जागरण संवाददाता, रोहतक : सरबंस दानी गुरु गोबिंद सिंह के 355वां प्रकाश पर्व रोहतक में धूमधाम से मनाया जा रहा है। गुरु पर्व के अवसर पर जींद चौक स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में कीर्तन समागम शुरू हुआ। जिसमें गुरु गोबिंद नाम की गूंज है। यहां दूर-दूर से संगत आई हैं। गुरुद्वारे में रागी जत्थे गुरुपर्व की खुशियां मना रहे हैं। रागी जत्थे हरियाणा के अलावा पंजाब व दिल्ली से भी यहां पहुंचे हैं और गुरु बाणी से संगत को निहाल कर रहे हैं।

गुरुद्वारा बंगला साहिब नौवीं पातशाही में महान कीर्तन समागम मनाया जा रहा है जहां दूर दूर से संगत पहुंची हुई है। कीर्तन में दिगंबर सिंह के अलावा पंजाब के पटियाला से दिलप्रीत कौर, गुरुद्वारा माईजी से सत्संग जत्था, घरोंडा हरियाणा से अमीर सिंह व दिल्ली से अमृतपाल सिंह नूर गुरुबाणी से संगत को निहाल कर रहे हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सेवकों ने बताया कि शाम को गुरुद्वारे में दीवान होगा। जिसमें पंजाब से लखविंद्र सिंह के अलावा अन्य रागी जत्थे भी गुरु की महिमा का गुणगान करेंगे। गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व (गुरुपर्व) के उपलक्ष्य में इससे पहले शहर में प्रभात फेरी भी निकाली गई।

दशमेश सेवक दल गुरुद्वारा बंगला साहिब रोहतक के सेवकों ने बताया कि यह प्रभात फेरी शनिवार को सुबह साढ़े पांच बजे गुरुद्वारा बंगला साहिब से चलकर कीर्तन करते हुए कच्चा बेरी रोड चौक, गुरुद्वारा टिकाणा साहिब, भिवानी स्टैंड, शांतमाई चौक, दिल्ली गेट, किला रोड, प्रताप चौक, कसाईयो वाला चौक, गुलाब रेवाड़ी, बाबरा मुहल्ला से वापस गुरुद्वारा बंगला साहिब पहुंची। जगह-जगह संगतों ने प्रभात फेरी का स्वागत किया। अनेक स्थानों पर प्रसाद के स्टाल लगाए गए और संगत का प्रसाद वितरित किया गया।

ऐतिहासिक है गुरुद्वारा बंगला साहिब :

गुरद्वारा बंगला साहिब में लगे सूचना पट्ट के मुताबिक जब जब नौवें पातशाह गुरु तेग बहादुर साहिब हिंदू धर्म की रक्षा के लिए औरंगजेब के बुलावे पर सन 1675 कार्तिक महीने में अपने पवित्र शीश की शहीदी देने के लिए आनंदपुर साहिब से धमतान साहिब जींद लाखनमजारा होते हुए जा रहे थे। उसी दौरान वे यहां इस धरती पर पहुंचे। इस गुरुद्वारा बंगला साहिब से संबंधित गुरुद्वारा माई जी है, जो कलालान मुहल्ले में स्थित है। यहां गुरु तेग बहादुर साहिब की याद में गुरुद्वारा बंगला साहिब, पातशाही नौंवी सुशोभित है। इस पावन स्थान पर दस गुरुओं के गुरुपर्व, ऐतिहासिक दिन आदि पर दीवान सजाए जाते हैं।

Edited By: Manoj Kumar