जागरण संवाददाता, झज्जर। सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं। कामिका एकादशी व्रत में पूरे दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। यह बात सिद्ध श्री 108 बाबा कांशीगिरि जी महाराज मन्दिर के पंडित पवन कौशिक ने कही। 

इस बार कामिका एकादशी व्रत बुधवार को रखा जाएगा। एकादशी में श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु का पूजन करना भक्तों को विशेष फल देता है। भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, लेकिन पूजा पाठ जैसे सभी कार्य उन्हें स्वीकार्य होते हैं और सावन महीने में शिव जी के साथ एकादशी वाले दिन विष्णु जी की भी विधि विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कामिका एकादशी के दिन व्रत नियमों का पालन और विधि विधान से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और सावन के महीने में पड़ने की वजह से इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस एकादशी का महत्त्व स्वयं भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था।

पूजन से मिलता है विशेष फल 

पंडित पवन कौशिक ने कहा कि इस दिन विष्णु जी का पूजन करने से रुके हुए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। संतान की इच्छा रखने वाले लोगों की संतान प्राप्ति की इच्छा भी पूर्ण होती है। कहा जाता है कि इस एकादशी तिथि में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी फलदायी होता है। कामिका एकादशी का उपवास बुधवार को रखा जाएगा। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है।

भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने का विशेष महत्व

पंडित पवन कौशिक ने कहा कि इस व्रत को करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। कामिका एकादशी की कथा सुनने से यज्ञ करने के समान फल मिलता है। जो व्यक्ति एकादशी पर श्रद्धा पूर्वक भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करता है उसके कष्ट दूर होते हैं। एकादशी के दिन व्रत रखने के बाद आठों पहर भगवान विष्णु के नाम का स्मरण के एवं भजन कीर्तन करना चाहिए। जो लोग एकादशी का व्रत किसी कारण से नहीं रख सकते उनको भी नियमों का पालन करना लाभदायक होता है। जो मनुष्य पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ कामिका एकादशी का उपवास करता है, भगवान विष्णु उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।

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Edited By: Umesh Kdhyani