अपनी-अपनी जत्थेबंदियों से बार्डरों पर ट्रैक्टर-ट्रालियों समेत किसानों को बुलाने का आह्वान किया जा रहा है, मगर जिस तरीके से बार्डरों पर आह्वान के बाद भी भीड़ न बढ़ने से किसान नेता चिंतित भी हैं। मोर्चा के आह्वान पर टोल फ्री ही रहेंगे। 26 नवंबर को पहली वर्षगांठ पर विरोध प्रदर्शनों के साथ-साथ राजधानियों में ट्रैक्टर और बैलगाड़ी परेड निकाली जाएंगी।

28 तारीख को 100 से अधिक संगठनों के साथ संयुक्त शेतकारी कामगार मोर्चा के बैनर तले मुंबई के आजाद मैदान में किसान-मजदूर महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। 29 नवंबर से प्रतिदिन 500 प्रदर्शनकारियों का ट्रैक्टर-ट्रालियों में संसद तक शांतिपूर्ण और अनुशासित मार्च योजनानुसार निकाला जाएगा। शांतिपूर्ण मार्च निकाले जाने का दावा किसान नेता कर रहे हैं लेकिन 26 जनवरी की तरह इस मार्च में भी उपद्रव होने की आशंका दिल्ली पुलिस को है।

ऐसे में दिल्ली पुलिस की ओर से भी ट्रैक्टर मार्च को लेकर अभी से ही तैयारियां शुरू की गई हैं। सुरक्षा के प्रबंध बढ़ाए जा रहे हैं। उधर, किसान नेता अब कह रहे हैं कि संसद में तीनों कृषि कानून रद करने, एमएसपी पर कानून बनाने, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेेने समेत अन्य मांगें पूरी होने का उनका आंदोलन जारी रहेगा।

Edited By: Manoj Kumar