जागरण संवाददाता, भिवानी : इस सत्र में सरकारी स्कूलों में दाखिले दो लाख से ज्यादा बढ़े हैं पर विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। पिछले दिनों शिक्षा विभाग ने पुरानी पुस्तकें लेकर काम चलाने के लिए आह्वान किया था। अध्यापकों ने सीनियर बच्चों से उनकी पुस्तकें लेकर बच्चों को दी भी लेकिन आज भी आठवीं तक के ऐसे लाखों बच्चे हैं जिनको पुस्तकें नहीं मिली हैं। खुद अध्यापक कह रहे हैं कि इस बार पुस्तकें प्रकाशित ही नहीं कराई गई हैं। ऐसे में स्कूलों में बच्चों को पुस्तकें कैसे उपलब्ध होंगी।

अब तक कक्षावार बच्चों की संख्या इस प्रकार है :

कक्षा छह -- 2 लाख 17 हजार 200

कक्षा सात -- एक लाख 99 हजार 327

कक्षा आठ -- दो लाख तीन हजार 542

अध्यापकों ने बताया कि स्कूलों में पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। पुरानी किताबें भी ली हैं। इसके अलावा दुकानों पर कुछ पुस्तकों प्राइवेट प्रकाशकों की मिल रही बताई जा रही हैं। कुछ बच्चे किसी तरह वे भी ला रहे हैं। कुल मिला कर बात ये हैं कि सरकारी पुस्तकें इस बार स्कूलों में अब तक नहीं आई हैं। इससे विद्यार्थियों को तो परेशानी हो रही है खुद अध्यापक भी परेशान हैं। सिलेबस की तैयारी कराने में खासी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।

अभिभावक संदीप कुमार, अशोक कुमार ने बताया कि हम बच्चों को किताबें कहां से लाकर दें। अगली कक्षा वाले बच्चों से भी पूछ चुके हैं। सबने अपनी पुस्तकें अध्यापकों को लौटा दी। अब तो बाजार में दुकानों पर जाते हैं तो मिल नही रही हैं। बच्चे कैसे पढ़ाई कर पाएंगे समझ नहीं आ रहा है।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रामअवतार शर्मा ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पुरानी किताबें लेकर काम चलाया जा रहा हैं वहीं बच्चों को भी एक दूसरे की मदद के लिए कहा गया है। अध्यापकों से भी व्यवस्था बनाने के लिए कहा गया है। जैसे ही पुस्तकें आती हैं बच्चों को दे दी जाएंगी।

 

Edited By: Manoj Kumar