हिसार [संजय ढांडा]। प्रदेश की राजनीति और विकास के क्षेत्र में मुख्य भूमिका निभाने वाले चौधरी बंसीलाल को विकास पुरुष कहा जाता है। भले ही चौधरी बंसीलाल का परिवार राजनीति में कितना भी आगे क्यों न चला गया हो लेकिन उनके  छोटे भाई आज भी खुद की खराद की दुकान चला रहे हैं।

चौधरी बंसीलाल के छोटे भाई  हरि सिंह भिवानी के गोलागढ़ में खराद की दुकान कर रहे गुजारा

भिवानी-लोहारू रोड पर बसे पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल का पैतृक गांव गोलागढ़ है। इसी रोड पर चौधरी बंसीलाल का समाधि स्थल भी है। इसी के साथ एक छोटी सी खराद की दुकान है। यह दुकान हरिसिंह लेघां की है। वो हरिसिंह जो पूर्व मुख्यमंत्री और देश के रक्षामंत्री रह चुके चौधरी बंसीलाल के सगे और छोटे भाई हैं।

दैनिक जागरण सवांददाता ने जब इस गांव में जाकर हालात का जायजा लिया तो हालात कुछ इस तरह से नजर आए। गोलागढ़ गांव में खराद की दुकान में हरि सिंह मुड्ढे पर बैठे हुए थे। उम्र 70 से पार, सिर पर बाल नहीं। मटमैले रंग का कुर्ता-पायजामा पहने। दाढ़ी और मूछ भी क्लीन। हाथ पर एक अंगुली पर पट्टी बांधे हुए, लग रहा था जैसे  चोट लगी हो।

परिचय जानने के बाद उन्होंने मेरे बैठने के लिए मुड्ढा आगे बढ़ा दिया। देखने पर सहसा विश्वास नहीं हुआ कि हरि सिंह बंसीलाल के सगे भाई हो सकते हैं। बात चली तो उन्होंने गर्दन को उठाते हुए कहा, 'भाई, मैं ए सूं बंसीलाल का भाई अर नां सै हरिसिंह।' इस पर पूछा -आप बंसीलाल के बारे में हमें कुछ बताएं। तो उन्होंने कहा कि ' बंसीलाल शुरू तै तेज दिमाग को थो, चार जमात तो गाम म्हं ए पढया अर फेर लुहारू जाण लागग्यो बाबू गेल। पढ़-लिखकै वकील बणग्या फेर भ्याणी ए वकालत करण लागग्यो। ओड़ै तै फेर वो लोहारू प्रजामंडल को अध्यक्ष बणग्यो।' (बंसीलाल शुरू से ही तेज दिमाग के थे। चौथी कक्षा तक तो गांव में पढ़ाई की और फिर लोहारू पढ़ने जाने लगे। पढ़-लिखकर वकील बन गया और फिर वकालत करने लगे। इसके बाद वह लोहारू प्रजामंडल के अध्‍यक्ष बन गए।)

इसी बीच उन्‍होंने दो बार बोले 'भाई बात तो फेर हो ज्यांगी रोटियां की बताओ, बणवादूं (भाई बात ताे फिर हो जाएगी, खाने की बताओ। रोटियां बनवा दूं।)।  इस पर उनका धन्यवाद करते हुए समय कम होने की बात कही और बंसीलाल के बारे में कुछ बताने का आग्रह किया। इस पर उन्होंने कहा, ' बंसीलाल बहोत बढिय़ा  नेता थो, पर जिद़दी भी बहोत थो, एक बार अड़ ला लिया करदो तो उसनै पूरा करकैं मान्या करदो (बंसीलाल बहुत बढि़या नेता थे, लेकिन जिद्दी भी बहुत थे। एक बात जो ठान लेेते थे तो उसे पूरा करके ही मानते थे)।


दुकान में काम करते हुए पूर्व सीएम बंसीलाल के भाई

उन्‍होंने कहा, 'गाम आले कदे कहया भी करदे तो बंसीलाल कह दिया करदा मैं पूरे हरियाणा का सीएम सूं। मेरी नजर म्हं पूरा हरियाणा गोलागढ़ सै। जडै़ भी जरूरत दिखैगी वो चाहे प्रदेश के किसे कोणे में हो पूरा करवाऊंगा। (गांव वाले कभी किसी काम के लिए बंसीलाल को कह देते थे तो कहते थे कि पूरे हरियाणा का सीएम हूं। मेरी नजर में पूरा हरियाणा गोलागढ़ है)।'

बड़े भाई के बेमिसाल जज्‍बे और सोच को याद करते हुए हरि सिंह आगे बोले, 'अर बेटा, जुई फीडर जब बणाई तो सारे न्यूं कहया करदे के भाई बंसीलाल तो पागल हो रहयो सै, इतणी उंचाई पर अर रेत के टिब्यां पै पाणी क्यूकर जावैगो। फेर जिद नहर बणगी अर लिफ़टां तै पाणी छोडयो गयो तो भाई सबनै न्यूं कही थी कि बंसीलाल आदमी नहीं देवता सै भाई। फेर भाई गाम गेल एक-एक नलका लागग्यो।(और बेटा, जब उन्‍होंने जुई फीडर बनवाई तो सारे लोगों ने कहने लगे कि भाई बंसीलाल पागल हो गया है। इतनी ऊंचाई और रेत के टिब्‍बा पर पानी कैसे आएगा। फिर नहर बन गई तो और लि‍फ्टिंग से पानी आ गया तो लोग कहने लगे भाई बंसीलाल आदमी नहीं देवता है। फिर गांव के घरों में नल लग गए।)।'


खराद की दुकान पर लोहे के औजारों को तैयार करते हुए बंसी लाल के भाई

उनसे पूछा गया कि अब उनकी जमीन तो होगी, तो हरिसिंह ने कहा कि उनकी जमीन रणबीर महेंद्रा संभाल रहे हैं सैं भानगढ़ में। जब उनसे पूछा गया कि आपके उनके साथ कैसे संबंध रहे हैं और उनके परिवार के साथ कैसे हैं तो हरिसिंह ने कहा, भाई जिद छोटे थे तो कट्ठे रहया करदे। पर म्हारा तो बेटा कुछ करयो नहीं उननै। फेर भी कोए बात नै, आपां तो इसमें ए खुश सां। या दुकान सै घर का आपणा कुछ काम समारल्यां सां (जब छोटे थे तो एक साथ रहते थे। बेटा बाद में उन्‍होंने मेरे लिए तो कुछ किया नहीं। फिर भी कोई बात नहीं, मैं तो इसी में खुश हूं। इस दुकान से घर संभाल रहा हूं)।

पूर्व सीएम बंसीलाल की फाइल फोटो

बातों-बातों में भाई हरिसिंह की आंखों से झलका दर्द

जब बंसीलाल के भाई हरिसिंह से बातचीत चल रही थी, तो अचानक उनकी आंखें भी भर आई और रुंधे गले से बात कही कि बंसीलाल भाई था मेरा। विकास भी खूब कराया पर उनके लिए कुछ खास नहीं किया। इसका मलाल उन्हें रहेगा।

Posted By: manoj kumar