विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

साइबर क्राइम पर रोक के लिए हरियाणा में बनेंगे समन्वय केंद्र, 204 नए पदों पर होगी भर्ती; तुरंत मिलेगा शिकायत का समाधान

Published: Tue, 06 Oct 2026 02:46 PM (IST)

हरियाणा पुलिस साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक समन्वय केंद्र स्थापित करेगी, जिसके लिए 204 नए पदों को मंजूरी ...और पढ़ें

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. साइबर अपराध समन्वय केंद्र के लिए 204 नए पद मंजूर

  2. आईटी पेशेवर साइबर सुरक्षा में पुलिस की मदद करेंगे

  3. ऑनलाइन मॉड्यूल से शिकायतों की निगरानी और त्वरित समाधान

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस अब समन्वय केंद्र बनाएगी।प्रदेश सरकार ने साइबर अपराध समन्वय केंद्र के लिए 204 नए पदों को मंजूरी दे दी है। इनमें सात राजपत्रित अधिकारी, 161 पुलिसकर्मी, 12 मिनिस्ट्रियल स्टाफ तथा 15 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, साफ्टवेयर डेवलपमेंट और नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेशन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में नौ आइटी पेशेवरों की नियुक्ति संविदा आधार पर की जाएगी।

पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि नए पदों के सृजन से सेंटर की संस्थागत एवं तकनीकी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही साइबर अपराधों से निपटने, उभरते साइबर खतरों की निगरानी करने और जांच एवं समन्वय तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

साइबर अपराध नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने पर जोर देते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत निवारण मॉड्यूल और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

इन मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ितों की शिकायतों पर प्राथमिकता से कार्रवाई करते हुए ठगी गई राशि को यथाशीघ्र उनके खातों में वापस लौटाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और पीड़ितों को समयबद्ध राहत प्रदान करने के निर्देश भी दिए।

डीजीपी ने बताया कि शिकायतों की निगरानी के लिए ऑनलाइन कंप्लेंट मानिटरिंग मॉड्यूल विकसित किया गया है। इसके माध्यम से पुलिस अधीक्षक अपने जिलों में लंबित शिकायतों की स्थिति की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर सकेंगे।

डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ज्यादा समय से लंबित शिकायतों के संबंध में संबंधित थाना प्रभारियों से देरी का कारण पूछा जाए और उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इस मॉड्यूल के माध्यम से शिकायतों के क्षेत्रवार विश्लेषण और उनके कारणों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार किया जा सकेगा।