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कांवड़ यात्रा की तर्ज पर बढ़ी गोगा महाराज के भक्तों की पैदल आस्था, 300 KM पैदल चलकर हिसार पहुंचे सोहना के श्रद्धालु

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:50 AM (IST)

कांवड़ यात्रा की तर्ज पर गोगा महाराज के भक्तों की पैदल आस्था बढ़ रही है। सोहना से आए श्रद्धालुओं का एक जत्था 300 किलोमीटर पैदल चलकर हिसार पहुंचा।

गोगा महाराज के भक्तों की पैदल आस्था (जागरण फोटो)

गोगा महाराज के भक्तों की पैदल आस्था (जागरण फोटो)


HighLights

  1. गोगा महाराज के भक्तों की पैदल आस्था कांवड़ यात्रा जैसी

  2. सोहना के श्रद्धालु 300 किलोमीटर पैदल चलकर हिसार पहुंचे

  3. जतिन और प्रियांशु मोहला गांव से ज्योत लेकर लौटे

नमहा यादव, हिसार। रात के करीब 10 बजे हिसार-दिल्ली हाईवे पर हांसी के पास ट्रैक्टर-ट्राली के आगे दो युवा हाथों में लालटेननुमा ज्योत थामे चले जा रहे थे। पीछे डीजे बज रहा था और आगे अंधेरे को चीरती ज्योत की लौ रास्ता दिखा रही थी।

ये हांसी जिले के मोहला गांव के करीब 28 वर्षीय जतिन और 27 वर्षीय प्रियांशु थे। जतिन गांव में खेतीबाड़ी करते हैं, जबकि प्रियांशु शहर की एक निजी फर्म में नौकरी करते हैं। दोनों चार साल से दोस्तों के साथ गोगामेड़ी से गोगा महाराज की ज्योत लेकर गांव लौट रहे हैं और इस बार भी एक सप्ताह की छुट्टी लेकर इस परंपरा को निभाने निकले।

शनिवार को वे ज्योत लेकर गांव पहुंच गए। उनके हाथों में सिर्फ ज्योत नहीं थी, बल्कि चार साल से निभाई जा रही आस्था की वह परंपरा थी, जो अब गोगानवमी पर सड़कों को नया दृश्य दे रही है।

शिवरात्रि की कांवड़ यात्रा की तरह गोगामेड़ी से पवित्र ज्योत, ध्वजा और पताका लेकर श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। कोई सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहा है तो कोई डाक कांवड़ की तरह तेज कदमों से दूरी पूरी कर रहा है। सोहना से निकला श्रद्धालुओं का जत्था भी करीब 300 किलोमीटर पैदल चलकर शनिवार को हिसार पहुंचा।

300 किलोमीटर की राह में ध्वजा बनी संकल्प

गुरुग्राम के सोहना स्थित शिव कालोनी से नीरज कुमार, अर्जुन, पटवारी, मुलायम, विनोद, मुंदरी, ओमचंद और सौरभ समेत श्रद्धालु दो सितंबर को गोगाजी की ध्वजा लेकर निकले थे।

करीब 300 किलोमीटर का सफर पैदल तय करते हुए शनिवार को हिसार पहुंचे। एक युवक ध्वजा लेकर पैदल चल रहा है, जबकि बाकी साथी वाहन से उसका साथ दे रहे हैं। रहने और खाने का सामान भी साथ है।

सड़कों पर उभर रहा आस्था का नया दृश्य

गोगानवमी की इन यात्राओं में ध्वजा और ज्योत अब श्रद्धा के साथ यात्रा की पहचान भी बन रही हैं। कहीं ध्वजा थामे श्रद्धालु पैदल आगे बढ़ रहे हैं, कहीं ज्योत लेकर युवा गांव लौट रहे हैं और उनके साथ वाहन चल रहे हैं।

गोगामेड़ी में धोक लगाने की परंपरा सड़कों पर ऐसे दृश्यों के साथ विस्तार पा रही है, जिसमें यात्रा, संकल्प और सामूहिक आस्था एक साथ दिखाई दे रही है।

पहले वाहन से जाते थे, अब पैदल यात्रा

नीरज कुमार बताते हैं कि यह उनकी दूसरी पैदल यात्रा है। पहले वे वाहन से गोगामेड़ी जाते थे, लेकिन इस बार मन में श्रद्धा का भाव लेकर पैदल यात्रा का संकल्प लिया। गोगामेड़ी पहुंचकर धोक लगाने के बाद वे नौ सितंबर को सोहना के लिए वापस निकलेंगे। लंबी दूरी और यात्रा की थकान के बावजूद जत्थे का उत्साह बना हुआ है।