जागरण संवाददाता, हिसार: शहर से दूर धांसू रोड पर खाली जमीन में शुक्रवार को ग्लैंडर्स ग्रसित एक घोड़ी को वैज्ञानिक तरीके से मौत देकर दफनाया गया। दवाओं के जरिये पहले घोड़ी को मारा गया। इसके बाद उसे 10 फुट गहरे गड्ढे में दफना दिया गया। खास बात है कि घोड़ी को मारने की प्रक्रिया पूरी करने के दौरान पशु चिकित्सकों ने विशेष प्रकार की पीपीटी किट को पहना हुआ था, जिसको पहनने के बाद टीम संक्रमण से बच सकेगी। इसके साथ ही शनिवार को चार अन्य घोड़ियों को मौत देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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पिछली बार भी इसी स्थान पर दफनाई थी घोड़ी

धांसू रोड पर नंदीशाला के आगे काफी खाली जमीन है। पिछली बार भी यहीं पर ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ी को दफनाया गया था। घोड़ी को दफनाने के लिए जेसीबी मशीन की मदद से गड्ढा खोदा गया। ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ी को सबसे पहले दर्दमुक्त तरीके से मौत के लिए दवा दी गई। फिर गड्ढ़े में चूना डालकर उसे दफना दिया गया। किसी दूसरे जानवर में ग्लैंडर्स न पहुंच सके इसलिये गहरे गड्ढे में जानवरों को दफनाया जाता है।

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पशुपालक को मिलता है मुआवजा

ग्लैंडर्स के मामले में लाखों रुपये की घोड़ी को पशुपालक को खोना पड़ता है, इसलिए सरकार ने इसमें मुआवजा देने का प्रावधान पहले से ही निर्धारित किया है। इसमें एक घोड़ी के 25 हजार रुपये पशुपालक को बतौर मुआवजा दिए जाते हैं। पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. डीएस सिधु ने बताया कि घोड़ी की मौत के लिए चार वेटरनरी सर्जन, चार वीएलडीए व चार कर्मचारियों को लगाया गया।

Posted By: Jagran

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