हिसार, वैभव शर्मा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों और कृषि विभाग के लिए सिरदर्द बन गई है। इसका सबसे बड़ा कारण बैंक और बीमा कंपनी से जुड़ा है। बैंक हो या बीमा कंपनी दोनों की वजह से किसान चक्कर काट रहा है। इसके बावजूद भी उसकी समस्या का हल नहीं निकलता। योजना को पलीता लगाने में ऐसी खामियां सामने आ रही हैं कि प्रशासन भी इनका समाधान नहीं निकाल पा रहा। हालात यह हैं फसल बीमा योजना को लेकर 550 कोर्ट केस चल रहे हैं इसके साथ ही दो हजार से अधिक शिकायतें योजना में किसान कर चुके हैं। आलम यह है कि कई बार अलग-अलग मंचों पर इस समस्या को उठाया जा चुका है फिर भी समाधान पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है। बैंक समय से प्रीमियम तो काट रही हैं मगर किसान को जब मुआवजा मिलने में तकनीकी दिक्कत आती है तब बैंक और बीमा कंपनी दोनों ही अपने हाथ पीछे खींच लेती हैं।

इन दो केस से समझिए कहां किसानों की हो रही है अनदेखी

केस 1

बोया गेहूं दिखा दी जौ

घिराय में एक किसान ने गेहूं बोया और फसल बीमा योजना में प्रीमियम भी कटवा लिया। मगर जब मुआवजा लेने की बारी आई तब किसान को पता चला कि उसके रिकार्ड में गेहूं नहीं बल्कि जौ की फसल को दिखा रखा है। जबकि रिकार्ड में गेहूं, खेत में गेहूं मगर बीमा में जौ कर दिया। इसको लेकर किसान भटक रहा है। ऐसी एक शिकायत नहीं बल्कि सैकड़ों शिकायत सीएम विंडों पर भरी हुई हैं। सबसे अधिक शिकायतें ऐसे ही मामले को लेकर हैं।

केस 2

प्रीमियम बीमा कंपनी को पहुंचा तो कोई नहीं देता जवाब

किसानों की दूसरी सबसे बड़ी समस्या बीमा कंपनी से संवाद न होने को लेकर है। एक बार बैंक ने गलत प्रीमियम काट दिया और आगे जाकर मुआवजे के समय किसान को एक नई कमी दिखती है तो बैंक कहता है कि हमने तो बीमा कंपनी को प्रीमियम दे दिया उनसे बात करो, और बीमा कंपनी तक किसान पहुंच ही नहीं पाता। ऐसे में किसान कृषि विभाग के पास जाता है, मगर फिर भी उसकाे समाधान नहीं मिल पाता। यही कारण है कि इस योजना में जहां एक तरफ किसानों को फायदा है तो वहीं दूसरी तरफ इसका जटिल सिस्टम किसानों को सरकारी दफ्तरों और न्यायालयों के चक्कर काटने का विवश कर रहा है।

उच्चाधिकारियों को भी बता चुका है विभाग

इस मामले को लेकर जिला उप कृषि निदेशक डा. विनोद कुमार फोगाट बताते हैं कि इन समस्याओं को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को भी बताया जा चुका है। कुछ समाधान हुआ मगर अभी भी कई समस्याएं ऐसी हैं जिनसे किसान रोजाना दो चार होता है। बैंक व बीमा कंपनियों से जुड़े मामले इसमें बहुतायात में है। अगर रिकार्ड ही सही नहीं चढ़ाया जाएगा तो किसान को मुआवजा कैसे मिलेगी। इस प्रकार की कमियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सांसद ने मांगी डिटेल रिपोर्ट

हिसार सांसद बृजेंद्र सिंह ने इस मामले को लेकर हाल ही में दिशा कमेटी की बैठक में कृषि उप निदेशक से डिटेल रिपोर्ट मांगी है। ताकि इन समस्याओं के समाधान के लिए भारत सरकार में बात की जाए। क्योंकि यह योजना किसानों के लिए काफी हितकारी है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में यह मिला मुआवजा

  • विवरण- खरीफ(2020)- रबी (2020-21)
  • कुल बीमित किसान- 85562- 76519
  • कुल बीमित क्षेत्रफल (हैक्टेयर)-135866- 121421
  • कुल एकत्रित प्रीमियम (रुपये) - 1514879839- 481500000
  • कुल वितरित क्लेम राशि (रुपये)- 2182600000- 96825000
  • कुल लाभान्वित किसानों की संख्या- 63244- 64000

Edited By: Naveen Dalal