उकलाना/हिसार [पासा राम धत्तरवाल] पाकिस्‍तान पर बाकी चीजों में तो भारत हावी रहता ही है, मगर अब दूध के मामले में पशु भी पाकिस्‍तान से आगे निकल गए हैं। हिसार के गांव लितानी की मुर्राह नस्ल की भैंस सरस्वती ने 33 किलो 131 ग्राम दूध देकर पाकिस्तान का विश्व रिकार्ड तोड़ दिया है। किसान सुखबीर ढांडा की सात वर्ष की सरस्वती ने पंजाब में आयोजित एक प्रतियोगिता में पाकिस्तान का विश्व रिकार्ड तोड़ा।

सरस्वती भैंस द्वारा पाकिस्तान का रिकार्ड तोड़े जाने पर उकलाना ही नहीं बल्कि हरियाणा में खुशी का माहौल बना है और हर कोई भैंस पालक किसान सुखबीर ढांडा को बधाई देने में लगा हुआ है। यह भैंस सरस्वती अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है और इसे देखने के लिए लोगों का गांव लितानी में तांता लगा हुआ है।

सुखबीर ने बताया कि वह अपनी भैंस सरस्वती को अपने बच्चों की तरह रखते हैं और उसकी देखभाल करते हैं। दिन में सरस्वती को चारे में दस किलोग्राम फीड, जिसमें बिनौला, खल, चने का छिलका, मक्की, सोयाबीन, नमक व आधा किलोग्राम गुड़ व 300 ग्राम सरसों का तेल देते हैं। इसके अलावा तीन किलोग्राम तुड़ी व कुछ हरा चारा खिलाते हैं। गर्मी व सर्दी से बचाने के लिए पूरी सावधानी रखते हैं।

पंजाब में तोड़ा पाकिस्तान का विश्व रिकार्ड

गांव लितानी वासी सुखबीर ढांडा ने बताया कि वह गांव में ही सन 2007 से पशु पालन का कार्य करता है और मुर्राह नस्ल की भैंस रखता है। सन 2009 में वह दुग्ध देने की प्रतियोगिता में भाग लेने लगे थे। अब वह दिसंबर में अपनी सात साल की भैंस सरस्वती को लेकर पंजाब के लुधियाना के गांव जगरांव में हुए डेयरी एंड एग्री एक्सपो भाग लेने गए थे। वहां पीडीएफए प्रतियोगिता में पाकिस्तान की भैंस का दूध देने के मामले में वल्र्ड रिकॉर्ड तोड़ा है। इस प्रतियोगिता में उनकी भैंस ने 33 किलो 131 ग्राम दूध दिया और विश्व रिकार्ड कायम किया है, जिस पर उन्हें दो लाख रुपए का इनाम देकर सम्मानित किया गया है।

पहले भी तोड़ा था पाकिस्तान का रिकॉर्ड

किसान सुखबीर ने बताया कि इससे पहले भी उनकी एक चार दांत वाली भैंस पाकिस्तान का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। उनके घर में सरस्वती के साथ गंगा और जमुना के नाम से भी पहले भैंसें रह चुकी हैं। उनके द्वारा पाली जा रही भैंस कई भैंस ब्यूटी कम्पीटिशन में भी भाग लेकर खिताब जीत चुकी हैं। उनके घर के एक कमरे में अवॉर्ड और सर्टिफिकेट के फोटो उनकी कामयाबी के गवाह हैं। वह अपनी भैंसों के बलबूते पर लाखों के इनाम भी जीत चुके हैं।

भैंसों से कमा रहे लाखों

सुखबीर ने बताया कि भैंस सरस्वती का ही एक कटड़ा है, जिसका नाम नवाब है। नवाब के सीमन बेचकर वह हर साल लाखों रुपए कमा रहे हैं। उनकी सरस्वती से ही क्लोन तैयार करने की भी तैयारी वैज्ञानिक कर रहे हैं। सरस्वती से ही पैदा हुई कटड़ी की कीमत चार लाख की है। भैंस सरस्वती की कीमत 51 लाख लग चुकी है, लेकिन वह अब इस अपनी भैंस सरस्वती को बेचेंगे नहीं।

पशु पालकों को दिया बड़ा संदेश

सुखबीर ढांडा ने देश के पशु पालकों को संदेश दिया कि वह खेतीबाड़ी के साथ पशु पालन का कार्य करें और मुर्राह नस्ल की भैंस रखें। अगर सीमन बढिय़ा नस्ल का होगा तो फिर भैंस का कटड़ा या कटड़ी भी अच्छी नस्ल की पैदा होगी और फिर इससे पशुपालक को फायदा होगा। युवा अब पशुपालन का कार्य करके भी अपना कैरियर बना सकते हैं।

Posted By: Manoj Kumar

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