हिसार: पंचायतों में कार्यों का 70 करोड़ रुपये से अधिक का पेमेंट अटका, गांवों का काम अटका; कब होगा भुगतान?
हिसार में पंचायतों के विकास कार्यों के 70 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान अटके हैं, जिससे गांवों में काम ठप पड़ गए हैं और मजदूर परेशान हैं।

पंचायतों में विकास कार्यों का भुगतान अटका (फाइल फोटो)
HighLights
हिसार में पंचायतों के 70 करोड़ से अधिक भुगतान लंबित
मनरेगा और वीबी जी रामजी योजना के तहत काम प्रभावित
गांवों में विकास कार्य ठप, मजदूर और सरपंच परेशान
जागरण संवाददाता, हिसार। गांवों में विकास की दृष्टि से होने वालों पर असर पड़ा है। उसका कड़ा कारण है कि वीबी जी रामजी स्कीम के तहत ज्यादा काम नहीं मिलना। गांवों में पंचायतें अभी स्कीम को बेहतर तरीके से समझ नहीं पाई है। वहीं पिछले साल के करोड़ों रुपये पंचायतों को नहीं मिल पाए है।
जिले में 70 करोड़ रुपये से अधिक अदायगी की जानी है। इससे गांवों में नहर की सफाई, जलघर की सफाई, सड़क की सफाई सहित अनेक कार्य किए गए थे। साथ ही पहले की मनरेगा के तहत लगे कर्मचारियों की मौजूदा समय में तनख्वाह भी बाकी है।
जिलों में पहले मनरेगा और मौजूदा समय में वीबी जी रामजी योजना के तहत काम करवाए जाते हैं। 309 पंचायतों में यह काम होने हैं। पंचायतों की तरफ से पिछले फाइनेंशियल वर्ष में काम करवाए गए लेकिन अब काम नहीं मिलने से मजदूर परेशान है। सरपंचों से वह काम मांग रहे हैं लेकिन नई योजना के तहत काम का सही तरह से बंटवारा नहीं हो पाया है।
पुरानी मनरेगा स्कीम के तहत अभी भी 70 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। काम भी नहीं हो रहा है। गांवों में काम नहीं होने से मजदूर परेशान है। पैसा और काम दोबारा शुरू करने के लिए वह मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक मिले हैं लेकिन हल नहीं निकला। वीबी जी रामजी स्कीम के तहत अभी पुराने काम नहीं हो रहे हैं। - आजाद सिंह हिन्दुस्तानी, कोषाध्यक्ष जिला सरपंच
काम अटके, ग्रामीण परेशान
गांवों में मौजूद समय में ज्यादा काम नहीं होने से सरपंच व ग्रामीण परेशान है। सरपंचों का कहना है कि गांवों में पहले होने वाले सभी काम नहीं हो पा रहे हैं। मौजूदा योजना के तहत पहले वाले काम नहीं होते। उसमें जल संरक्षण आदि काम होते हैं।
पहले तीन माह में आती थी पेमेंट
गांवों में काम करने पर पहले 3 माह तक पेमेंट आ जाती थी। लेकिन 2025-26 में गांवों की पंचायत की तरफ से काम करवाएं गए। उनको उम्मीद थी उनका पैसा जल्द मिल जाएगा लेकिन वह पैसा नहीं आया। इसमें 60 प्रतिशत लेबर और 40 प्रतिशत पैसा पंचायतों को मिलता था।
