जागरण संवाददाता, हिसार : सबसे ज्यादा तप व कठोर तपस्या जैन संतों की होती है। कहते हैं जब भी इंसान को अत्याधिक ठंड या कोई कठिनाई महसूस हो तो जैन संतों को याद कर लें, क्योंकि कितनी भी ठंड व गर्मी हो जैन संत बिना वस्त्रों के रहते हैं और विहार करते हैं। इतना ही नहीं पूरे दिन में एक ही बार भोजन व जल ग्रहण करते हैं, चार माह में एक बार अपने केश अपने हाथों से लोच करते हैं। केश लोच वाले दिन उनका उपवास रहता है। स्थानीय नागोरी गेट स्थित सकल दिगंबर जैन मंदिर में संत शिरोमणि आचार्य विद्या सागर महाराज के परम शिष्य जैन संत श्रीश्री 108 वीर सागर महाराज ससंघ विराजमान हैं।

समिति सचिव राजीव जैन ने बताया कि प्रतिदिन मंदिर में प्रवचनों के उपरांत श्रीश्री 108 विशाल सागर महाराज ने सभी श्रद्धालुओं के बीच अपने हाथों से केश लोच किए। केश लोच करते समय मुनिश्री के चेहरे पर मुस्कान रही। लगभग दो घंटों में उनके केश लोच हुए। इस अवसर पर श्रीश्री 108 वीर सागर महाराज, श्रीश्री 108 धवल सागर महाराज के अतिरिक्त सकल दिगंबर जैन पंचायत के राजीव जैन, विनोद जैन, नवीन जैन, सुभाष जैन एडवोकेट, डा. डीके जैन, सुभाष जैन , संजीव जैन, आशीष जैन, विपिन जैन, डा. नवल, गौरव सन्नी, विनोद जैन, मनीष जैन, सुदेश जैन, डोली जैन, शशि जैन, नेहा जैन के अलावा काफी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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