जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ : तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन के बीच नेशनल हाइवे-नौ 15 किलोमीटर तक बदहाल हो चुका है। टीकरी बार्डर से लेकर बहादुरगढ़ बाईपास के आखिरी छोर तक आंदोलनकारियों के तंबू हैं। जाखौदा गांव के मोड़ से लेकर बालौर चौक तो बाईपास की एक लेन खाली है। लेकिन उससे आगे बहादुरगढ़ के सेक्टर-नौ मोड़ तक हाइवे की दोनों तरफ की लेन पर आंदोलनकारियों का कब्जा है। यहां पर सर्विस लेन तो खाली हैं, मगर इन पर वाहनों की आवाजाही के कारण बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं।

हालात ऐसे हैं कि इन गड्ढों में बड़े-बड़े वाहन फंस रहे हैं। अगर जल्दी ही इन सड़कों की मरम्मत न हुई तो यहां से छोटे वाहनों के लिए भी रास्ता नहीं मिल पाएगा। यही हाल गंदगी का है। जब इतनी दूर तक तंबू है और उनमें आंदोलनकारी रह रहे हैं तो जाहिर सी बात है कि इन तंबुओं से कूड़ा-कर्कट भी खूब निकल रहा है। पिछले 10 माह से यह कूड़ा हाइवे के पास ही नालों के अंदर और खाली जमीन पर जमा हो रहा है। शहर की सीमा तक तो नप प्रशासन की ओर से सफाई भी करवाई गई, लेकिन बाकी हिस्से में सफाई की भी व्यवस्था नहीं।

यह अलग बात है कि शहर के हिस्से में भी आंदोलनकारियों द्वारा नगर परिषद प्रशासन की ओर से सफाई न करवाए जाने का आरोप लगाकर बार-बार एसडीएम कार्यालय में पत्र देकर सफाई की मांंग की जा रही है। कुछ जगहों पर नालों में भरी गंदगी की खुद आंदोलनकारियों द्वारा सफाई की गई है, लेकिन प्रशासन का तर्क है कि आंदोलन स्थल पर नियमित रूप से सफाई की गई है। पानी भी पहुंचाया जा रहा है। मच्छरों से बचाव के लिए फोगिंग भी करवाई गई है। आंदोलनस्‍थल के पास आवारा पशुओं की संख्‍या भी ज्‍यादा है और एक किसान पर भी हमला हाे चुका है।

 

Edited By: Manoj Kumar