जागरण संवाददाता, हिसार : केमिस्ट की दुकान का लाइसेंस जारी करने के लिए 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में फरार चल रहे जिला ड्रग कंट्रोल अधिकारी सुरेश चौधरी की गिरफ्तारी के मामले में जांच अधिकारी ने अब तक लुकआउट नोटिस जारी नहीं करवाया है। जबकि जांच अधिकारी की तरफ से बुधवार तक लुकआउट जारी करवाने की बात कहीं गई थी। मामले में जवाब दो हिसाब दो संस्था के राजीव सरदाना ने आरोप लगाया कि मामले में विजिलेंस जांचकर्ता की तरफ से जानबूझकर सुरेश चौधरी की गिरफ्तारी नहीं की जा रही, ना ही सुरेश चौधरी की प्रोपर्टी की जांच शुरु की गई। राजीव सरदाना का आरोप है कि इस मामले में आरोपित सुरेश चौधरी पर दर्ज किए गए केस में ना तो सही धारा लगाई गई है। आरोप है कि जांच अधिकारी जानबूझकर मामले को लंबा खिच रहे है और जांच में कमी छोड़ रहे है। जिससे की सुरेश चौधरी को फायदा पहुंचे और वह प्रोपर्टी को खुर्द-बुर्ध कर सकें और बचकर निकल सकें। जबकि जांच अधिकारी को करप्शन एक्ट की धारा 17 में यह पावर है की जब कोई आरोपित जांच में सहयोग नही कर रहा या शामिल नही हो रहा या प्रोपर्टी को डिस्पोज कर सकता है तो जांच अधिकारी उसकी प्रोपर्टी को अटैच कर सकता है। लेकिन जांच अधिकारी एक तरफा कार्रवाई करके सुरेश चौधरी को पूरा फायदा पहुंचा रहा है। आरोप है कि जांचकर्ता अपनी सरकारी नौकरी में पूरी लापरवाही बरत रहा है। मामले को कोर्ट के संज्ञान में लेकर, कोर्ट की निगरानी में जांच करवाने के लिए याचिका डाली जाएगी। जांच अधिकारी शिकायतकर्ता को नए-नए बहाने लगाकर परेशान कर रहा है। कभी केस प्रोपर्टी या रिकवरी मेमो की प्राप्ति नही देता। आरोप है कि कभी ओडियो-वीडियो की रिकार्डिंग का बैकअप देने के लिए बहाने करता है। अब प्रापर्टी जांच, लुकआउट नोटिस, प्रापर्टी अटैचमेंट, सही धारा न लगाने, सरकार से केस चलाने की मंजूरी के बहाने लगाकर, गैर कानूनी कार्य कर रहा है।

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