- रोहतक संग सोनीपत और झज्जर की खापों की हुई बैठक

- बोले खाप पदाधिकारी- खापों को किया जा रहा है बदनाम

जागरण संवाददाता, हिसार : दो वयस्कों की शादी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए फैसले पर खापों ने असंतोष जताया। मंगलवार को रोहतक सनसिटी में हुई रोहतक, सोनीपत और झज्जर की खापों की बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि खाप हमेशा समाज को जोड़ने का काम करती है। इस तरह के मामलों में बिना वजह खापों को बदनाम किया जा रहा है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

रोहतक, सोनीपत और झज्जर खाप संयोजक महेंद्र ¨सह नांदल की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि दो वयस्कों की शादी में किसी भी तरह का दखल नहीं होना चाहिए। इस फैसले से खापों को आपत्ति नहीं है, लेकिन इसमें खाप पंचायतों का नाम भी जोड़ दिया गया। खाप समाज को जोड़ने का काम करती है। इस तरह के मामलों में खाप की गरिमा पर सवाल उठाया गया है, जो गलत है। दो वयस्क शादी कर सकते हैं, लेकिन यदि आपस में भाई-बहन लगने वाले ही ऐसा करेंगे तो समाज कहां जाएगा। इस फैसले से खाप अंसतुष्ट है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। इस मौके पर पूर्व प्रधान धर्मपाल हुड्डा, सुरेश देशवाल, डॉ. सुरेश नांदल, कादियान खाप प्रधान केदार ¨सह कादियान, प्रधान सुरेंद्र दहिया, प्रकाश बुधवार और राजेंद्र ¨सह आदि मौजूद रहे।

--------- अंतरजातीय विवाह पर आपत्ति नहीं, एक गांव और गोत्र पर विवाद

जागरण संवाददाता, हिसार : सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में दो वयस्क की शादी पर हस्तक्षेप न करने का फैसला दिया है। अधिकतर पंचायत व खाप प्रतिनिधि अंतरजातीय विवाह से सहमति जताते हैं पर एक गांव व एक गोत्र में शादी पर उन्हें आपत्ति है। खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सामाजिक मान्यताओं पर भी ध्यान देना चाहिए था।

कोर्ट ने दो वयस्कों की शादी होने के बाद किसी तरह के दखल को गैर कानूनी करार दिया है। उनकी सुरक्षा को लेकर भी कोर्ट ने आदेश दिए है। हरियाणा में कई खापों पर गंभीर आरोप लगे हैं। बालिग को शादी के बाद अलग करने के आरोप लगे। इस पर खापों ने स्पष्ट किया कि सामाजिक रूप से जो उनको संस्कार मिले हैं कि एक गांव व गोत्र में विवाह नहीं हो सकता। बाक्स..

दो बालिग एक गांव और एक गौत्र के नहीं होने चाहिए। जो हमारे बुजुर्ग संस्कार देकर गए हैं हमें उन सब संस्कारों पर ही चलना चाहिए। कोर्ट का जो फैसला है वह मान्य है।

- रामनिवास लोहान, प्रधान, सतरोल खाप -----

कोर्ट जनता के लिए है। सामाजिक ताने-बाने को बिखेरने वाला फैसला आमजन का मान्य नहीं हो सकता। हमारा विरोध केवल एक गांव और एक गोत्र में शादी तक ही सीमित है।

- सुरेश कौथ, प्रधान, बारह खाप।

Posted By: Jagran

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