सरकारी लैब में सड़क के सैंपल हो गए थे पास, प्राइवेट से जांच करवाने पर मिले थे फेल

संवाद सहयोगी, हांसी : शहर के बहुचर्चित काली देवी रोड निर्माण मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कानून के अनुसार एक महीने के अंदर सकारात्मक रूप से जांच करें। हाई कोर्ट की ओर से यह भी आदेश दिए गए हैं कि यदि इस प्रकार के और भी मामले हैं तो उनको भी निपटाया जाए।

नगर परिषद की ओर से शहर में विकास कार्य करवाए गए थे। इसी के तहत कालीदेवी रोड का निर्माण किया गया था। रोड का निर्माण किए जाने के बाद पूर्व पार्षद सीमांत चौधरी और प्रवीन तायल ने सड़क में घटिया सामग्री प्रयोग करने के आरोप लगाए थे साथ ही परिषद पर विकास कार्यों के बहाने पैसे गोलमाल करने का आरोप लगाया था। निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने के मामले में कई बार सैंपलिग करवाई गई। जब सरकारी लैब से सैंपलिग करवाई गई तो सैंपलों में कोई गड़बड़ नहीं पाई गई थी। बाद में पूर्व पार्षद सीमांत चौधरी ने श्री राम इंस्टीट्यूट आफ इंडस्ट्रीयल रिसर्च न्यू दिल्ली लैब से सैंपलिग करवाई गई थी और सैंपल फेल आने के बाद जांच की मांग की गई थी। परंतु इस मामले में कार्रवाई न होने पर पूर्व पार्षद सीमांत चौधरी व प्रवीन तायल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

ये था पूरा मामला

श्री काली देवी सड़क मार्ग की परतें उसके निर्माण के चंद दिनों बाद ही उखड़ने लगी थी, उस सड़क की क्वालिटी तीन बार सैंपल जांच के बाद भी सरकारी सिस्टम तय नहीं कर पाया था। चौथी बार सड़क के सैंपल सरकारी लैब में जांच करवाने के लिए पहुंचाए गए थे, जबकि सरकारी लैब पहले ही दो दफा सैंपलों पर क्वालिटी दुरुस्त होने की मुहर लगा चुकी थी। पांच करोड़ की भारी भरकम लागत से बन रही श्री काली देवी मंदिर मार्ग की जांच सैंपलिग के फेल में उलझ कर रह गई थी। पूर्व पार्षद प्रतिनिधि सीमांत चौधरी ने आवाज उठाई और इंक्वायरी बैठ गई थी। 3 एक्सइएन व 1 एसओ की फुल फ्लैग संयुक्त टीम ने सैंपल लेकर जांच की, लेकिन इस जांच में भी सैंपल पास हो गए थे और एसडीएम ने 13 अगस्त को फाइनल रिपोर्ट डीसी को भेज दी। लेकिन शिकायतकर्ता ने सैंपल जांच पर ही सवाल उठा दिए और निगम कमीश्नर को फिर से जांच करने हेतु अर्जी लगा दी। फिर से ज्वाइंट डायरेक्टर बेलिना की देखरेख में सैंपल लिए गए और श्री राम लैब से सड़क के सैंपलों की जांच हुई जिसमें सैंपल गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।

उम्मीद जांच सही होगी : तायल

प्रवीन ने कहा इस मामले की जांच के लिए कोर्ट की ओर से एक महीने का समय दिया गया है। उन्हें उम्मीद है जांच सही तरीके से होगी और दोषियों को सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा की जांच सही प्रकार से नहीं हुई तो ऊपरी कोर्ट का रुख करेंगे।

Edited By: Jagran