हिसार, जेएनएन। हिसार जिले में कोरोना से जुड़ी अच्‍छी खबर है। कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जिले में कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट 83.65 फीसद पर आ गया है। यह चिकित्सकों की मेहनत का ही नतीजा है कि हिसार जिला कोरोना का पछाड़ने में अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। जिले में कोरोना के कुल 1223 मामले आए है। जिनमें से 1023 मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे है। जिले में कोरोना के अब 190 एक्टिव मामले है। एक और जहां कई राज्यों में कोरेाना संक्रमण के चलते सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं जिले में कोराेना मरीजों के रिकवरी रेट से चिकित्सक सहित प्रशासन भी संतुष्ट नजर आ रहा है तथा इसमें और सुधार के इंतजामों में लगे हुए है। जिले के आंकड़ो को देखे तो प्रशासन की ओर से मरीजों को दिया जा रहा पौष्टिक खाना और चिकित्सकों की मेहनत रंग ला रही है। पौष्टिक खाने से मरीजों का इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत हो रहा है और मरीज कोरोना का मात दे रहे है।

फरवरी महीने से लेकर अब तक हुए 41 हजार से अधिक टेस्ट -

जिले में कोरोना से लड़ने के लिए जिला शुरुआत से ही अग्रणी रहा। जिले में पहले राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान की लैब कोरेाना सैंपलिंग के लिए तैयार की गई थी। वहीं इसके बाद अग्रोहा मेडिकल में भी कोरोना जांच के लिए लैब स्थापित कर टेस्टिंग शुरु की गई। जिले में कोरोना मरीजों के लिए पहले रोहतक मेडिकल की लैब में सैंपल भेजने पड़ते थे। जहां से रिपोर्ट आने में सामान्यत: 2 से 3 तीन लग जाते थे। कई बार टेस्टिंग की संख्या अधिक होने पर रोहतक मेडिकल से एक रिपोर्ट के लिए 5 से 6 दिन भी लगे है। जिले में अब तक कोरोना जांच के लिए 41091 सैंपल लिए जा चुके है। जिनमें से 38624 की रिपोर्ट निगेटिव भी आई है। वहीं जिले में अब तक 4408 लोगों को सर्विलासं पर लिया जा चुका है। जिनमें से 3037 लोग अपनी 28 दिन की अवधि पूरी कर चुके है। जिले में मौजूदा समय में 1371 लोग अंडर सर्विलांस है।

नई डिस्चार्ज पॉलिसी के तहत डिस्चार्ज किए जा रहे मरीज -

स्वास्थ्य विभाग की ओर से नई डिस्चार्ज पॉलिसी के तहत मरीजों को डिस्चार्ज किया जा रहा है। जिसमें विभाग ने तीन ग्रुप बनाए है। पहले व दूसरे ग्रुप में हल्के व मध्यम लक्षण वाले मरीजों को बिना लक्षण 10 दिन अस्पताल में रखा जाता है। इसमें अंतिम तीन दिन में बुखार ना हो और ऑक्सीजन लेवल ठीक हो तथा सांस लेने में कठिनाई ना हो तो मरीजों को डिस्चार्ज किया जा सकता है। इसमें दोबारा टेस्ट भी नहीं लिया जाता। वहीं गंभीर मरीजों के मामले में मरीज के स्वस्थ होने पर व रिपोर्ट निगेटिव आने पर तथा ऑक्सीजन लेवल ठीक होने पर मरीजों को डिस्चार्ज किया जाता है।

Posted By: Manoj Kumar

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