जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़: भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहा के प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह उगराहा ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बार्डरों पर चल रहे आंदोलन के खत्म होने के संकेत दिए हैं। बहादुरगढ़ में उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी हमारी बड़ी जीत है। हम इसी नारे के साथ यहां आए थे कि कानून वापसी तभी होगी घर वापसी। मगर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनवाना भी हमारी बड़ी मांग है। इसके अलावा कुछ अन्य मांगें भी आंदोलन के दौरान जुड़ी हैं। इन मांगों को लेकर भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी। मगर इन मांगों को पूरा कराने के लिए आंदोलन की दिशा व स्वरूप कोई दूसरा हो सकता है। इन मांगों के लिए आंदोलन का स्वरूप कैसा होगा, उस पर 27 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। इसी बैठक में 29 नवंबर को संसद भवन तक ट्रैक्टर मार्च निकालने काे लेकर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में जो भी फैसला होगा, उसे हर हाल में लागू किया जाएगा।

जोगेंद्र उगराहा ने बताया कि 26 नवंबर को आंदोलन की वर्षगांठ बनाई जा रही है। हमारी लड़ाई तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की थी। यहीं बात हम शुक्रवार को पकौड़ा चौक पर बुलाई गई महापंचायत में किसानों को समझाएंगे। उन्हें बताया जाएगा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी होने से उनकी बड़ी जीत हुई है। ऐसे में एमएसपी समेत अन्य मांगों को पूरा करवाने के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी, मगर यह जरूरी नहीं कि हम दिल्ली बार्डरों पर बैठकर ही आंदोलन करें। सरकार के खिलाफ इन मांगों को पूरा करवाने के लिए आंदोलन दूसरे तरीके से भी किया जा सकता है। आंदोलन का रूप अलग हो सकता है। इस संबंध में फैसला 27 नवंबर को सिंघु बार्डर पर होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में लिया जाएगा।

एमएसपी बड़ी मांग, सरकार के लिए लागू करना भी होगा मुश्किल, मगर हम लड़ाई जरूर लड़ेंगे:

पंजाब की सबसे बड़ी जत्थेबंदी भाकियू उगराहा के मुखिया जोगेंद्र सिंह उगराहा ने बताया कि एमएसपी एक बड़ी मांग है। यह तीनों कृषि कानूनों से भी बड़ी है। हम इस मांग को छोड़ नहीं सकते। हमें पता है कि सरकार इस मांग को जल्द पूरी नहीं कर सकती। हम खेती को फायदे वाली बनाना चाहते हैं। वह एमएसपी के लागू होने से ही संभव है। अब सरकार सोचे कि अगर एमएसपी लागू नहीं करना है तो खेती को फायदेमंद कैसे बनाए। अगर सरकार हमसे पूछेगी तो हम उन्हें सुझाव दे देंगे। बिना एमएसपी लागू किए खेती को फायदे वाली बनाने के सवाल पर जोगेंद्र उगराहा ने बताया कि अगर एमएसपी लागू नहीं होता है तो सरकार किसानों को खाद, बीज, डीजल आदि इनपुट सस्ते दामों पर मुहैया करवाए। लागत कम होगी तो खेती मुनाफे वाली ही होगी।

किसानों की मांगों पर आमने-सामने बैठकर बातचीत करे सरकार, तब निकलेगा हल:

जोगेंद्र सिंह उगराहा ने बताया कि सरकार किसानों से बिना बातचीत किए इस मसले का हल निकालना चाह रही है। मगर यह संभव नहीं है। हमने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, जिसका अब तक कोई जवाब नहीं आया है। एमएसपी समेत अन्य मांगों को लेकर सरकार आमने-सामने बैठकर बातचीत करे, तब इस पूरे मसले का हल निकल जाएगा। हम तीनों कृषि कानूनों की वापसी से खुश हैं। अन्य मांगों को लेकर लड़ाई जारी रखेंगे, मगर आंदोलन का रूप कोई भी हो सकता है।

Edited By: Manoj Kumar