हरियाणा का समाधा मंदिर क्यों है खास? 150 साल से हवा में लटका है बरगद का पेड़; पढ़ें इसका इतिहास
हरियाणा के हांसी में स्थित समाधा मंदिर अपनी ऐतिहासिकता और हवा में तैरते बरगद के पेड़ के लिए प्रसिद्ध है। ...और पढ़ें
HighLights
समाधा मंदिर में 150 साल से हवा में तैरता बरगद का पेड़
हरियाणा सरकार ने मंदिर के कायाकल्प और स्मार्ट रोड की घोषणा की
बाबा जगन्नाथपुरी से जुड़ा है मंदिर का प्राचीन इतिहास
डिजिटल डेस्क, हिसार। हरियाणा के हांसी में मौजूद समाधा मंदिर उन मंदिरों में शामिल है जो अपनी ऐतिहासिकता और प्राचीनाता के साथ-साथ चमत्कारिक किस्सों के लिए जाना जाता है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं यहां दर्शन के लिए आते हैं।
हाल ही में हरियाणा सरकार ने समाधा मंदिर के कायाकल्प के लिए बड़े एलान किए हैं। इस मंदिर की क्या मान्यता है और इसे चमत्कारिक क्यों कहा जाता है? इसके इतिहास को समेटते हुए आइए, इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं?
कहां है समाधा मंदिर?
समाधा मंदिर हरियाणा के हांसी शहर में है। हांसी के दक्षिण पश्चिम में मौजूद यह मंदिर गौसाई गेट से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। इस मंदिर का नाम बाबा जगन्नाथ पुरी जी की समाधी के नाम से पड़ा है।

हांसी को अभी हरियाणा का 23वां जिला बनाया गया है। ऐसे में इस जिले के विकास कार्यक्रमों पर सरकार खास ध्यान दे रही है। इसी क्रम में समाधा मंदिर कायाकल्प के लिए भी सरकार जुटी है।
समाधा मंदिर में क्या होगा खास?
प्राचीन समाधा मंदिर के लिए नगर परिषद ने सिसाय पुल तक के मार्ग को स्मार्ड रोड के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। सड़क पर रंगीन टायलें लगाई जाएंगी।
इसी के साथ लाइटिंग और हरियाली पर खास ध्यान दिया जाएगा। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बैंच भी लगाए जाएंगे। इसी के साथ रास्ते में करीब सात सेल्फी प्वाइंट लगाए जाएंगे।

क्यों खास है समाधा मंदिर?
इस मंदिर के परिसर में एक बरगद का पेड़ है। ऐसा कहा जाता है कि यह हवा में तैर रहा है। इसकी मुख्य जड़ जमीन से अलग है। इस पेड़ को देखते हैं तो इसका मुख्य तना और मुख्य जड़ के बीच करीब एक फुट का स्पेस नजर आता है। ऐसे में लगता है जैसे यह पेड़ हवा में तैर रहा हो।
दरअसल, इस पेड़ की मोटी शाखाएं बराबर वाले पेड़ पर टिकी हैं और वहीं से इस पेड़ को जीवंत रहने का मुख्य आधार मिल रहा है। इसलिए इस पेड़ का मुख्य तना अब सिर्फ हवा में लटक रहा है।
क्योंकि पेड़ का मुख्य आधार उसका मुख्य तना होता है। इसलिए फोकस उसी पर जाता है और प्रतीत होता है, जैसे यह हवा में टिका हो। सोशल मीडियापर इसे लोग चमत्कार मानकर दूर-दूर से देखने के लिए आते हैं।-दूर से देखने आते हैं।

क्या है मंदिर का इतिहास?
बाबा जगन्नाथपुरी मध्यकाल में एक चमत्कारी सिद्ध संत हुआ करते थे। उन्होंने ही इस मंदिर की नींव रखी। बाबा जगन्नाथ पुरी का जन्म सन् 1570 ई. में भादो माह की कृष्णपक्ष की पंचमी के किवंदती के अनुसार भिवानी जिले के तोशाम कस्बे में राजपूत परिवार सूरजाराम तंवर के घर पर हुआ। जन्म के समय इनके पारिवारिक गुरू संत पवनपुरी जी मौजूद थे।
बाबा ने इसी इलाके में में धर्म के नाम पर फैले भेदभाव व पाखंड का खंडन कर समाज में हर व्यक्ति को मिलजुल कर प्रेम से रहने का संदेश दिया व पाखंडी चमत्कारों का मुंहतोड़ जवाब देकर पाखंडियों की आंखें खोली, भयभीत जनसाधारण के साथ-साथ अन्य जीवों को भी भयमुक्त किया।
